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श्रीशैल और उसके आसपास ऐसा क्या है जिसे एक ट्रैवलर को अवश्य देखना चाहिए

By Super

आज अपने इस लेख में हम आपको जिस डेस्टीनेशन से अवगत कराने जा रहे हैं उसका शुमार आंध्र प्रदेश के सबसे पवित्र डेस्टिनेशन में है। जी हां हम बात कर रहे हैं श्रीशैल की। श्रीशैल, हिंदुओं के लिए महान धार्मिक महत्व का एक छोटा सा शहर है। आंध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले में नल्लमाला पर्वत पर स्थित, इस शहर को कृष्णा नदी के तट पर स्थापित किया गया है।

Read in English: Travel to the Holy Town of Srisailam

श्रीशैल हैदराबाद की दक्षिणी दिशा में स्थित है और आंध्र प्रदेश की राजधानी से 212 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। यदि बात इस खूबसूरत शहर में पर्यटन के आयामों के इर्द गिर्द हो तो आपको बताते चलें कि यहां ऐसा बहुत कुछ है जिसके चलते हर साल देश दुनिया के लाखों पर्यटक इस खूबसूरत शहर की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। आइये इस लेख के जरिए जाना जाए की श्रीशैल और उसके आसपास ऐसा क्या है जिसे एक ट्रैवलर को अवश्य देखना चाहिए। डील ऑफ द डे : होटल बुकिंग पर पाएं 50% की छूट

अक्का महादेवी गुफाएं

अक्का महादेवी गुफाएं नल्लमाला पर्वतमाला पर स्थित हैं और श्रीशैल से लगभग 10 किमी की दूरी पर हैं। इस बात की पुष्टि करने के लिए कई सबूत हैं कि ये गुफाएं प्रागैतिहासिक काल से अस्तित्व में हैं। वास्तव में, इन गुफाओं ने इस शहर के इतिहास में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। माना जाता है कि इन गुफाओं को अपना नाम कर्नाटक की 12 वीं सदी की प्रसिद्ध तत्त्वज्ञानी और गीतकार अक्का महादेवी के नाम से प्राप्त हुआ है। यहां अक्का महादेवी तपस्या करती थी तथा इन गुफाओं के अंदर प्राकृतिक रुप में मौजूद शिवलिंग की पूजा करती थी। अक्का महादेवी गुफाएं स्वाभाविक रुप से गठित गुफाएं हैं और कृष्णा नदी के प्रवाह के विपरीत दिशा में बहुत करीब स्थित हैं। मुख्य गुफा में स्वाभाविक रूप से गठित एक चट्टानी मेहराब है जिसे एक भौगोलिक चमत्कार माना जाता है। यह मेहराब लगभग 200x16x4 फीट का है और यह किसी प्रकार के सहारे पर नहीं खड़ा है। सैलानी गुफा के अंदर जो निहित है, उसे अधिक मेहराब की ओर आकर्षित होते हैं। इन गुफाओं की यात्रा अपने आप में एक अनुभव है और आपको कृष्णा नदी से होकर गुजरना होगा। गुफाओं की 150 मीटर गहराई को खोजना एक अनुभव है जो यकीनन यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देगा।

श्रीशैल और उसके आसपास क्या देखें पर्यटक

Photo Courtesy: రహ్మానుద్దీన్

मल्लेला थीर्थम

मल्लेला थीर्थम एक झरना है जो श्रीशैल शहर से लगभग 50 किमी दूर स्थित है। यह झरना धार्मिक महत्व रखता है और हर साल हजारों श्रद्धालु इसके दर्शन करने आते हैं। यह झरना घने जंगल के बीच में हैं, लेकिन यहां तक एक ऊबड़-खाबड़ सड़क द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। मानसून के दौरान, सड़क गाड़ी चलान के योग्य नहीं रहती। यह झरना हिंदुओं के लिए एक महत्व का स्थान है क्योंकि माना जाता है कि इस झरने के पवित्र पानी के स्नान से आपके सारे पाप धुल जाते हैं और यह आपको मुक्ति या मोक्ष प्राप्त करने में मदद करेगा। माना जाता है कि इस झरने के पानी में कुछ जादुई चिकित्सा शक्तियां मौजूद है और त्वचा एवं मांसपेशियों से संबंधित कई रोगों को ठीक कर सकता है।इस झरने तक पहुंचते समय सैलानी थोड़ी सी सावधानी बरते क्योंकि इस झरने तक पहुंचते समय सैलानियों को 250 सीढियां उतनी पड़ती है। इन सीढियों पर कदम फिसल सकते हैं, इसलिए उतरते सयम सावधानी बरते और जल्दबाजी में सीढियों पर से ना उतरें।

