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New Year वेकेशन पर इन जगहों पर जाने का बनाएं प्लान, काफी अलग होगी नये साल की पहली सुबह

साल 2023 खत्म होने वाला है। हर कोई नयी उम्मीदों और सपनों के साथ बाहें फैला कर 2024 का स्वागत करने के लिए तैयार है। साल के इस समय में लोगों पर काम का दबाव कम होता है और समय निकालकर कुछ पल परिवार और दोस्तों के साथ आराम से बीता भी पाते हैं। बीत रहे साल का आखिरी दिन हो या आने वाले नये साल का पहला दिन...दोनों दिनों में ही सूर्यास्त और सूर्योदय का काफी महत्व होता है।

rann of kutch sunset

लोग इन दोनों दिनों में सूर्यास्त और सूर्योदय को मिस नहीं करना चाहते हैं। अगर आप भी इस समय कहीं घुमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो हम आपको कुछ ऐसी ऑफबीट जगहों के बारे में बता रहे हैं, जहां सालभर लोग सूर्योदय या सूर्यास्त को देखने के लिए सबसे अधिक भीड़ जमाते हैं।

1. हम्पी

कर्नाटक राज्य में स्थित हम्पी में आज सिर्फ खंडहर ही मौजूद हैं, लेकिन जरा सोचिए एक समय में इन खंडहरों में एक पूरा का पूरा शहर बसता था। तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित हंपी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी। इन खंडहरों की सुन्दरता को देखकर ही लोग इन्हें अपने कैमरे में कैद करने से खुद को नहीं रोक पाते हैं। यूनेस्को की विश्व विरासत साइट हंपी में पुराने बाजार, महल, तहखाने, शाही मंडप, गढ़ और ना जाने कितनी असंख्या इमारतें थी जिनके खंडहर आज भी यहां मौजूद हैं।

humpi karnataka sunrise

अगर नये साल के पहले उगते सूरज का शानदार व्यू किसी खास जगह से देखना चाहते हैं तो हम्पी आने का प्लान जरूर बनाएं। यहां पहाड़ियों के पीछे से उगते हुए सूर्य को देखने के लिए साल भर पर्यटक आते रहते हैं। अगर आपको ट्रेकिंग करने का शौक है, तो आप यहां वह भी कर सकते हैं। सूर्योदय देखने के बाद किराए पर स्कूटी ले और पंपा सरोवर, सनापुर झील आदि देखने के लिए निकल जाएं।

कैसे पहुंचे - हंपी बैंगलोर से लगभग 376 किमी और हैदराबाद से 385 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन होसापेट है जो हंपी से करीब 13 किमी दूर है। गोवा, सिकंदराबाद और बैंगलोर से हंपी के लिए सीधी बस सेवा उपलब्ध है। इसके अलावा आप किराए पर गाड़ी या टैक्सी लेकर भी यहां आ सकते हैं।

2. बनारस

दुनिया के सबसे पुराने शहर भगवान शिव की नगरी काशी या वाराणसी। मंदिरों और घाटों के इस शहर में सुबह की गंगा आरती के साथ सुरज उगता है और शाम को बाबा विश्वनाथ की आरती में बज रही घंटियां सुनने के बाद यहां सुरज डूबता है। जरा सोचिए, सर्दियों की कुहासे वाली सुबह में नाव पर बैठकर एक घाट से दूसरे घाट तक घुमना, अस्सी घाट पर गंगा आरती देखना और पक्षियों को दाना खिलाना...कितना अलग सा एक्सपीरियंस होगा। है ना...।

varanasi ganga and boat

सर्दियों में सूर्योदय के समय सुबह में बनारस का पूरा आसमान लाल रंग का दिखाई देता है। इसके बाद बनारस की गलियों में घुमते हुए कुल्हड़ वाली चाय, कचौड़ी, टमाटर की चाट और सर्दियों में सबका फेवरेट मलाइयो...। शाम के समय दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती देखना बिल्कुल मत मिस किजीए।

कैसे पहुंचे - बनारस अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। यहां साल भर सिर्फ देसी ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी भारी संख्या में आते रहते हैं। इसलिए वाराणसी सभी प्रमुख शहरों से सीधे तौर पर विमान, सड़क और रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है।

3. कन्याकुमारी

कन्याकुमारी दक्षिण भारत का सबसे अंतिम छोर है। यहां तीन नदीयों नहीं बल्कि 3 समुद्र का संगम होता है। सुबह के समय में जब यहां सुर्य अपनी लालिमा बिखेरता है तब ऐसा लगता है मानो वह समुद्र के नीचे से बाहर निकल रहा हो। विवेकानंद रॉक मेमोरियल और संत तिरुवल्लुवर की मूर्ति के पास से सूर्योदय को देखना कितना रोमांचक लगता है, इस बात का अंदाजा आपको कन्याकुमारी जाने के बाद ही लगेगा।

stunning sunrise at kanyakumari

कन्याकुमारी से सूर्योदय देखने की बेस्ट जगह, लाइटहाउस है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों का नजारा बेहद शानदार दिखता है। सुबह के समय कन्याकुमारी में सूर्योदय का आनंद लेने के बाद दिन में कुमारी अम्मन मंदिर में दर्शन के लिए जरूर जाइए।

कैसे पहुंचे - कन्याकुमारी भारत का सबसे अंतिम छोर होने की वजह से लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट है। यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट त्रिवेंद्रम है। त्रिवेंद्रम से कन्याकुमारी करीब 90-95 किमी की दूरी पर मौजूद है। त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट से कन्याकुमारी के बस, टैक्सी और किराए पर गाड़ियां आसानी से मिल जाएंगी। कन्याकुमारी में रेलवे स्टेशन तो है लेकिन यहां तक देश के कई बड़े शहरों से डायरेक्ट ट्रेन मिलने में मुश्किल होती है। इसलिए नजदीकी रेलवे स्टेशन तिरुवनंतपुरम है, जो कन्याकुमारी से 85 किमी दूर है।

4. रन ऑफ कच्छ

दूर-दूर तक जहां तक नजर जाती है, वहां तक बस सफेद ही सफेद रंग नजर आता है। लेकिन यह मत भुलिए कि आप कश्मीर या सिक्किम में नहीं बल्कि गुजरात के कच्छ के रन में खड़े हैं। यहां आपकी नजरें जहां तक जाती हैं, बस नमक का सफेद रेगिस्तान ही दिखाई देता है। दिसंबर से लेकर फरवरी के महीने तक हर साल यहां रन उत्सव का आयोजन भी होता है, जिसमें गुजरात की संस्कृति, उसकी धरोहरों के बारे में आपको विस्तार से देखने और समझने का मौका भी मिलता है।

beautiful sunrise at rann of kutch

रन उत्सव में यहां टेंट सिटी बनायी जाती है, जिसमें लग्जरी के साथ ठहरना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होगा, खुले आकाश के नीचे बोन फायर जलाकर उसके चारों तरफ बैठकर गप्पे मारना और स्वादिष्ट गुजराती व्यंजनों का लुत्फ उठाना...नये साल की शुरुआत के लिए इससे बेहतर क्या हो सकता है।

कैसे पहुंचे - कच्छ भुज का एक प्रशासनिक शहर है। भुज एयरपोर्ट पर भारत की प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई आदि से सीधी उड़ान मिलती है। भुज एयरपोर्ट से आपको रन मरुस्थल तक के लिए टैक्सी या किराए पर गाड़ियां मिल जाएंगी। कच्छ का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन भुज ही है, जहां से रन तक के लिए गाड़ियां आसानी से उपलब्ध होती हैं।

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