वीकेंड आते ही कहीं घूमने जाने के लिए दिल मचलने लगता है। लेकिन कहां घूमने जाएं, यह समझ में ही नहीं आता है। क्यों न इस बार वीकेंड पर सिर्फ महाराष्ट्र या हमारे देश ही नहीं बल्कि एशिया के एक ऐसे हिल स्टेशन पर घूम आएं जहां कोई गाड़ी ही नहीं चलती है। जी हां, आप सही समझे हैं। हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र में सह्याद्री श्रेणी पर बसे एक छोटे से हिल स्टेशन माथेरान की।
मुंबई की धुल-मिट्टी और शोर-शराबे से दूर अगर किसी हिल स्टेशन पर शांति के साथ वीकेंड पर रिलैक्स करना चाहते हैं, तो माथेरान आपके लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है।

माथेरान में कहां घूमें :
लुइसा प्वाएंट
यह माथेरान के सबसे लोकप्रिय जगहों में लुइसा प्वाएंट शामिल है। यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को 1.5 किमी लंबी ट्रैकिंग करनी पड़ती है, जो रास्ता सुहाने मौसम में प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाते हुए बड़ी ही आसानी से कट जाता है। लुइसा प्वाएंट पर पहुंचने के बाद आपको एक साथ कई तरह के नजारे दिखाई देंगे, जिनमें एक तो आसमान को छूती ऊंची पहाड़ियां होंगी, वहीं नीचे गहरी लेकिन हरियाली से भरपूर घाटियां भी दिखेंगी। इसके अलावा यहां आपको एक झील भी नजर आएगा, जिसपर जब सूरज की रोशनी पड़ती है, तो नजारा बहुत सुन्दर दिखाई देता है।

शार्लोट झील
शार्लोट झील उन लोगों के लिए एक परफेक्ट जगह है, जो शांति से किसी प्राकृतिक जगह पर अपना समय बिताना पसंद करते हैं। यह जगह कैम्पिंग के लिए परफेक्ट है। यहां आप परिवार या दोस्तों या फिर पार्टनर के साथ झील के किनारे कैम्पिंग का लुत्फ भी उठा सकते हैं। इसके साथ ही यह लोकेशन बर्डवॉचिंग के लिए भी एक अच्छी जगह मानी जाती है। शार्लोट झील के पास ही पिशरनाथ महादेव का एक पुराना मंदिर भी है, जहां आप दर्शन करने जा सकते हैं। झील के किनारे पर बैठकर सूर्यास्त और सूर्योदय का नजारा बहुत सुन्दर दिखायी देता है।

मंकी प्वाएंट
वेस्टर्न घाट पर मौजूद मंकी प्वाएंट के आसपास गहरी घाटियां और ऊंचे पहाड़ों के सुन्दर दृश्य मिलेंगे। खासतौर पर मानसून के समय इस जगह की सुन्दरता काफी बढ़ जाती है। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि यहां आपको बड़ी तादाद में बंदर मिलेंगे। इसलिए जब भी मंकी प्वाएंट पर जाएं तो अपने सामानों, मोबाइल, चश्मे आदि को लेकर सजग जरूर रहें। यहां बड़ी मात्रा में वनस्पतियां मिलती हैं। इसलिए अगर आपको वनस्पतियों में दिलचस्पी है, तो इस जगह पर जरूर घूमने जाएं।
शिवाजी की सीढ़ी
माथेरान में स्थित शिवाजी की सीढ़ी ट्रैकिंग की एक लोकप्रिय जगह है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज जब माथेरान में शिकार के लिए आए थे, तब इसी रास्ते से वह आगे बढ़े थे। इस जगह पर रस्सी पकड़ कर लोगों को आगे बढ़ना होता है। रोमांचक होगा न वह सफर, जिसे किसी समय छत्रपति शिवाजी महाराज ने शिकार पर जाने के लिए इस्तेमाल किया हो।
कैसे पहुंचे माथेरान
माथेरान महाराष्ट्र का एक शानदार हिल स्टेशन है, जो मुंबई से करीब 90 किमी की दूरी पर मौजूद है। यह एशिया का एकमात्र ऐसा शहर है, जो पूरी तरह से कार-फ्री जोन है। साल 2003 में इसे कार-फ्री जोन घोषित किया गया था। इसका मतलब है कि यहां न तो हॉर्न की आवाजें होंगी और न ही गाड़ियों से फैलने वाला कोई भी प्रदूषण। माथेरान को एक्सप्लोर करने का बेस्ट तरीका पैदल चलना, घोड़े या हाथ रिक्शा से घूमना होगा।
अगर आप माथेरान आते हैं, तो शहर से 3 किमी की दूरी पर गाड़ी से आपको उतर जाना होगा। इसके बाद आप चाहे तो पैदल चलते हुए और खूबसूरत नजारों को निहारते हुए माथेरान तक पहुंच सकते हैं या फिर घोड़े की सवारी कर सकते हैं। घोड़े का किराया आपको 2000 से 2500 रुपए के बीच हो सकता है।

मुंबई से माथेरान जाने के लिए आपको लोकल ट्रेन से नेरल स्टेशन पहुंचना होगा। नेरल से माथेरान के लिए टॉय ट्रेन मिल जाएगी। टॉय ट्रेन के इस सफर को आपको बिल्कुल मिस नहीं करना चाहिए। नेरल-माथेरान टॉय ट्रेन एक हेरिटेज रेलवे है। नेरल से माथेरान की दूरी करीब 21 किमी की है। मध्य रेलवे द्वारा नैरो गेज पर इस ट्रेन का संचालन किया जाता है।
अगर आप गाड़ी से जाते हैं तो माथेरान से 3 किमी दूर दस्तूरी प्वाएंट पर आपको पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी कर देनी होगी। पार्किंग के पास से ही टॉय ट्रेन भी मिल जाएगी। यहां स्टेशन होगा अमन लॉज। अमन लॉज से माथेरान पहुंचने में आपको 15 से 20 मिनट का समय लग सकता है। दस्तूरी प्वाएंट से आपको रिक्शा भी मिल जाएगा जो माथेरान पहुंचा देगा।



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