राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित राजघाट किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यह ऐतिहासिक स्थल देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित है और यहीं उनकी समाधि स्थल भी है। ये दिल्ली का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल भी है, अब तक यहां कई बड़े दिग्गज आ चुके हैं और बापू के समाधि स्थल के सामने अपना सिर झुका चुके हैं। यहां आए कई बड़े नेताओं ने समाधि परिसर में पौधा भी लगाया, जिस पर ध्यान न देने के चलते काफी पेड़ सूख गए हैं। पहली बार इस परिसर में एक विदेशी मेहमान ने 1950 ईस्वी में पौधा लगाया गया था। वहीं, अंतिम बार साल 2016 में अबू धाबी के युवराज ने पौधारोपण किया था।
इस परिसर को एक मेमोरियल के नाम से जाना जाता है। अब तक इस परिसर में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (21 जनवरी, 1961), नेपाल के प्रधानमंत्री कृष्णा प्रसाद भट्टाराई (9 जून, 1990), अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा (20 फरवरी, 2015 व साल 2012) और अबू धाबी के युवराज मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (11 फरवरी, 2016) जैसे बड़े दिग्गज यहां आ चुके हैं।

'वानू जी भूपा' ने तैयार की थी डिजाइन
इसे 31 जनवरी 1948 को बापू की अंत्येष्टि के बाद बनाया गया था, जिसकी डिजाइन 'वानू जी भूपा' ने तैयार किया था। वर्गाकार स्पेस में बने इस समाधि के पास बापू के द्वारा बोले गए अंतिम शब्द 'हे राम!' भी लिखा गया और चारों तरफ हरियाली या गार्डेन के लिए एक बड़ा सा जगह भी छोड़ा। अगर आप भी दिल्ली की सैर पर निकलने वाले हैं या प्लानिंग कर रहे हैं तो अपनी यात्रा लिस्ट में राजघाट को शामिल करना ना भूलें।

राजघाट जाने का सही समय व प्रवेश शुल्क
यहां आप साल में कभी भी जा सकते हैं। यहां आप सुबह 06:30 बजे से शाम 06:00 बजे तक जा सकते हैं और यहां स्थित बापू के समाधि स्थल और परिसर में स्थापित पार्क को भी देख सकते हैं और यहां समय बिता सकते हैं। यहां जाने के लिए किसी प्रकार का कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगता है।

राजघाट कैसे पहुंचें
अगर आप राजघाट जाने की सोच रहे हैं तो यहां का नजदीकी मेट्रो स्टेशन दिल्ली गेट है। वहीं, यहां तक पहुंचने के लिए आपको फ्लाइट, ट्रेन या बस आसानी से मिल जाएगी, दिल्ली में ही एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन व बस स्टैण्ड सब कुछ है।
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