
राष्ट्रपति भवन, भारत की सबसे प्रतिष्ठित इमारतों में शामिल है, वर्तमान में भारत के राष्ट्रपति का निवास स्थान माना जाता है। इस सरकारी निवास स्थान का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही गहरा भी। यह भवन अस्तित्व में तब आया, जब देश की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया। ब्रिटिश काल में बनी यह इमारत तत्कालीन वायसराय की सीट मानी जाती थी, लेकिन आजाद भारत के बाद से यह भारतीय लोकतंत्र की सीट बन गई।
राष्ट्रपति भवन को आम जनता के लिए आज से खोला गया है, जो अब सप्ताह में पांच दिनों के लिए खुला करेगा। इसके लिए बुधवार से लेकर रविवार तक का दिन निर्धारित किया गया है। वहीं, आम जनता के लिए प्रवेश का समय - 10 बजे से 11 बजे तक, 11 बजे से 12 बजे तक, 12 बजे से दोपहर 1 बजे तक और 2 बजे से 3 बजे तक का होगा। इसके अलावा आम जनता राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में भी जा सकेगी। वहीं, प्रत्येक शनिवार को यहां सुबह 8 बजे से लेकर 9 बजे तक चेंज ऑफ गार्ड समारोह का भी लुत्फ उठाया जा सकेगा। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग की जा सकेगी।

17 साल में बनकर तैयार हुआ था राष्ट्रपति भवन
यह भवन भारतीय राजनीति में एक सर्वश्रेष्ठ स्थान रखता है, जिसके चलते इसकी सुंदरता को आप बाहर से ही देख सकते हैं। लेकिन अगर आपके पास कोई विशेष अनुमति हो तो इसके अंदर प्रवेश कर सकते हैं। साल 1929 में बनकर तैयार हुई इस इमारत में 340 कमरे हैं। इस भवन के चारों ओर काफी सुंदर-सुंदर मूर्तियां लगाई गई है। इस इमारत में मुगल वास्तुकला और यूरोपीय वास्तुकला का एक मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसे और भी सुंदर बना देता है। इस इमारत की ऊपरी गुम्बद सांची के स्तूप से प्रेरित होकर बनाई गई है, जिसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है, इसे आप बाहर से भी देख सकते हैं। इस भवन का निर्माण कार्य 1912 ईस्वी में शुरू किया गया, जिसके वास्तुकार एडविन लैंडसीर लुटियंस (Edwin Landseer Lutyens) थे। 2 लाख वर्ग फीट में बने इस भवन के निर्माण कार्य में करीब 700 मिलियन ईंटों का प्रयोग किया गया है।

बेहद आकर्षक है राष्ट्रपति भवन
इस भवन का दरबार काफी सुंदरता के साथ डिजाइन किया गया है, जिसके निर्माण में रंगीन पत्थरों और सुन्दर रंगों का प्रयोग किया गया है। इसमें आपको एक अशोकन हॉल भी दिखेगा, जो पूरी तरीके से फारसी शैली में बनाया गया है, जहां आप इसके रंगीन छत और जमीन पर लकड़ी से की गई कारीगरी को देख सकते हैं। जैसे-जैसे आप इस परिसर की सैर करेंगे, आपको विभिन्न व आश्चर्य करने वाली कलाकारी देखने को मिलेगी, जो किसी भी पर्यटक का मन मोह लेने के लिए काफी है। इस परिसर में एक 13 एकड़ में फैला मुगल बगीचा भी बना हुआ है, जो मुगल और ब्रिटिश कला का मिश्रण है। जहां फूलों की विभिन्न प्रजातियों को भी देखा जा सकता है।

भवन में राष्ट्रपति के लिए सारी सुविधाएं मौजूद
इस भवन में जहां पर राष्ट्रपति रहते हैं, वहां पर ड्राइंग रूम, खाने का कमरा, बैंक्वेट हॉल, टेनिस कोर्ट, पोलो ग्राउंड, क्रिकेट का मैदान और संग्रहालय मौजूद है, जो यहां का दूसरा आकर्षण भी कहा जा सकता है। ये पूरा भवन एक चार मंजिला इमारत है, इसके निर्माण में कहीं भी लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इस परिसर में आपको एक मंदिर भी देखने को मिलेगा, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती है। यह मंदिर हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध-जैन धर्म की संस्कृति को भी दिखाता है, जो आपसी समन्वय का संदेश देती है। परिसर में स्तम्भ भी है, जिसे जयपुर स्तम्भ के नाम से जाना जाता है। यह भवन के सामने खड़ा है, जिस पर जयपुर के तत्कालीन महाराजा द्वारा शुभकामना स्वरूप भेजा गया 'कमल पर सितारा' लगा हुआ है।

पहले वायसराय हाउस के नाम से जाना जाता था राष्ट्रपति भवन
साल 1950 तक इसे वायसराय हाउस बोला जाता था, जो तत्कालीन भारत के गवर्नर जनरल का आवास हुआ करता था। आजादी के बाद इस भवन का नाम बदलकर गवर्नमेंट हाउस रखा गया, फिर साल 1950 ईस्वी में जब देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद बने, तो उनके कार्यकाल में इसका नाम फिर से बदला गया और राष्ट्रपति भवन रखा गया। भारत के पहले इस भवन में वर्तमान राष्ट्रपति उन कक्षों में नहीं रहते, जिनमें वायसराय रहा करते थे, बल्कि राष्ट्रपति अतिथि कक्ष में रहते हैं। ये परम्परा भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी राज गोपालचारी से चली आ रही है, तब से आज तक सभी राष्ट्रपति इस परम्परा का निर्वहन करते आ रहे हैं।

राष्ट्रपति भवन कैसे पहुंचें
राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट से करीब 3 किमी. की दूरी पर स्थित है। जहां आप आसानी से वायुमार्ग, रेल मार्ग या सड़क मार्ग तीनों से पहुंच सकते हैं। राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते यहां आने के लिए यातायात को लेकर आपको किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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