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पंच केदार : जहां दर्शन मात्र से ही दूर हो जाते हैं सारे कष्ट

By Nripendra Balmiki

देवभूमि उत्तराखंड अपने धार्मिक स्थलों के लिए पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है। भारत का यह पहाड़ी राज्य शुरू से ही आस्था का बड़ा केंद्र रहा है। गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ ये कुछ ऐसे पौराणिक स्थल हैं जो इस राज्य को दैवीय रूप प्रदान करते हैं। यहां साल भर पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहता है। यहां के अधिकतक मंदिर दुर्गम पहाड़ी स्थलों पर मौजूद हैं, लेकिन फिर भी यहां भक्तों की सख्या में कोई कमी नहीं होती।
भक्त खतरनाक पहाड़ी रास्तों को पार कर इन धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं। अपने पौराणिक-धार्मिक महत्व के कारण यहां स्थित भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ का हिन्दू धर्म में एक विशेष महत्व है। जहां हर साल दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं केदारनाथ के अलावा भी 4 और केदार उत्तराखंड में मौजूद हैं, जिनका अपना अलग धार्मिक महत्व है। आइए जानते इन पंच केदारों के बारे में। 

केदार में प्रथम, केदारनाथ

केदार में प्रथम, केदारनाथ

PC- Devajyoti Sarkar

उत्तराखंड के पंच केदारों में केदारनाथ का सर्वश्रेष्ठ स्थान है। भगवान शिव का यह स्थान राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में है। हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में सम्मिलित है। यहां का रास्ता बड़ा ही खतरनाक माना जाता है। प्रतिकूल जलवायु की वजह से मंदिर के द्वार अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही खोले जाते हैं। पौराणिक किवदंतियों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कुरू वंश के राजा जनमेजय ने करवाया था।

यहां शिवलिंग स्वयं प्रकट हुए हैं। मंदिर की दैवीय शक्ति का इस तथ्य से पता चलता है कि 2013 में आई केदारनाथ आपदा के दौरान मंदिर का जरा सा भी नुकसान नहीं हुआ था।

मध्यमेश्वर

मध्यमेश्वर

PC- Bodhisattwa

पंच केदारों में केदारनाथ के बाद मध्यमेश्वर का नाम आता है। जो ऊषीमठ से लगभग 18 मील की दूरी पर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर को मदनमहेश्वर भी कहा जाता है। इस स्थान पर भगवान शिव की नाभि शिवलिंग के रूप में स्थित है। पौराणिक किवदंतियों के अनुसार भोलेनाथ ने अपनी मधुचंत्र रात्रि (सुहागरात) इसी स्थान पर मनाई थी। कहा जाता है कि यहां के जल के स्पर्श मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।अद्भुत : यहां भूत को चढ़ाया जाता है मिनरल वाटर और सिगरेट

तुंगनाथ

तुंगनाथ

PC- varunshiv

भगवान शिव को समर्पित तुंगनाथ का स्थान पंच केदार में तीसरा माना जाता हैं। यह दिव्य स्थान बद्रीनाथ रास्ते पर पड़ता है। तुंगनाथ में भगवान शिव की भुजा एक शिला के रूप में विराजमान है। पौराणिक किवदंतियों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए करवाया था।

यहां की चढ़ाई सबसे कठीन मानी जाती है। आप मार्च से अक्टूबर के बीच किसी भी समय यहां आ सकते हैं। चन्द्रशिला शिखर और गुप्तकाशी यहां स्थित अन्य पौराणिक दर्शनीय स्थल हैं। आप चाहें तो इन स्थानों के दर्शन भी कर सकते हैं।अद्भुत : इस अनोखी अदालत में देवी-देवताओं को मिलती है सज़ा

रूद्रनाथ

रूद्रनाथ

PC- rolling on

रूद्रनाथ का पंच केदार में चौथा स्थान है। इस दिव्य स्थान पर महिष रूपधारी भगवान शिव का मुख उपस्थित है। तुंगनाथ से रूद्रनाथ पर्वत दिखाई देता है पर यहां का पहाड़ी रास्ता बहुत ही ज्यादा कठीन है।रहस्य पड़ताल : पाताल से जुड़ा कुआं बना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती

भक्तों को यहां तक पहुंचने के लिए कई जगह खड़ी चढ़ाई पार करनी होती है। रूद्रनाथ पंहुचने का एक मार्ग हेलंग से भी होकर गुजरता है। यहां आने का सही समय गर्मी और वंसत है।

कल्पेश्वर

कल्पेश्वर

PC- rolling on

कल्पेश्वर का पंच केदार में पांचवा स्थान है। इस दिव्य स्थान पर महिष रूपधारी भगवान शिव की जटाओं का पूजा होती है। भगवान शिव का यह स्थान अलकनंदा पुल से करीब 6 मील की दूरी पर स्थित है। जहां तक रास्ता काफी दुर्गम है। कल्पेश्वर मंदिर समुद्र तल से लगभग 2134 की ऊंचाई पर स्थित है।

वैसे आप यहां साल के किसी भी माह दर्शन के लिए आ सकते हैं। लेकिन मार्च से जून के बीच का समय यहां आने का सही समय बताया जाता है। हिन्दू धर्म में इस मंदिर की अपनी अलग विशेषता है।अद्भुत : यहां भूत को चढ़ाया जाता है मिनरल वाटर और सिगरेट

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