राजस्थान के राजे-रजवाड़े और उनकी शान के बारे में तो किस्से-कहानियों में हमने काफी कुछ सुना है। लेकिन क्या आपने कभी उस राजसी ठाठ-बाट को अपनी आंखों से देखने या उसे अनुभव करने के बारे में सोचा है? अरे नहीं-नहीं हम न तो आपको टाइम ट्रैवल करके इतिहास में पीछे जाने के लिए कहने वाले हैं और न ही राजस्थान के महंगे पैलेस होटल में रुकने की सलाह देने वाले हैं।
दरअसल, हम तो राजस्थान में शानो-शौकत के साथ मनाए जाने वाले त्योहारों का हिस्सा बनने के बारे में बात कर रहे हैं। होली का त्योहार आने ही वाला है और राजस्थान में एक बार फिर से बड़े ही शान के साथ राजधानी जयपुर में आयोजित होगा हाथी महोत्सव (Elephant Festival)।

शाही शान का प्रतिक माने जाते हैं हाथी
राजस्थान में हाथियों को शाही शान का प्रतिक माना जाता है। यहीं वजह है कि जब होली के रंगीन त्योहार को भी शान व ठाठ-बाट के साथ मनाने की बारी आयी तो सबसे पहले हाथियों का महोत्सव आयोजित करने के बारे में ही सोचा गया। जयपुर में आयोजित होने वाला हाथी महोत्सव एक वार्षिक महोत्सव है, जिसे फाल्गुन पूर्णिमा के दिन आयोजित किया जाता है।
अगर होली के समय आप भी जयपुर या आसपास के किसी शहर में होने वाले हैं, तो हाथी महोत्सव में शामिल होने का मौका मत चुकिए। यकिन मानिए यह फेस्टिवल आपको Once in a lifetime अनुभव कराएगा।

कब है हाथी महोत्सव
इस साल जयपुर हाथी महोत्सव की शुरुआत 25 मार्च 2024 को होने वाली है यानी जिस दिन होलिका दहन होगी। मूल रूप से हाथियों पर सवार होकर शाही परिवार के होली खेलने के प्रतिक के तौर पर आज इस फेस्टिवल को मनाया जाता है। यह एक तरह से राजस्थान और जयपुर की संस्कृति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है।
समय के साथ धीरे-धीरे जयपुर हाथी महोत्सव ने लोकप्रियता हासिल कर ली और आज दुनिया के कई देशों से खासतौर पर होली के मौके पर आयोजित होने वाले जयपुर हाथी महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए विदेशी पर्यटक जयपुर पहुंचते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जयपुर हाथी महोत्सव की शुरुआत जयपुर राजघराने की पूर्व राजमाता स्व. गायत्री देवी ने लगभग 27 साल पहले किया था।

रंगों आकर्षक तरीके से सजते हैं गजराज
होली के समय आयोजित होने वाला हाथी महोत्सव जयपुर का सबसे लोकप्रिय फेस्टिवल माना जाता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, हाथी राजस्थान की शाही परंपरा का प्रतिक होते हैं। इस महोत्सव के लिए खासतौर पर जयपुर के पास ही स्थित आमेर किला के निकट बसाए गये हाथी गांव से सैंकड़ों हाथियों को आमेर किले के अंदर लाया जाता है। हर महावत अपने-अपने हाथियों को बड़े ही सुन्दर और रंग-बिरंगे तरीके से सजाते हैं।
हाथियों के माथे, सुंड और उनके शरीर पर रंगों से उनका न सिर्फ भव्य श्रृंगार होता है बल्कि चित्रकारी की मदद से राजस्थान के गौरवशाली इतिहास को भी दर्शाया जाता है। हाथियों को सोने-चांदी के आभूषण पहनाए जाते हैं। पहले महोत्सव के दौरान हाथियों पर सवार होकर खिलाड़ी पोलो मैच का भी आनंद भी उठाते थे, लेकिन अब पोलो मैच को बंद कर दिया गया है।

कहां पर आयोजित होता है हाथी महोत्सव
हाथियों पर बैठकर होली खेलने निकलना, प्रजा पर रंग-गुलाल उड़ाना आदि राजस्थान की परंपरा का ही हिस्सा रहा है। हाथी महोत्सव के माध्यम से उसी परंपरा को आज भी जीवित रखने का प्रयास किया जा रहा है। यह महोत्सव 3 दिनों तक चलता है। शुरुआती वर्षों में इस महोत्सव को आमेर के किले में आयोजित किया जाता था।
लेकिन बाद में इसकी बढ़ती लोकप्रियता और इस महोत्सव में शामिल होने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर इसे जयपुर पोलो ग्राउंड में स्थानांतरित कर दिया गया। विकिपेडिया की मानें तो वर्तमान में जयपुर हाथी महोत्सव का आयोजन चौगन स्टेडियम के राजस्थान टूरिज्म ग्रुप द्वारा आयोजित किया जाता है।
तो इस साल अगर आप भी होली के समय जयपुर में मौजूद होते हैं या दिल्ली व आसपास के शहरों से जयपुर घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो जयपुर हाथी महोत्सव में जरूर शामिल हो। और हां, सोशल मीडिया पर इस फेस्टिवल की फोटो जरूर शेयर करें और Native Planet Hindi को टैग करना बिल्कुल मत भूलें।



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