
इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। ये स्वर्ण के समान चमकीली हैं और भास्वर हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है।
इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहे हैं.. दक्षिण दिल्ली में छतरपुर में श्री अध्य कात्यानी शक्ति पीठ के बारे में, ये भारत का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर परिसर है। यह मंदिर देवी कात्यायनी, जो देवी दुर्गा का छठां स्वरूप है। अन्य मंदिरों के विपरीत इस मंदिर में हर जाति और हर धर्म के श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति है। इस मंदिर को देवी दुर्गा मां के एक उत्साही भक्त स्वामी नागपाल ने बनवाया था। यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है और आसपास खूबसूरत बगीचों से घिरा हुआ है।

मंदिर की नक्काशी, दक्षिण भारतीय वास्तुकला में की गई है। इस विशाल मंदिर परिसर में हमेशा निर्माण चलता रहता है जो कभी समाप्त नहीं होता है। मंदिर परिसर लगभग 70 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और इसके अंदर लगभग 20 छोटे और बड़े मंदिर भी तीन विभिन्न परिसरों में बने हुए हैं।

इस मंदिर के संस्थापक स्वामी नागपाल महाराज का समाधि मंदिर भी इस मंदिर के परिसर शिव - गौरी नागेश्वर मंदिर में बनाया गया है।
मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा पेड़ खड़ा है जहां आप टहनियों पर बंधें धागों को देख सकते हैं। श्रद्धालु, इस पेड़ की शाखों पर किसी भी मन्न्त को मांगने के लिए पवित्र धागे और चूडियां बांध देते हैं, उनका मानना है इससे उनकी इच्छाओं की पूर्ति होगी।मंदिर में दो प्रमुख श्राइन हैं। इनमें से एक महागौरी को समर्पित है जो दुर्गा मां का स्वरूप हैं, यह मंदिर भक्तों के लिए हर दिन खुला रहता है।
दूसरा श्राइन देवी कात्यायनी को समर्पित है और मंदिर हर महीने की अष्टमी और नवरात्रि के दौरान खुलता है। यहां स्थित देवी कात्यायनी की विशाल सोने की मूर्ति, दुनिया के हर हिस्से से भक्तों को आकर्षित करती है। यह मूर्ति हमेशा चमचमाते कपड़ों, चमकदार ज्वैलरी और भारी हार से सजी रहती है। मंदिर परिसर में भगवान शिव, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, राधा - कृष्णा और भगवान राम को समर्पित मंदिर भी हैं। इन सभी मंदिरों में दक्षिण भारतीय और उत्तर भारतीय वास्तुकला शैली का मिश्रण साफ झलकता है।



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