पूरे साल का पहला त्योहार कहा जाने वाला पर्व मकर संक्रांति है। इस दिन को पतंगबाजी के रूप में मनाया जाता है। यह एक ऐसा पर्व है, जो देश के लगभग सभी हिस्सों में मनाया जाता है और वो भी भिन्न-भिन्न तरीकों से..। हिंदू धर्म में इस पर्व का काफी महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और इस दिन से सर्दियों का अंत और गर्मियों की शुरुआत मानी जाती है।
कहा जाता है कि यह एक ऐसी दशा है जो हर साल ग्रिगेरियन कैलेंडर के 14 जनवरी को ही पड़ती है, शायद ही इसमें कभी परिवर्तन देखा जाता है। इस दिन को लेकर कई सारी कथाएं भी बताई जाती है। कहा जाता है, गंगा नदी में स्नान कर खिचड़ी खाने और दान करने से सारे पाप कट जाते हैं। तो आइए जानते हैं कि भारत के किस राज्य में किस तरीके मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है...
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को खिचड़ी कहा जाता है। इस पर्व लोग गंगा में स्नान करते हैं और इस दिन में घरों में खिचड़ी बनाई जाती है, जिसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है। इस दिन दान भी किया जाता है। इसके अलावा, लोग जमकर पतंगबाजी करते हैं। इस दिन से यूपी के प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत होती है, जो महाशिवरात्रि तक चलती है।

उत्तराखंड
मकर संक्रांति को उत्तराखंड के कुमाऊं में घुघुती और गढ़वाल क्षेत्र में खिचड़ी संक्रांत के नाम से जाना जाता है। इस दिन सूर्य के उत्तरायण हो जाता है और मौसम में परिवर्तन देखा जाता है, जिससे पहाड़ी चिड़िया घुघुती पहाड़ी पर वापसी करती है। इस दिन कुमाऊं में घुघुती बनाई जाती है, जो एक प्रकार की मिठाई होती है। इसे आटे और गुड़ से बनाया जाता है। वहीं, गढ़वाली घरों में खिचड़ी बनाई जाती है और इसे दान भी किया जाता है।
पंजाब
पंजाब में मकर संक्रांति को लोहड़ी या माघी के नाम से जाना जाता है। यह पर्व सर्दियों के जाने और फसल की कटाई के लिए मनाया जाता है। इस दौरान पंजाबी ढोल-नगाड़ों के बीच नाच-गाने के साथ मनाते हैं। यह त्योहार उनके लिए काफी खुशियों का प्रतीक माना जाता है।
गुजरात
गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। पर्व के दौरान यहां पारम्परिक पूजा- प्रतिष्ठान के साथ जमकर पतंगबाजी की जाती है। इस दौरान आसमान में रंग-बिरंगे पतंग नजर आते हैं और नीला आसमान पूरी तरीके से रंगों से भर जाता है। गुजरात में इसे दो दिन तक मनाया जाता है। पहला दिन (14 जनवरी) उत्तरायण और दूसरा दिन (15 जनवरी) बासी उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। इस दिन उंधियू (मिक्स वेज सब्जी) और चिक्की (मूंगफली और गुड़ के मिश्रण से बनी मिठाई) बनाया जाता है।

असम
असम में मकर संक्रांति को माघ बिहू या भोगली बिहू के नाम से जाना जाता है। इस दौरान असम में एक सप्ताह तक दावत होती है। वहीं, युवा बांस, पत्तियों और छप्पर से मेजी नाम की झोपड़ियों का निर्माण करते हैं, जिसमें वे दावत खाते हैं और फिर अगली सुबह उन झोपड़ियों को जला दिया जाता है। पर्व पर असमी चावल के केक बनाते हैं, जिन्हें भिन्न-भिन्न नामों (जैसे- शुंग पिठा, तिल पिठा आदि) से जाना जाता है। इसके अलावा, नारियल की कुछ अन्य मिठाइयां भी बनाई जाती है, जिसे लारू कहा जाता है।
आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश में मकर संक्रांति को संक्रांति के नाम से ही जाना जाता है। यहां, इस पर्व को तीन दिनों तक मनाया जाता है। इस दिन पुरानी चीजों को फेंक कर नई चीजें लाई जाती हैं। वहीं, किसान अपने खेतों, गायों और बैलों की पूजा करते हैं और विभिन्न प्रकार के व्यंजन भी बनाए जाते हैं।
कर्नाटक
कर्नाटक में भी मकर संक्रांति को संक्रांति के नाम से ही जाना जाता है। इस दिन महिलाएं पास-पड़ोसियों और रिश्तेदारों को एलु बेला (ताजे कटे हुए गन्ने, तिल, गुड़ और नारियल के मिश्रण से बनी मिठाई) को बांटकर खुशियां मनाती हैं।
तमिलनाडु
तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल के नाम से जाना जाता है। यह एक चार दिवसीय आयोजन होता है, जिसमें पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कन्या पोंगल मनाया जाता है। इस दौरान घरों में चावल के पकवान, दरवाजे पर रंगोली और भगवान की पूजा की जाती है।
केरल
केरल में मकर संक्रांति को विलक्कू के नाम से जाना जाता है। इस दिन सबरीमाला मंदिर के पास आसमान में एक मकर ज्योति दिखाई देती है, जिसके दर्शन कर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।



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