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श्रीलंका का सीता अम्मन कोविले मंदिर, जहां आज भी मौजूद है लंका दहन के निशान

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा श्रीलंका में सीता मंदिर के निर्माण का चुनावी दांव खेलने के बाद एक बार फिर से श्रीलंका का सीता मंदिर सुर्खियों में छा गया है। राम मंदिर के तर्ज पर श्रीलंका के उस क्षेत्र, जहां पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण ने माता सीता को बंदी बनाकर रखा था, वहां सीता के भव्य मंदिर का निर्माण करने की घोषणा मध्य प्रदेश के तत्कालिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने की थी।

temple in sri lanka

श्रीलंका में उस स्थान को 'सीता एलिया' के नाम से जाना जाता है। क्या आपको पता है कि यहां पहले से ही माता सीता का एक मंदिर स्थित है, जिसे 'सीता अम्मन कोविले' के नाम से जाना जाता है। सीता एलिया वह जगह है, जहां आज भी पवनपुत्र हनुमान द्वारा किये गये लंका दहन के निशान मिलते हैं। बता दें, सिंहली में एलिया का अर्थ ज्योति होता है।

मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार गिर जाने की वजह से वह परियोजना बंद पड़ गयी थी। लेकिन अब एक बार फिर से कमलनाथ ने घोषणा की है कि अगर चुनावों के बाद उनकी सरकार बनती है तो वह श्रीलंका में सीता का भव्य मंदिर बनाने की परियोजना को फिर से शुरू करेंगे। उससे पहले हम आपको सीता एलिया के विषय में विस्तार से बताते हैं।

कहां है यह मंदिर

sitha amman temple

सीता एलिया श्रीलंका के नोवारेलिया जिले में मौजूद एक स्थान है, जिसे सीता एलिया के नाम से जाना जाता है। सीता एलिया में मौजूद है माता सीता का मंदिर जो पूरी दुनिया में सीता अम्मन कोविले के नाम से विख्यात है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सीता एलिया ही वह स्थान है, जहां सीता-हरण के बाद रावण ने माता सीता को बंदी बनाकर रखा था। इस क्षेत्र में लाखों की संख्या में अशोक के पेड़ मौजूद हैं, जिससे इस क्षेत्र के ही अशोक वाटिका होने के दावे को और भी बल मिलता है। सीता एलिया से होकर एक नदी बहती है, जिसे सीता के नाम से ही जाना जाता है। यह जगह भारत के तमिलनाडू के धनुषकोडी से महज कुछ किमी की दूरी पर ही मौजूद है।

यहीं है अशोक वाटिका जहां बहे थे माता सीता के आंसू

दावा किया जाता है कि सीता एलिया ही वह जगह है, जिसको हिंदू पुराण में अशोक वाटिका कहा गया है। कहा जाता है कि माता सीता की खोज करते हुए इसी जगह पर भगवान हनुमान ने पहली बार श्रीलंका की धरती पर अपने कदम रखे थे। इसके बाद उन्होंने माता सीता को भगवान श्रीराम की अंगूठी दिखाई थी। माता सीता की अनुमति से हनुमान ने अपनी भूख मिटाने के लिए अशोक वाटिका में मौजूद फलों के पेड़ों को तहस-नहस कर दिया था।

seetha amman temple

इसके बाद रावण से मिलने के उद्देश्य से जब उन्होंने खुद को राक्षशों से पकड़वाया तो रावण के पुत्र मेघनाथ ने उनकी पूंछ में आग लगा दी थी। इसके बाद तो उन्होंने जो लंका कांड किया उसे आज के समय भी बच्चा-बच्चा जानता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, सीता एलिया में आपको उस लंका कांड के निशान आज भी मिल जाएंगे।

लंका कांड के कौन से हैं निशान?

श्रीलंका का सीता एलिया ही वह क्षेत्र है, जहां लंका पहुंचने के बाद हनुमान के कदम सबसे पहले पड़े थे। कहा जाता है कि यहां के सीता अम्मन कोविले मंदिर के ठीक पीछे चट्टानों पर हनुमान के पैरों के निशान मिलते हैं। सीता एलिया से होकर बहने वाली सीता नदी के एक किनारे की मिट्टी (जो अशोक वाटिका की तरफ है) पीली और दूसरे किनारे की मिट्टी काली है।

mata sitha temple

कहा जाता है कि जब हनुमान ने लंका कांड किया था, तब अशोक वाटिका उस भयानक अग्निकांड से अछुता रह गया था। इसलिए नदी के उस तरफ की मिट्टी पीली है लेकिन दूसरी तरफ की मिट्टी जल जाने की वजह से काली पड़ गयी जो आज भी काली ही है।

सीता एलिया से भेजा गया पत्थर

stone from sita eliya

अयोध्या में राम जन्म भूमि पर बन रहे भव्य मंदिर में श्रीलंका में मौजूद माता सीता के मंदिर से भी पत्थर भेजा गया था। इस पत्थर का इस्तेमाल मंदिर के निर्माण कार्य में किया गया है। इस पत्थर को मयूरपाथी अम्मान मंदिर में भारतीय दूतावास के अधिकारियों को सौंपा गया। इस मौके पर श्रीलंका में भारत के राजदूत और भारत में श्रीलंका के राजदूत दोनों उपस्थित रहे।

कैसा होगा श्रीलंका में माता सीता का नया मंदिर

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार सीता एलिया में जो मंदिर है, उसके पूनर्निर्माण किया जाएगा। इसके बाद नये मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होगा जिसमें सिर्फ माता सीता की प्रतीमा को तैयार करने में ही 15 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके बाद मंदिर के बाकी निर्माण कार्य में कुल मिलाकर करोड़ों रुपये खर्च होने की संभावना है।

मंदिर का डिजाइन ऐसे तैयार किया जा रहा है जिसमें अशोक वाटिका में माता सीता द्वारा बिताएं ऐतिहासिक क्षणों का विवरण होगा। हर जगह लैंडस्केपिंग की जाएगी। बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण लगभग 12.8 हेक्टेयर जगह पर की जाएगी। इस मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने के बाद मध्य प्रदेश सरकार टूरिज्म के तहत इसका प्रचार-प्रसार करेगी।

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