एक कहावत है लखनऊ में चिकन पहना भी जाता है और चिकन खाया भी जाता है। जी हां, और यह सच भी है। हम लखनऊ की जिस जगह की बात कर रहे हैं, वहां आप इन दोनों चिकन को खरीद सकते हैं। बस फर्क यह है एक पहनने के लिए खरीदेंगे और दूसरा खाने के लिए।
और हां, सबसे खास बात यह है कि रमज़ान पाक के महीने में इस मार्केट की आब-ओ-हवा पूरी तरह बदल जाती है। चलिये बिना देर करते हुए इस लखनऊ की इस रौनक से आपको रू-ब-रू करवाते हैं।

रमज़ान का पाक महीना चल रहा है। जैसा हम सभी जानते हैं रोज़ा के दौरान मुस्लिम अहले सुबह सहरी के बाद सीधे शाम की नमाज पढ़कर ही इफ्तारी खाते हैं। इस दौरान देश के तमाम शहरों में फूड स्ट्रीट पर खासी रौनक दिखाई देती है। कुछ ऐसा ही नजारा दिखता है कि नवाबों के शहर लखनऊ में भी। रमज़ान के दौरान अगर लखनऊ की नवाबी और मुगलई व्यंजनों का स्वाद लेना चाहते हैं तो फिर शाम ढलते ही पहुंच जाएं नज़ीराबाद।
क्या खास होगा वहां...चलिए जानते हैं।
नज़ीराबाद मार्केट लखनऊ का सबसे अधिक भीड़-भाड़ वाला मार्केट है। सालभर इस मार्केट में हर तरह के कपड़े, चिकनकारी वाले परिधानों से लेकर, लेदर बैग, जूते-चप्पल और एक्सेसरिज हर तरह की दुकानों यहां सजती हैं। रमज़ान के दौरान भी पूरा दिन यह मार्केट सामान्य मार्केट की तरह ही दिखाई देता है। पूरा दिन ईद की खरीदारी के साथ-साथ सामान्य खरीद-बिक्री पर दुकानदार अपना पूरा ध्यान लगाते हैं। पर जैसे ही दोपहर से शाम ढलती है...

नज़ीराबाद मार्केट का नज़ारा ही बदलने लगता है। रमज़ान के महीने में शाम को जैसे ही रोज़ा खोलने और इफ्तारी का समय होता है, कैसरबाद से अमीनाबाद को जोड़ने वाली सड़क की सभी दुकानों को बंद कर दिया जाता है।
फूड स्ट्रीट में बदल जाता है यह मार्केट
शाम को जब इफ्तार का समय होता है तब कैसरबाद से अमीनाबाद को जोड़ने वाली सड़क के दोनों ओर, इन कपड़ों और एक्सेसरिज की दुकानें चाहे हिंदू की हो या किसी मुस्लिम की वह उसे बंद कर देता है। इसके बाद उन दुकानों के सामने खुल जाती है मुगलई पकवानों की दुकानें। शाम के समय से खुलने वाली ये दुकानें पूरी रात यानी इफ्तार से लेकर सहरी तक खुली रहती हैं।

नज़ीराबाद का पूरा इलाका उस समय तरह-तरह की मुगलई व्यंजनों की खुशबू से भरा रहता है। यूं तो लखनऊ अपने मुगलई व्यंजनों और डेलीकेसी के लिए ही दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन रोज़ा की इफ्तारी के लिए यहां मिलने वाले मुगलई व्यंजन जैसे कई तरह के कबाब, कश्मीरी चाय, मटन कोरमा, नान, कई तरह की रोटियां, तंदूरी चिकन/मटन आदि लज़ीज पकवानों की ऐसी खुशबू फैलती है कि लोग खुद को रोक नहीं पाते हैं और दूर-दूर के इलाकों से यहां खींचे चले आते हैं।

जैसे-जैसे ईद नजदीक आता है, इन इलाकों की रोनक और भी बढ़ने लगती है। ईद के समय खासतौर पर अमीनाबाद से लेकर नक्खास रोड पर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से वेंडर आते हैं, जिनके पास कई तरह की कच्ची सेवईयां मिलेंगी। ईद के समय अलग-अलग तरह की और क्वालिटी वाली इन सेवईयों का स्वाद कुछ अलग ही होता है।



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