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लेह की रटी-रटाई जगहों से अलग घूमें स्टोक पैलेस, जो है लद्दाख के राजपरिवार का घर!

लद्दाख ट्रिप पर जाना है और पैलेस भी घूमना है? दोनों अलग-अलग चीजें कैसे हो सकती हैं...। सोच में पड़ गये ना। क्योंकि जब भी पैलेस का ख्याल आता है तो लोगों को सबसे पहले राजस्थान ही याद आता है। लेकिन क्या आपको पता है लद्दाख का एक राजा भी है, जो आज भी अपने पूरे परिवार के साथ महलों में रहता है।

ladakh stok palace

लद्दाख के राजा लेह पैलेस में नहीं बल्कि लेह से करीब 15 किमी दूर स्टोक पैलेस में अपने पूरे परिवार के साथ रहते हैं। स्टोक पैलेस जो आज एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी है। तो लेह की उन रटी-रटाई जगहों से अलग कुछ हटकर और कुछ शाही देखने का इरादा है तो स्टोक पैलेस में जरूर घूमने जाएं।

पहाड़ी के ऊपर बना हुआ स्टोक पैलेस दूर से नजर आता है। स्टोक एक छोटा सा गांव है, जो धीरे-धीरे विकसित हो रहा है। स्टोक को देखकर ऐसा ही लगता है कि लेह करीब 30 साल पहले कुछ ऐसा ही दिखता होगा। सिंधु नदी के तट पर बना स्टोक पैलेस आज भी अपनी शाही विरासत को संजोय हुए है। इस पैलेस का निर्माण 1820 में नामग्याल राजवंश ने करवाया था, जो इस क्षेत्र पर तब तक राज करते थे जब तक इस क्षेत्र पर 1834 में कश्मीर के डोगरा राजा का कब्जा नहीं हो गया है। नामग्याल राजवंश के सदस्य ही आज भी इस पैलेस के एक हिस्से में रहते हैं।

door of stok palace

चार मंजीला इस महल को 4 हिस्सों में बांटा गया है जिसमें से एक हिस्से में लेह के राजा अपने परिवार के साथ रहते हैं। दूसरे हिस्से में एक म्यूजियम, तीसरे हिस्से में एक मंदिर और चौथा हिस्सा हेरिटेज होटल है। इस होटल को पूरी तरह से किसी महल की तरह ही सजाया गया है जहां लोग रहने के लिए इसे बुक कर सकते हैं। अगर यह कहा जाए कि नामग्याल राजवंश का इतिहास स्टोक पैलेस के हर कोने में झलकता है, तो यह गलत नहीं होगा। 1980 में दलाई लामा ने इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। पैलेस में लद्दाख की परंपरा को बेहद सुन्दरता के साथ संजो कर रखा गया है। लोग पैलेस में घूमने के लिए आ सकते हैं और उन सामानों को करीब से भी देख सकते हैं, जिनका इस्तेमाल पूर्व के राजाओं ने किया था।

sunrise at leh

स्टोक पैलेस म्यूजियम में शाही परिवारों के कीमती गहनों को कलात्मकता के साथ सजा कर रखा गया है। म्यूजियम में आपको शाही पेंटिंग्स और कुछ खास तस्वीरें भी दिखेंगी जिनमें से कुछ तो 400 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। स्टोक पैलेस में एक मंदिर भी है जो स्टोक पैलेस हेरिटेज होटल का हिस्सा है। यह मंदिर गौतम बुद्ध को समर्पित है जो पैलेस के सबसे ऊपरी मंजील पर स्थित है। रोजमर्रा की पूजा के अलावा इस मंदिर में खास व वार्षिक त्योहारों का भी आयोजन किया जाता है।

कब और कैसे पहुंचे स्टोक पैलेस

स्टोक पैलेस लेह से करीब 15 किमी की दूरी पर है। यहां पहुंचने के लिए आपको लेह से बस या फिर टैक्सी मिल जाएगी। लद्दाख की राजधानी लेह के शहरी इलाके से स्टोक पैलेस पहुंचने में लगभग 45 मिनट का समय लगता है। स्टोक पैलेस में घूमने का कोई निर्धारित समय नहीं है क्योंकि यह हेरिटेज धरोहर का ही हिस्सा है। स्टोक म्यूजियम सुबह 8 से शाम को 7 बजे तक खुला रहता है। म्यूजियम के टिकट का मूल्य ₹50 है, जिसमें आपको म्यूजियम घूमने के लिए 2 घंटों का समय दिया जाता है।

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