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श्रावण स्पेशल: देवों के देव महादेव के 10 रुद्र अवतार, उनकी आदिशक्तियां और उनसे संबंधित देवस्थान

विश्व में लगभग सभी देशों में भगवान शिव के अनन्य भक्त रहते हैं और वहां बाबा के कई मंदिर भी स्थापित है। महादेव को संहार का देवता भी कहा जाता है। अगर किसी भगवान के सबसे ज्यादा भक्त मिलते हैं तो वो हैं शिव। शिव को अनादि देवता कहा जाता है। क्योंकि उनका ना आरम्भ है और ना हीं कोई अंत। बाबा को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है।

भगवान शिव के मंदिर ना सिर्फ भारत में बल्कि इस्लामिक देशों में भी है। महादेव बड़े ही भोले देवता है। इसीलिए इन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव बड़ी ही जल्दी अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं और उनसे मनचाहा वरदान देते हैं और उनकी इच्छा पूरी करते हैं। महादेव ने राक्षसों के वध के लिए कई रुद्र रूप लिया। पुराणों के मुताबिक भगवान शिव के 10 रुद्र अवतारों का वर्णन मिलता है।

lord shiva

1. महाकाल - महाकाल को भगवान शिव का पहला रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां महाकाली मानी जाती हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर है। वहीं, उज्जैन में ही गढ़कालिका क्षेत्र में मां कालिका का प्राचीन है और गुजरात के पावागढ़ में महाकाली का मंदिर है।
2. तारा - तारा को भगवान शिव का दूसरा रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां तारा देवी मानी जाती हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में तारापीठ मंदिर है, जो आदिशक्ति तारा देवी को समर्पित है।
3. बाल भुवनेश - बाल भुवनेश को भगवान शिव का तीसरा रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां बाला भुवनेशी मानी जाती हैं। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में भुवनेश्वरी शक्तिपीठ है, जो मां बाला भुवनेशी को समर्पित है।

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4. षोडश श्रीविद्येश - षोडश श्रीविद्येश को भगवान शिव का चौथा रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां षोडशी श्रीविद्या मानी जाती हैं। त्रिपुरा के उदरपुर में त्रिपुर सुंदरी मंदिर है, जो मां षोडशी श्रीविद्या को समर्पित है।
5. भैरव - भैरव को भगवान शिव का पांचवा रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां भैरवी गिरिजा मानी जाती हैं। उज्जैन और गुजरात में भैरवी शक्तिपीठ है, जो मां भैरवी गिरिजा को समर्पित है।
6. छिन्नमस्तक - छिन्नमस्तक को भगवान शिव का छठा रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां छिन्नमस्ता मानी जाती हैं। झारखंड के रामगढ़ में छिन्नमस्तिका सिद्धपीठ है, जो मां छिन्नमस्ता को समर्पित है।
7. द्यूमवान - द्यूमवान को भगवान शिव का सातवां रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां धूमावती मानी जाती हैं। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में धूमावती मंदिर है, जो मां धूमावती को समर्पित है।

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8. बगलामुख - बगलामुख को भगवान शिव का आठवां रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां बगलामुखी मानी जाती हैं। मां बगलामुखी का मंदिर तीन जगहों पर है, जिनमें - कांगड़ा- हिमाचल, दतिया- मध्य प्रदेश और शाजापुर- मध्य प्रदेश शामिल है। लेकिन सबसे ज्यादा मान्यता हिमाचल के कांगड़ा में स्थित माता के मंदिर का है।
9. मातंग - मातंग को भगवान शिव का नौवां रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां मातंगी मानी जाती हैं। मध्य प्रदेश के झाबुआ में मातंगी मंदिर है, जो मां मातंगी को समर्पित है।
10. कमल - कमल को भगवान शिव का दसवां रुद्रावतार माना गया है, जिनकी शक्ति मां कमला मानी जाती है। महाराष्ठ्र के सोलापुर जिले में स्थित करमाला में मां कमला देवी मंदिर है, जो मां कमला को समर्पित है।

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