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वीकेंड स्पेशल: जरा दोस्तों संग हो जाये दिल्ली की एक सैर

By Goldi Chauhan

दिल्ली के जिस भी कोने से निकल जाओ, वंहा दिल लग ही जाता है। इसलिए तो दिल्ली को दिलवालों की दिल्ली कहा जाता है। अगर आप सोच रहे हैं कि दिल्ली घूमना मतलब पानी की तरह पैसा बहाना तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं। यंहा घूमने के लिए सिर्फ 50 रुपए का डीटीसी बस पास बनाओ और आराम से दोस्तों के साथ दिलवालों की दिल्ली की ये बेस्ट10 जगह घूमने निकल जाओ।

Jama Masjid

Photo Courtesy: Saad Akhtar

राष्ट्रपति भवन

दिल्ली सिर्फ देश की राजधानी ही नहीं बल्कि राजनीती की राजधानी कहलाती है। अगर आप आएं है एक राष्ट्रपति भव देखना बिल्कुल भी ना भूले।
यह एक रोचक तथ्य है कि इस भवन को पूरा करने की समय-सीमा चार वर्ष थी, उसे बनने में 17 वर्ष लगे और इसके निर्मित होने के अट्ठारहवें वर्ष भारत आजाद हो गया। इस विशाल भवन की चार मंजिलें हैं और इसमें 340 कमरे हैं। 200000 वर्गफीट के निर्मित स्थल वाले इस भवन के निर्माण में 700 मिलियन ईंटों तथा तीन मिलियन क्यूबिक फीट पत्थर का प्रयोग किया गया था। इस इमारत के निर्माण में इस्पात का अत्यल्प प्रयोग हुआ है।

लाल किला

यही वो जगह हैं, जंहा से हर साल 26 जनवरी को भारत के प्रधानमंत्री धव्जारोहण कर पूरी देश की जनता को सम्बोधित करते हैं। यह किला शाहजहां ने 1638 में बनवाया था। 10 साल बाद 1648 में यह बनकर तैयार हुआ था। इसके अंदर कई इमारतें हैं, जिनमें जनसभा के लिए दीवान-ए-आम, मोती मस्जिद, रंगीन महल और शाही स्नान गृह शामिल हैं।

जामा मस्जिद

यह देश की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार मस्जिद है। लाल किले से 500 मीटर की दूरी पर स्थित लाल संगमरमर पत्थरों का जामा मस्जिद। जहां मत्था टेकने, पूरे देश से हर धर्म के लोग आते हैं। इस मस्जिद का निर्माण 1650 में शाहजहां ने शुरु करवाया था। इसे बनने में 6 वर्ष का समय और 10 लाख रु.लगे थे। इसका प्रार्थना गृह बहुत ही सुंदर है। इसमें ग्यारह मेहराब हैं जिसमें बीच वाला महराब अन्य से कुछ बड़ा है। इसके ऊपर बने गुंबदों को सफेद और काले संगमरमर से सजाया गया है जो निजामुद्दीन दरगाह की याद दिलाते हैं।

अक्षरधाम मंदिर

भारत मंदिरों की धरती है। अक्षरधाम दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर 100 एकड़ में फैला है जो दुनिया का सबसे बड़ा हिंदु मंदिर है। इस कारण इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है। राजस्थान से लाए गए 6000 टन गुलाबी पत्थरों पर शिल्पकारी के जरिए यह मंदिर बना है। कारीगरी मंदिर के डिजाइन में है, जिसका इस्पात और लोहे जैसी धातुओं से कोई लेना-देना नहीं है। दीवारों पर बहुत महीन काम किया गया है, जो इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है। पगोड़ा, जो अलग-अलग ध्यान मुद्राओं में बैठे साधु-संतों को प्रदर्शित करता है। यह सोमवार को बंद रहता है और शाम साढ़े 6 बजे तक ही एंट्री मिलती है।

