सालों पहले पटना से होकर बहती गंगा नदी में अटखेलियां करती डॉल्फिन का परिवार दिखा करता था। पिछले कई सालों से पटना के गंगा घाटों पर डॉल्फिन का दिखना बंद हो गया था। लेकिन अर्से बाद अब एक बार फिर पटना की गंगा नदी में डॉल्फिन का कुनबा वापस लौटा है और कई घाटों पर अटखेलियां करती डॉल्फिन नजर भी आ रही हैं। लगभग 29 सालों बाद एक बार फिर पटना के घाटों पर डॉल्फिन को देखा गया है।
गंगा नदी में डॉल्फिन का वापस आना इनके संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही यह पिछले कुछ सालों के मुकाबले गंगा नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य में उन्नति का भी लक्षण है।

बता दें, गंगा नदी के डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय पशु है। यह दुनिया भर में साफ पानी के डॉल्फिन की चार प्रजातियों में से एक है। डॉल्फिन इंसानों की काफी करीबी दोस्त मानी जाती है। अगर डॉल्फिनों को यह यकीन हो जाए कि इंसानों से उन्हें कोई खतरा नहीं है, तो पानी की सतह पर आकर वे इंसानों के साथ खेलती हैं, उन्हें कई तरह के करतब करके भी दिखाती हैं। इनकी लंबा सूंड जैसा मुंह, गोल फिसलन वाला शरीर और तैरने के अनोखी पद्धति, इन्हें मछलियों की दूसरी प्रजातियों से अलग बनाती है।
कितनी डॉल्फिन दिखी?
मिली जानकारी के अनुसार पटना के 6 घाटों पर इन डॉल्फिनों को गंगा नदी में देखा गया है। यानी गंगा नदी के करीब 99 किमी के क्षेत्र में इन्हें देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि इस वक्त पटना की गंगा नदी में लगभग 99 डॉल्फिन हैं, जिन्हें देखा गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों के अनुसार 4 मार्च 2024 को पटना में राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र (NDRC) को लॉन्च किया गया था, जो डॉल्फिन के व्यवहार, जिंदा रहने की चुनौतियों और मृत्यु के कारणों का अध्ययन करते हैं। पटना के गंगा घाटों पर डॉल्फिन के वापस लौटने का मुख्य कारण इसे ही माना जा रहा है।

कौन सी घाटों पर दिखी हैं डॉल्फिन?
पटना के 3 लोकप्रिय घाट, जहां जाने पर इस समय आपको डॉल्फिन जरूर दिखेंगी उनमें शामिल हैं -
गायघाट - पटना का गायघाट उन जगहों में से है जो पर्यटक और अनुसंधानकर्ता का पसंदीदा है। इस घाट का पानी काफी साफ है, जहां अटखेलियां करती डॉल्फिन स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। डॉल्फिन देखने की सबसे अच्छी जगहों में से एक यह है।
रानी घाट (सुल्तानगंज) - डॉल्फिन को स्पष्ट रूप से देखने के लोकप्रिय घाटों में रानी घाट भी एक है। बताया जाता है कि यहां नियमित रूप से कम से कम 10 डॉल्फिन दिखाई दे रही हैं।
त्रिवेणी घाट (फतुहा) - डॉल्फिन देखने की एक और लोकप्रिय जगह गंगा और पुनपुन नदी के संगम पर बना त्रिवेणी घाट भी है। बताया जाता है कि इस घाट पर नियमित रूप से करीब 20 डॉल्फिन को देखा जा रहा है। इन सभी डॉल्फिन को लगभग 1 किमी के दायरे में देखा जा रहा है, जो इस जगह पर इन जलीय स्तनधानी जीवों के रहने के लिए एक शानदार जगह बनाता है।

मिली जानकारी के अनुसार NDRC ने ही स्थानीय मछुआरों को डॉल्फिन के साथ दोस्ताना रिश्तों को बनाने और दुर्घटनावश उन्हें होने वाले किसी भी नुकसान से बचाने के बारे में जागरुक किया है। बताया जाता है कि केंद्र सरकार के इन्हीं प्रयासों की वजह से ही पटना में गांगेय डॉल्फिन फिर से गंगा नदी में लौटे हैं और गंगा घाटों के पास स्पष्टता के साथ उन्हें देखा भी जा सकता है।
गौरतलब है कि नदियों में डॉल्फिन का पाया जाना नदियों के स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र और जलीय पर्यावरण के महत्व की ओर इशारा करती है। पिछले दिनों ही केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के साथ मिलकर लगभग 8000 किमी में फैली नदियों में डॉल्फिन की उपस्थिति का पता लगाते हुए जनगणना की।
साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के वन विभाग ने भी इस काम में मदद की। जैसा कि हमने पहले ही बताया कि गंगा नदी के डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय पशु और असम का राज्य जलीय पशु वर्ष 2009 से करार दिया गया है। जबकि सिंधु नदी के डॉल्फिन पंजाब के राज्य जलीय जीव हैं।



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