
प्रकृति के बीच कल्पना शक्ति को दृढ़ करने वाला स्थल है पश्चिम बंगाल का बांकुड़ा। यह खूबसूरत नगर अपने हरे-भरे जंगलों, नदियों, भव्य मंदिर, पहाड़ियों और अद्भुत कला-संस्कृति के साथ एक यागदार अवकाश बिताने का अवसर प्रदान करता है। चारों तरफ हरियाली से भरा यह पूरा क्षेत्र आत्मिक और मानसिक शांति प्रदान करता है। अपने प्राकृतिक खजानों के अलावा बाकुंड़ा अपने ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। यहां के प्राचीन मंदिर अद्भुत वास्तुकला का चित्रण करते हैं।
इसके अलावा कला व लोक संस्कृति के बल पर बांकुड़ा दूर-दराज के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस खास लेख में जानिए पर्यटन के लिहाज से यह नगर आपके लिए कितना खास है, साथ में जानिए यहां कौन-कौन से खास स्थलों का प्लान बनाया जा सकता है।

झिलमिली
बांकुड़ा भ्रमण की शुरूआत आप यहां के प्राकृतिक स्थलों से कर सकते हैं, यहां स्थित झिलमिली एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है जहां सैलानी आना ज्यादा पसंद करते हैं। यह एक घना जंगल क्षेत्र है जो विभिन्न वनस्पतियों के साथ एक सुखद वातावरण तैयार करता है। यह वन्य क्षेत्र बांकुड़ा से कुछ की किमी की दूरी पर स्थित है। पारिवारिक या पार्टनर के साथ भ्रमण के लिए यह एक आदर्श विकल्प है। असंख्य वनस्पतियों के साथ आप यहां जंगली जीवों को भी देख सकते हैं।
यहां एक वॉच टावर भी बनाया गया है जिसकी मदद से आप पूरे जंगल के अद्भुत दृश्यों का आनंद उठा सकते हैं। झिलमिली की रोमांचक सैर के साथ-साथ आप कांगसावती नदी के तट पर भी कुछ समय आराम के बीता सकते हैं। यह जगह एक आदर्श पिकनिक स्पार्ट है।

गोकुल चंद मंदिर
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जंगल भ्रमण के बाद अगर आप चाहें तो यहां के ऐतिहासिक स्थलों की सैर का आनंद ले सकते है। यहां का गोकुल चंद मंदिर एक किला मंदिर है जो आध्यामिकता के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व के कारण सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह किला मंदिर राज्य के चुनिंदा सबसे खास रॉक टेंपल में गिना जाता है जिसकी भव्यता देखते ही बनती है।
आकर्षक वास्तुकला के साथ यह एक 64फीट ऊंची संरचना है। मजबूत दीवारों से घिरा यह मंदिर सुरक्षा के इंतजामातों की तरफ भी इंगित करता है। यहां साल भर श्रद्धालुओं और सैलानियों का आना जाना लगा रहता है। एक अद्भुत अनुभव के लिए आप यहां की सैर जरूर करें।

बिहारीनाथ हिल्स
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बांकुड़ा स्थित बिहारीनाथ पर्वत भी बहुत हद तक सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। अपने मनमोहक वातावरण के साथ बिहारीनाथ हिल बांकुड़ा जिले की सबसे ऊंची चोटी है। प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ आप यहां ट्रेकिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी आनंद ले सकते हैं। माना जाता है कि यह पहाड़ी किसी जमाने में जैन धर्म से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल था।
पहाड़ी के ऊपर पुराना एक बिहारीनाथ मंदिर भी है जो पारंपरिक जैन वास्तुकला का प्रयोग कर बनाया गया है। यह पहाड़ी कुदरत के खूबसूरत दृश्यों को देखने का मौका प्रदान करती है। इन सबके के अलावा आप यहां पक्षी विहार का भी आनंद ले सकते हैं। यह पहाड़ी प्रसिद्ध दामोदर नदी के नजदीक स्थित है।

बिश्नुपुर
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अद्भुत सांस्कृतिक धरोहरों को देखने के लिए आप बांकुड़ा से 37 किमी की दूरी पर स्थित बिश्नुपुर की सैर का आनंद ले सकते हैं। बिश्नुपुर अपने टेराकोटा मंदिरों के लिए जाना जाता है जो इस ऐतिहासिक भूमि को जीवंत रूप प्रदान करने का काम करते है। बिश्नुपुर अपनी समृद्ध कला-संस्कृति, विशेष रूप से स्थानीय लोक संगीत के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा यह नगर अपनी आकर्षक हस्तशिल्प और चित्रकला के लिए भी प्रसिद्ध है।
दिसंबर के महीने में आयोजित होने वाला बिष्णूपुर मेला कला और संगीत के प्रेमियों को काफी हद तक प्रभावित करता है। इस मेले में शामिल होने के लिए दूर-दराज से सैलानी आते हैं। इस मेले में शास्त्रीय नृत्य और संगीतों का आयोजिन किया जाता है। यह मेला बालूचेरी साड़ियों के लिए भी जाना जाता है।

सिद्धेश्वर मंदिर
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उपरोक्त स्थानों के अलावा आप बांकुडा के ओन्दा स्थित सिद्धेश्वर मंदिर के दर्शन का प्लान भी बना सकते हैं। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर कई साल पुराना बताया जाता है। हिन्दू आस्था का केंद्र यह मंदिर दूर-दूराज से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह मंदिर अपने आकर्षक संरचना व वास्तुकला के लिए जाना जाता है। बांकुरा के अंदर सिद्धेश्वर मंदिर एक धार्मिक स्थल और एक खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।
जिले के अंदर अगर आपको कला का अद्भुत रूप देखने हो तो यहां की यात्रा जरूर करें। यह मंदिर सुसुनिया पहाड़ियों से घिरा हुआ है जो ट्रेकिंग और रॉक क्लाइंबिंग के लिए एक लोकप्रिय स्थान हैं।



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