आज भारत एक गणतांत्रिक देश के तौर पर अपने 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में मेहमान गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर देश-विदेशों से आने वाले इन मेहमानों को निमंत्रण पत्र भेजकर आमंत्रित किया जाता है। यह निमंत्रण पत्र राष्ट्रपति भवन देश के राष्ट्रपति की तरफ से भेजता है।
इस निमंत्रण पत्र में कागज के एक टूकड़े पर सिर्फ गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने का अनुरोध ही नहीं होता है बल्कि इसमें हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर को भी शामिल किया जाता है। इस निमंत्रण पत्र को एक बॉक्स में और भी कई चीजों के साथ भेजा जाता है।
आइए आपको बताते हैं कि इस साल राष्ट्रपति भवन की तरफ से भेजे गये गणतंत्र दिवस निमंत्रण पत्र के बॉक्स में कौन सी चीजें मौजूद थी -
इस साल का गणतंत्र दिवस निमंत्रण पत्र का बॉक्स दक्षिण भारत को समर्पित था। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से अतिथियों को सादर आमंत्रित करते हुए एक आमंत्रण पत्र के अलावा दक्षिण भारत की कलात्मक चीजों की एक छोटी सी झलक भी दिखाई गयी है।
इस साल गणतंत्र दिवस का निमंत्रण पत्र नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन द्वारा डिजाइन किया गया था। इस निमंत्रण पत्र बॉक्स में खासतौर पर उन चीजों को ही शामिल किया गया है जो विभिन्न दक्षिण भारतीय राज्यों की पहचान या यूं कहें धरोहर है। देश और विदेश के सभी मेहमानों को भेजे गये इस निमंत्रण पत्र के सभी बॉक्स का उत्पादन भी नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन द्वारा ही किया गया है।
गणतंत्र दिवस का निमंत्रण पत्र बांस से बने एक चौकोर डिब्बे में भेजा गया था। इस चौकोर डिब्बे के ऊपर बड़ी ही सुन्दरता के साथ कलमकारी की डिजाइन बनायी हुई थी। कलमकारी आंध्र प्रदेश की पारंपरिक कला है, जो सिर्फ इस राज्य में ही नहीं बल्कि देश भर में काफी लोकप्रिय है। कलमकारी की डिजाइन वाला यह बॉक्स रिसाइकिल किया जा सकता है यानी आमंत्रण पत्र पाने वाले अतिथि बाद में भी इस सुन्दर से बॉक्स का अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल कर सकते हैं।
बांस से बने इस बॉक्स के अंदर सभी चीजों को कपड़े से बनी एक थैली में सजाकर रखा गया है। लेकिन यह कपड़ा कोई मामूली कपड़ा नहीं है बल्कि प्रसिद्ध पोचमपल्ली इक्कत डिजाइन का है। बता दें, पोचमपल्ली इक्कत तेलंगाना की प्रसिद्ध कलाकारी है। इस थैली को बांस से बने उस बॉक्स के अंदर से निकाला जा सकता है और चाहे तो इसका इस्तेमाल गोलाई में मोड़कर बतौर पेंसिल पाउच या पेंटिंग ब्रश जैसी चीजों को रखने के लिए बाद में किया जा सकता है।
बॉक्स में उपहार के तौर पर कार्ड्स दिये गये हैं, लेकिन यह ताश के पत्ते नहीं बल्कि मैसूर की पारंपरिक गंजीफा कार्ड्स हैं। खास बात है कि हर एक निमंत्रण बॉक्स में जाने वाले इन सभी कार्ड्स को हाथों से पेंट कर तैयार किया गया है, जिसमें लोककथाएं और पौराणिक कथाओं को दर्शाया गया है। इन कार्ड्स पर बनायी गयी डिजाइन वास्तविक न होकर छोटे आकार की हैं यानी मिनीएचर हैं। इस कार्ड को फ्रिज मैग्नेट की तरह उपयोग किया जा सकेगा।
निमंत्रण बॉक्स में दिया जाने वाला अगला उपहार एक बुकमार्क है, जिसे हाथों से तैयार किया गया है। यह बुकमार्क केरल की स्क्रुाइन की पत्तियों को मोड़कर बनाया जाता है। इस कला का इस्तेमाल चटाई और टोकरियां आदि बनाने में किया जाता है। हर बॉक्स में दिया बुकमार्क के आकार वाला छोटा सा चटाई की तरह हाथों से बुनी गयी यह चीज स्क्रुपाइन से बनायी गयी है।
निमंत्रण पत्र के बॉक्स में इन सभी उपहारों को एक हरी रंग की पोटली में दी गयी है, जो हैंडलुम सिल्क से बनी है। यह पोटली कांचीपुरम् सिल्क के हाथ से बुने हुए कपड़े से तैयार की गयी है, जो तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करता है। गहरे हरे रंग की इस सुन्दर सी पोटली का उपयोग बाद में बटुआ के रूप में भी किया जा सकता है। यह पोटली इस बॉक्स के लुक में चार चांद लगा रहा है। पोटली की डोरियों पर केसरिया रंग के मोती लगाए हुए हैं, जो दूर से ही बड़े चटकिले और खिलेखिले से दिख रहे हैं।
गणतंत्र दिवस के निमंत्रण बॉक्स का सबसे आखिरी उपहार आंध्र प्रदेश का प्रसिद्ध एटीकोप्पाका खिलौना है। यह आंध्र प्रदेश में मौजूद इसी नाम के एक गांव की पहचान है, जिसे लकड़ी से बनाया जाता है। गुड्डा-गुड़िया की तरह दिखने वाला एटीकोप्पाका खिलौना भी पूरी तरह हाथों से बनाया और रंगा जाता है। आंध्र प्रदेश की पारंपरिक परिधानों की तरह ही इन खिलौनों को रंगों से सजाया भी गया है।



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