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तमिलनाडु के कोयंबटूर में घूमने लायक सबसे खास स्थान

तमिलनाडु स्थित कोयंबटूर राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है जो पश्चिमी घाट पर नोयल नदी के नजदीक स्थित है। यह एक ऐतिहासिक शहर है जो उस क्षेत्र के अंतर्गत आता है जहां कभी संगम चेरा, चोल और विजयनगर राजाओं का शासन चलता था। कोयंबटूर दक्षिण भारत के मैसूर साम्राज्य और ब्रिटिश औपनिवेशिक भारत का हिस्सा भी रह चुक है, जिसके बाद इस शहर को तमिलनाडु के एक जिले के रूप में पहचान दी गई।
पश्चिमी घाट से घिरा होने के कारण यह शहर विभिन्न वनस्पतियों, जीवों और कई अन्य प्राकृतिक आकर्षणों घर माना जाता है। वर्तमान में कोयंबटूर भारत का एक महत्वपूर्ण शहर बन कर उभरा है। अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह शहर एक शानदार पर्यटन गंतव्य के रूप में भी जाना जाता है। आज के इस खास लेख में जानिए पर्यटन के लिहाज से कोयंबटूर आपके लिए कितना खास है और आप यहां कहां-कहां भ्रमण कर सकते हैं। 

मारुदामालाई मंदिर

मारुदामालाई मंदिर

PC-Booradleyp1

कोयंबटूर अपनी शहरी जिंदगी और प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा अपने धार्मिक स्थानों के लिए भी जाना जाता है। शहर स्थित मारुदामालाई मंदिर यहां के मुख्य मंदिरों में गिना जाता है। यह भव्य मंदिर भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित है जो पहाड़ी पर इसी नाम से स्थित है। यहां की पहाड़ियां पश्चिमी घाट का हिस्सा हैं जहां से आसपास के नजारे काफी मनमहोक एहसास कराते हैं।

यह शानदार मंदिर अद्वितीय द्रविड़ शैली में बनाया गया है जो 1200 वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर का रंगीन गोपुरम पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचता है। यह भी माना जाता है कि यहां की पहाड़ी विभिन्न प्रकार के औषधीय खजानों से भी भरी है।

पेरुर पट्टेश्वर मंदिर

पेरुर पट्टेश्वर मंदिर

PC- Ssriram mt

मारुदामालाई मंदिर के अलावा यहां का पेरुर पट्टेश्वर मंदिर भी देखने और दर्शन करने योग्य सबसे खास धार्मिक स्थान है। यह भव्य मंदिर हिंदू देवता भगवान शिव को समर्पित है। इतिहास के जुड़े साक्ष्य बताते हैं कि यह मंदिर चोल राजाओं के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है, मंदिर के अंदर बनाए गए स्तंभ अपनी पत्थर की नक्काशी के लिए जाने जाते हैं।

दूर-दराज से आने वाले सैलानी यहां की वास्तु खूबसूरती को देख काफी ज्यादा प्रभावित होते हैं। यह मंदिर अपनी हिन्दू आस्था के साथ कला का एक बेहतरीन नमूना है। माना जाता है कि मंदिर उस स्थान पर स्थित जहां भगवान शिव ने स्वयं 'तांडव' नृत्य किया था। भगवान नटराज की सुनहरी मूर्ति प्रमुख आकर्षणों में से एक है।

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परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य

परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य

PC- Parambikulam Tiger Conservation Foundation

मंदिरों के अलावा आप कोयंबटूर में वन्यजीव अभयारण्य की सैर का भी आनंद ले सकते हैं। पश्चिमी घाट पर स्थित परंबिकुलम वन्यजीव अभयारण्य केरल और तमिलनाडु राज्यों से घिरा हुआ है। यह खूबसूरत वन्य जीव अभयारण्य लगभग 285 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ हैं।

परंबिकुलम वन्यजीव अभयारण्य भी एक बाघ अभयारण्य भी है जो बाघों के साथ कई लुप्तप्राय प्रजातियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने का काम करता है। इसके अलावा यह वन्य क्षेत्र चार जनजातियों का घर भी बताया जाता है जो यहां लंबे समय से रह रहे हैं।

सिरुवनी जलप्रपात

सिरुवनी जलप्रपात

PC- VasuVR

परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य भ्रमण के बाद अगर आप चाहें तो कोयंबटूर से 35 किलोमीटर पश्चिम पर स्थित सिरुवानी जलप्रपात की सैर का प्लान बना सकते हैं। सिरुवानी जलप्रपात यहां बहने वाली सिरुवानी नदी पर बने बांध के पास स्थित है।

सिरुवानी नदी का जल पूरी दुनिया में सबसे अच्छा स्वाद वाले जल में गिना जाता है। कोयंबटूर घूमने आए पर्यटकों के मध्य यह स्थान काफी ज्यादा खास माना जाता है। चारों तरफ फैली खूबसूरती सैलानियों को काफी ज्यादा आनंदित करने का काम करती हैं।

अनुभावी सुब्रमनिर मंदिर

अनुभावी सुब्रमनिर मंदिर

उपरोक्त स्थानों के अलावा आप अनुभावी सुब्रमनिर मंदिर के दर्शन का प्लान बना सकते है। एक पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित अनुभावी सुब्रमण्य मंदिर कोयंबटूर के बाहरी इलाके में स्थित है। पर्यटन के लिहाज से भी यह मंदिर काफी खास माना जाता है।

मंदिर का स्थान सबसे अच्छा व्यू प्वाईंट है जहां से आप पश्चिमी घाटों के मनोरम दृश्यों का आनंद आसानी से उठा सकते हैं। बता दें कि मंदिर तक पहुंचने के लिए एक हजार सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर परिसर में एक प्राकृतिक झरना भी है जहां पूरे वर्ष पानी रहता है।

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