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मध्य प्रदेश में है पशुपतिनाथ महादेव का यह अद्भुत मंदिर, दुनियाभर में ये एकलौता शिवलिंग जिसके...

भगवान शिव के अतिप्रिय रुद्राक्ष के एकमुखी, चारमुखी, पंचमुखी या फिर 10 मुखी होने के बारे में तो आपने अक्सर सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी भगवान शिव के प्रतिक शिवलिंग के अष्टमुखी होने के बारे में सुना है? जी हां, यह है पशुपतिनाथ महादेव का शिवलिंग।

लेकिन भगवान शिव के जिस मंदिर के बारे में आप सोच रहे हैं, हम उसकी बात नहीं कर रहे हैं। भगवान शिव के इस अद्भुत शिवलिंग के दर्शन करने के लिए आपको नेपाल जाने की जरूरत नहीं होगी। भारत में ही आपको भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन हो सकेंगे। सिर्फ अष्टमुखी होना ही नहीं, इस शिवलिंग की कई और खासियतें भी हैं।

आइए इस अद्भुत शिवलिंग और इस मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं :

कलात्मकता से मन मोह लेती है शिवलिंग

पशुपतिनाथ महादेव का मंदिर नेपाल के काठमांडु में है। लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थापित पशुपतिनाथ महादेव का शिवलिंग जिस तरह का है, वैसा भारत में कहीं नहीं है। इस शिवलिंग की कलात्मकता ही ऐसी है कि यहां आने वाले हर भक्त का यह मन मोह लेती है।

pashupatinath

मंदसौर के शिवना नदी के किनारे स्थापित पशुपतिनाथ महादेव का जलाभिषेक करने स्वयं देवी शिवना आती हैं। दरअसल, बरसात के दिनों में जब शिवना नदी अपने पूरे उफान पर होती है, तब वह मंदिर तक पहुंच जाती है। इसलिए कहा जाता है कि मानसून में देवी शिवना खुद भगवान शिव का जलाभिषेक करती हैं।

दुनिया का एकलौता अष्टमुखी शिवलिंग

मध्य प्रदेश में स्थित पशुपतिनाथ महादेव संभवतः विश्व में एकमात्र ऐसे हैं, जो अष्टमुखी हैं। मंदसौर के शिवना नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में करीब 7.5 फीट ऊंची भोलेनाथ की अष्टमुखी शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग की खासियत है कि इसमें भगवान शिव के बाल्यावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक की झलक दिखती है। इस शिवलिंग में भगवान शिव के 8 चेहरे हैं।

Pashupatinath

4 चेहरों के ऊपर 4 चेहरे बने हुए हैं। ऊपर के चार चेहरों में भगवान शिव के बाल्यावस्था, यौवन, अधेड़ावस्था और वृद्धावस्था वाला चेहरा नजर आता है जो चार दिशाओं में है। कहा जाता है कि ये चारों चेहरे मनुष्य के जीवन के चार अवस्थाओं का प्रतिक हैं।

अष्टमुखी महादेव के मंदिर का इतिहास

मंदसौर में स्थापित अष्टमुखी भगवान महादेव को पशुपतिनाथ के नाम से जाना जाता है और इसकी तुलना काठमाण्डु के पशुपतिनाथ से की जाती है, लेकिन काठमाण्डु के पशुपतिनाथ शिवलिंग में भगवान शिव के केवल 4 ही चेहरे हैं। इतिहासकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश में स्थापित पशुपतिनाथ महादेव के शिवलिंग का निर्माण विक्रम संवत 575 ई. के आसपास के समय संभवतः किया गया था।

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उस काल में शायद मूर्तिभंजकों के डर से इस शिवलिंग को शिवना नदी में बहा दिया गया था। जिस समय इसे नदी में बहाया गया, उस समय तक मूर्तिकार इस शिवलिंग के ऊपर वाले केवल 4 चेहरे ही बना सका था। इसलिए नीचे वाले चारों चेहरे अधुरे रह गये। 19 जून 1940 को इस मूर्ति को शिवना नदी से बाहर निकाला गया था। बताया जाता है कि इसके बाद करीब 21 सालों तक यह शिवलिंग शिवना नदी के तट पर ही स्थापित रही।

अष्टमुखी महादेव से जुड़ी लोककथाएं

मंदसौर के अष्टमुखी महादेव से कई लोककथाएं भी जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि इस मूर्ति को सबसे पहले कालू धोबी के बेटे उदाजी धोबी ने देखा था। उस समय इसे मात्र एक काला पत्थर समझकर इस शिवलिंग पर धोबी अपने कपड़े धोता था। इसके बाद एक दिन महादेव ने धोबी को सपने में दर्शन दिए और कहा कि शिवना नदी में उनका शिवलिंग है जिसके बाद इस शिवलिंग को नदी से बाहर निकाला गया।

ashtamukhi shivlingam

शिवलिंग को नदी से बाहर निकालकर किनारे पर एक स्थान पर रखा गया था। बाद में उसे दूसरी जगह ले जाने की योजना बनायी गयी थी लेकिन बाद में जब इस शिवलिंग को वहां से उठाने का प्रयास किया गया तो यह अपने स्थान से जरा भी नहीं हिली। इसे भगवान शिव की मर्जी मानकर शिवना नदी के किनारे ही स्थापित कर दिया गया।

सावन में लगता है भक्तों का मेला

पशुपतिनाथ के दर्शन करने के लिए हर साल सावन के समय इस मंदिर में भक्तों का मेला लग जाता है। उस समय शिवना नदी के तट पर निर्मित 90 फुट ऊंचा, 101 फुट लंबा और 30 फुट चौड़ा भगवान पशुपतिनाथ के इस मंदिर की शोभा देखते ही बनती है।

pashupatinath

मंदिर के शीर्ष पर एक भारी-भरकम कलश स्थापित है। कहा जाता है कि सुनहरे रंग के इस कलश का वजन 100 किलो है। हालांकि बारिश के बाद जब शिवना नदी में उफान आता है, उस समय मंदिर को बंद कर दिया जाता है। भक्त उस समय मंदिर के बाहर से ही अष्टमुखी पशुपतिनाथ के दर्शन करके वापस लौट जाते हैं।

FAQs
पशुपतिनाथ मंदिर के पास से होकर कौन सी नदी बहती है?

मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के पास से होकर शिवना नदी बहती है। मानसून के समय जब नदी अपने पूरे उफान पर होती है, उस समय नदी का पानी मंदिर के अंदर तक प्रवेश कर जाता है। इस कारण कई दिनों तक मंदिर को बंद कर देना पड़ता है।

पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन करने कब जाना चाहिए?

पशुपतिनाथ मंदिर साल के 12 महीनों खुला रहता है। लेकिन मानसून में शिवना नदी का जलस्तर बढ़ने पर मंदिर को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाता है। इसके अलावा शिवरात्रि, सावन के समय मंदिर में अत्यधिक भीड़ उमड़ती है। इसलिए इन समयों को छोड़कर मंदिर जाना चाहिए।

पशुपतिनाथ का मंदिर कहां है?

भगवान शिव के पशुपतिनाथ स्वरूप का मंदिर मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित है। यहां भगवान पशुपतिनाथ महादेव अष्टमुखी शिवलिंग के रूप में स्थापित है।

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