श्रीशैल और उसके आसपास क्या देखें पर्यटक

Photo Courtesy: Ylnr123

श्रीशैल बांध

श्रीशैल बांध को कृष्णा नदी पर निर्माण किया गया है और श्रीशैल के मुख्य शहर से कुछ ही किलोमीटर दूर है। इस बांध को नल्लमाला पर्वतों के भीतर एक गरही खाई के ऊपर बहुत ही रणनीतिक रूप से बनाया गया है। इस बांध को भारत की दूसरी सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना का गौरव प्राप्त है। श्रीशैल बांध परियोजना को वर्ष 1960 में शुरू किया गया था, और इस परियोजना को पूरा करने में 20 साल का समय लग गए। जो योजना एक जल विद्युत परियोजना के रुप में शुरु की गई थी आगे चलकर एक बहुउद्देशीय सुविधा बन गई जिसमें 770 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता भी शामिल है। आज, यह बांध 2,200 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराता है। श्रीशैल जलाशय के अंतर्वा में, भंडारण के लिए बिजली उत्पादन की आवश्यकता नहीं है और इसलिए बड़ी मात्रा में जमा की जाती है। बाढ़ के दौरान, श्रीशैल जलाशय, बहुत जल्दी भर जाता है, और बाढ़ का बाकी पानी नागार्जुन सागर बांध में बह जाता है जोकि कम ऊंचाई पर स्थित है। बाढ़ के पानी को बिजली उत्पादन के लिए उपयोग नहीं किया जाता।

श्रीशैल और उसके आसपास क्या देखें पर्यटक

Photo Courtesy: Chintohere

श्रीशैल अभयारण्य

अगर आप श्रीशैल या उसके आसपास के क्षेत्र में हैं तो आपको श्रीशैल अभयारण्य जरुर देखना चाहिए। यह अभयारण्य भारत का सबसे बड़ा बाघ आरक्षित क्षेत्र है। यह चौंका देने वाले 3,568 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बनाया गया है और इस अभयारण्य की सैर अपने आप में साहसिक कार्य है, भले ही आप यहां किसी भी जानवर को देखने में असफल हो जाएं। इस अभयारण्य का क्षेत्र ऊबड़-खाबड़ इलाकों के साथ घुमावदार रास्तों से युक्त है और हर कदम पर गरही घाटियां हैं। अभयारण्य का भीतरी क्षेत्र पूरी तरह से शुष्क पर्णपाती जंगलों से आवृत है जिसमें कई बांस के पौधे शामिल हैं। अभयारण्य के अंदर, आप कई जंगली जानवरों को देख पाएंगे जिसमें बाघ, तेंदुआ, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, पाम सिवेट, भालू, हिरण और छिपकली के साथ बोनट मकाक भी शामिल है। श्रीशैल बांध के करीब स्थित यह अभयारण्य कई विभिन्न मगरमच्छों का निवास स्थान है, जो इस बांध के पानी में सुस्त पड़े दिखाई देंगे।

श्रीशैल और उसके आसपास क्या देखें पर्यटक

Photo Courtesy: Valerius Tygart

कैसे जाएं श्रीशैल

फ्लाइट द्वारा - श्रीशैल शहर में कोई हवाई अड्ड़ा नहीं है। हैदराबाद हवाई अड्ड़ा सबसे नजदीकी हवाई अड्ड़ा है जो श्रीशैल शहर से 232 किलोमीटर दूर है। हैदराबाद का हवाई अड्ड़ा देश के प्रमुख शहरों तथा कस्बों के साथ दुनिया के कुछ प्रमुख शहरों से भी जुड़ा है। आप हवाई अड्ड़े से किसी निजी टैक्सी द्वारा शहर पहुंच सकते हैं।

ट्रेन द्वारा - श्रीशैल में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, और गुंटूर-हुबली लाइन पर स्थित मर्कपुर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। मर्कपुर रेलवे स्टेशन श्रीशैल से लगभग 85 किमी दूर है। रेलवे स्टेशन से श्रीशैल तक पहुंचने के लिए आप कोई बस या टैक्सी ले सकते हैं। बस परिवहन का तरीका सबसे सस्ता होगा।

सड़क मार्ग द्वारा - श्रीशैल अच्छी सड़कों के माध्य से क्षेत्र के प्रमुख नगरों और शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है। आंध्र प्रदेश बस परिवहन की कई बसें की सेवा श्रीशैल से या श्रीशैल के लिए उपलब्ध है। लेकिन अगर आप किसी दूर-दराज क्षेत्र से आ रहें हैं तो अच्छा होगा कि आप अपनी बस की टिकट पहले से ही बुक कर लें।

श्रीशैल और उसके आसपास क्या देखें पर्यटक

Photo Courtesy: sai sreekanth mulagaleti

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