राजस्थान को किलों का राज्य माना जाता है। जितने किले पूरे राजस्थान के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं उतने शायद और भी नहीं हैं। राजस्थान का हर किला राजपुती शान और यहां लड़ी गयी विभिन्न लड़ाईयों की वीर गाथा को सुनाता है। लेकिन क्या आपने किसी ऐसे किले के बारे में सुना है जो मुख्य रूप से अपनी सुरंगों की भूलभुलैया के कारण जाना जाता है।

जी हां, राजस्थान में अजमेर के पास स्थित तारागढ़ किला यहां मौजूद सुरंगों के जाल की वजह से सबसे अधिक मशहूर है। तारागढ़ किला एक पहाड़ी किला है। कहा जाता है कि यह भारत का पहला Hill Fort था।
क्या है तारागढ़ किला का इतिहास
तारागढ़ किला अजमेर की सबसे अधिक प्रभावशाली संरचनाओं में से एक है। अरावली पर्वतमाला पर एक खड़ी पहाड़ी पर इस इस किले का निर्माण वर्ष 1354 में हुई थी। ठीक उसी समय जब बूंदी राज्य की भी स्थापना हुई थी। राव देव ने वर्ष 1341 में बूंदी राज्य की स्थापना की थी। एक समय राजस्थानी और मुगल वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण माना जाने वाला तारागढ़ किला समुद्रतल से लगभग 1426 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है।

इस वजह से जब भी कोई नीचे से इस किले को देखता था, उसे आसमान में तारा की तरह यह किला चमकता दिखाई देता था। इसी वजह से किले का नाम तारागढ़ किला रखा गया। मिली जानकारी के अनुसार इस किले का निर्माण दरबार वर सिंह हाड़ा ने करवाया था। किले के परकोटे पर खड़े होने से बुंदी शहर का शानदार नजारा दिखाई देता है।
क्यों इतनी मशहूर हैं इस किले की सुरंगें

तारागढ़ किले में आप जैसे ही प्रवेश करने जाएंगे किले का विशाल द्वार पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार होता है। इस किले में प्रवेश के लिए 3 अलग-अलग द्वार होते हैं जिनका नाम लक्ष्मी पोल, फूटा दरवाजा और गागुडी की फाटक है। सभी द्वार पर हाथियों की आकृति उकेरी हुई है। लेकिन तारागढ़ किला अपनी सुरंगों के जाल के कारण सबसे ज्यादा मशहूर है। किले के सुरंग देखने लायक हैं।

युद्ध के समय ये सुरंग काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। आपातकालिन परिस्थिति में या खतरा महसूस होने पर राजा, उनके परिवार और उनके कर्मचारियों को सुरक्षित रूप से किले से बाहर निकालने में सुरंगों की वजह से मदद मिलती थी। हालांकि अब किले में मौजूद इन सुरंगों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है क्योंकि सुरंगों का व्यापक नक्शा अब उपलब्ध नहीं है। कोई नक्शा नहीं होने की वजह से ही पता नहीं चल पाता है कि ये सुरंग कहां से शुरू होते हैं और कहां खत्म होते हैं।
क्या-क्या दिखेगा किले में

तारागढ़ किले में एक बड़ा गढ़ भी है जिसे भीम बुर्ज के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि इस गढ़ का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था। इस गढ़ में उस समय हथियारों का भंडारण किया जाता था। किले में करीब 6-7 विशाल जलाशय भी मौजूद हैं। हालांकि समय के साथ अब ये सभी जलाशय सुख चुके हैं। लेकिन संकट से समय किले के निवासियों की सुविधा के लिए पानी का भंडारण किया जाता था।

इस किले में स्थित रानी महल आकर्षण का मुख्य केंद्र होता है। महल की खिड़कियों की कांच और भित्ति चित्र काफी सुन्दर तरीके से सजाया गया है। किला परिसर में मीरान साहब की दरगाह है। यहां आने वाला हर सैलानी दरगाह में अपना माथा जरूर नवाता है। कहा जाता है कि मीरान साहब इस किले के चीफ हुआ करते थे जिनकी मृत्यु जंग के दौरान हो गयी थी। अगर आपको पक्षियां देखना पसंद है तो आपको तारागढ़ का किला जरूर पसंद आएगा।
किला खुलने का समय और एंट्री फीस
तारागढ़ किला खुलने का समय सर्दियों और गर्मियों में अलग-अलग होता है। गर्मियों में यह किला सुबह 8 से शाम को 7 बजे तक खुला रहता है। सर्दियों में यह किला सुबह 8 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। तारागढ़ किला में भारतीय पर्यटकों के लिए एंट्री शुल्क ₹25 और विदेशी नागरिकों के लिए एंट्री शुल्क ₹100 है। तारागढ़ किले में घूमने का सबसे अच्छा समय सर्दियों का मौसम ही माना जाता है क्योंकि गर्मियों में यहां चिलचिलाती धुप में घूमना मुश्किल भरा हो सकता है।
कैसे पहुंचे तारागढ़ किला
तारागढ़ किला अजमेर के दरगाह बाजार से सिर्फ 10 किमी की दूरी पर मौजूद है। अजमेर से तारागढ़ किला तक के लिए आपको कैब या ऑटो किराए पर मिल सकता है। अजमेर से तारागढ़ किले तक पहुंचने में लगभग 30 मिनट का समय लग सकता है। अजमेर राजस्थान का एक मुख्य शहर है, जो ट्रेन और सड़क मार्ग से राज्य और देशभर के दूसरे शहरों से जुड़ा हुआ है।



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