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अद्भुत : यहां अपने हाथ से खाना बनाकर खिलाते हैं खूंखार अपराधी

शिमला का एकमात्र रेस्तरां जिसके चलाते हैं चार कैदी। Amazing restaurant located in Shimla, which run by four Prisoners.

शिमला में वैसे तो कई बड़े होटल्स और रेस्तरां मौजूद हैं, जो अपने खान-पान से लेकर बेहतरीन सेवाओं के लिए जाने जाते हैं। यहां आपको पांच सितारा होटल्स से लेकर सड़क किनारे बने ढाबे सब मिलेंगे, जो अपने लजीज व्यंजनों से सैलानियों का पेट और मन दोनों भरते हैं। लेकिन इस बीच आज हम आपको शिमला के एक ऐसे खास रेस्तरां के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप सच में चौक जाओगे।

एक ऐसा रेस्तरां जिसे चार अपराधी मिलकर चलाते हैं। चौकिए मत..ये कैदी खाने बनाने के मामले में किसी प्रोफेशनल कुक से कम नहीं। आइए जानते हैं शिमला के इस खास रेस्तरां के बारे में।

4 अपराधियों वाला कैफे

4 अपराधियों वाला कैफे

शिमला के इस अनोखे रेस्तरां का नाम है 'बुक कैफे', जिसे चलाने का काम चार अपराधी करते हैं। ये अपराधी शहर की कैठु जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। ये कैदी हैं लेकिन इन्हें प्रोफेशनल खाना बनाने का खास प्रशिक्षण दिया गया है। यह बुके कैफे अपनी इस खास आइडेंटिटी के लिए पूरे इलाके में सबसे स्पेशल माना जाता है।

कैफे की खासियत

कैफे की खासियत

बुके कैफे में आपको चाय-नाश्ते से लेकर स्वादिष्ट लंच-डिनर सब मिलेगा। इसके अलावा बुके कैफे सैलानियों को पहाड़ की सैर कराने के लिए गाइड की व्यवस्था भी करता है। जिसकी पूरी जिम्मेदारी बुके कैफे की होती है।

एक नई जिंदगी

एक नई जिंदगी

बुके कैफे में आने वाले सैलानियों के साथ-साथ यहां काम करने वाले अपराधी भी बहुत खुश नजर आते हैं। उनका मानना है कि बुक कैफे ने उन्हें एक नई जिंदगी दी है। वो कहते हैं जब उन्हें यह सूचना दी गई कि वे अब इस होटल को चलाएंगे तो उनके लिए खुशी का कोई ठिकाना न था।

एक बड़ा सकारात्मक कदम

एक बड़ा सकारात्मक कदम

जानकारी के लिए बता दें कि यह बुक कैफे राज्य के पर्यटन विभाग द्वारा चलाया जाता है। जिसके पीछे एक बड़ी सकारात्मक सोच छिपी है। यह बड़ा कदम कैदियों को समाज से जोड़ने और उनके पुनर्वास के लिए उठाया गया है। यह कैफे कुल 20 लाख की लागत से बनकर तैयार हुआ है,जहां आसानी से 40 लोग बैठ सकते हैं। यहां कैदी बाकी व्यंजनों के अलावा खास बिस्कुट और पिज्जा भी बनाते हैं।मौत की खदान का बड़ा रहस्य, गूंजती है मृत मजदूरों की आवाजें

कब तक काम करते हैं कैदी ?

कब तक काम करते हैं कैदी ?

यह कैफे सुबह 10 बजे से लेकर रात 7:30 बजे तक सैलानियों के लिए खुला रहता है। रात के 7:30 बजे के बाद कैदियों को वापस जेल में जाना पड़ता है। उम्रकैद की सजा काट रहे ये कैदी इस आजादी से काफी खुश हैं। उनका मानना है कि सरकार के इस कदम से हम दुनिया से जुड़ पा रहे हैं।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

कैदियों का खास रेस्तरां शिमला शहर के मशहूर रिज के पास ताका बेंच इलाके में स्थित है। शिमला रेलवे स्टेशन के यहां तक की दूरी लगभग 7.4 किमी है। स्टेशन से यहां तक के सफर के लिए आप प्राइवेट टैक्सी ले सकते हैं।

शिमला एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है जहां आप रेलवे व हवाई मार्गों से आसानी से पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग के लिए अच्छा होगा कि आप शिमला एयरपोर्ट के स्थान पर दिल्ली/चंड़ीगढ़ एयरपोर्ट का सहारा लें।चंडीगढ़ के पैरानॉर्मल साइट्स, जहां इंसानों का जाना मना है!

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