इंडिया गेट

अगर अपने दिल्ली का इंडिया गाइट नहीं देखा तो क्या खाक दिल्ली देखी। दिल्ली की एक ऐसी जगह शाम हो या रात, दोस्तों के साथ राजपथ के राहों का मजा लेते हुए पहुंच जाइए इंडिया गेट। जहां की अमर ज्योती आपको अपने देश पर गर्व करने के लिए मजबूर कर देगी। गर्मी की शाम कभी दोस्तों के साथ यहां गुजारिए... आपको रूमानियत से भी मुहब्बत हो जाएगी।

लोटस टेम्पल

लोटस के आकार में तैयार किए गए इस मंदिर को देखोगे तो जान जाओगे कि लोटस सच में सुंदर है। लोटस टेम्पल, जहां आकर सारी शिकायत खत्म हो जाती है। यहां आकर इसके छोटे से लेक के किनारे बैठिए और ठंडी हवाओं का मजा लीजिए।

राजघाट

यमुना नदी के पश्चिमी किनारे पर महात्मा गांधी की समाधि स्थित है। काले संगमरमर से बनी इस समाधि पर उनके अंतिम शब्द हे राम उद्धृत हैं। हालांकि अब यह एक खूबसूरत बाग़ के रूप में तब्दील हो चुका है। इस बाग़ में तरह-तरह के पेड़ और फव्वारे मौजूद हैं। जो रत भी खूबसूरत नज़र आते हैं। भारत आने वाले विदेशी उच्चाधिकारी महात्मा गांधी को श्रद्धांजली देने के लिए राजघाट अवश्य आते हैं।

कुतुब मिनार

कुतुब मीनार का निर्माण कुतुब-उद-दीन ऐबक ने 1199 में शुरु करवाया था और इल्तुमिश ने 1368 में इसे पूरा कराया। इस इमारत का नाम ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया। ऐसा माना जाता है कि इसका प्रयोग पास बनी मस्जिद की मीनार के रूप में होता था और यहां से अजान दी जाती थी। मस्जिद के पास ही चौथी शताब्दी में बना लौहस्तंभ भी है जो पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है। यह इंडिया की दूसरी सबसे बड़ी मिनार है। यह 73 मीटर लम्बी है, जिसमें 379 सीढ़ियां हैं। ये यूनेस्को की वर्ल्ड लेरीटेज साइट में शामिल है।

कनॉट प्लेस

दिल्ली आए हैं तो दिल्ली की राजधानी घूमना मत भूलिए। ओह! मालूम है की दिल्ली राज्य नहीं राजधानी है। लेकिन दिल्ली अगर राज्य होता तो, इसकी राजधानी कनॉट प्लेस ही होती। कनॉट प्लेनस दिल्लीस का प्रमुख व्यीवसायिक केंद्र है। यह मार्केट 1933 में शुरू हुआ था,इसका नाम ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्यप ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर रखा गया था। जिस कारण यहां दिल्ली की पुरानी शानो-शौकत भी आपको देखने मिल जाएगी।यहां के इनर सर्किल में लगभग सभी अंतर्राष्ट्री य ब्रैंड के कपड़ों के शोरूम, रेस्टोररेंट और बार हैं।

चांदनी चौक

अगर आप दिल्ली घूमने निकले और चांदनी चौक नहीं देखा तो आपकी दिल्ली की यात्रा पूरी नहीं हो सकती। यह प्राचीन बाज़ार दिल्ली का एक महत्वपूर्ण स्थल है। थोक सामान की बिक्री के लिए इस बाज़ार में हमेशा रौनक लगी रहती है। खाने-पीने का लुफ्त यहाँ बड़े आराम से उठाया जा सकता है। यहाँ के पराठे वाली गली के 'पराठे' मशहूर हैं। दही-भल्ले, चाट-पकौड़ी, जलेबी, फालूदा आइसक्रीम के शौक़ीन यहाँ आकर अपना शौक पूरा कर सकते हैं। यहाँ कपड़े के होलसेल के कई बाज़ार मौजूद हैं।

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