पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक न्यूज खूब छाया हुआ है। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों को अपना मल बैग में भरकर बेस कैंप में वापस लाना पड़ेगा। इसकी जांच भी की जाएगी। यानी कोई भी पर्वतारोही पहाड़ों पर अपना मल छोड़कर नीचे नहीं उतर सकता है। यह खबर पढ़कर ही आप अपने नाक-भौं सिकोड़ने लगे हैं। तो जरा सोचिए जिन पर्वतारोहियों को ऐसा करना पड़ेगा, उनपर क्या बितेगी।

दरअसल, यह नियम कोई नया लागू किया गया नियम नहीं है। बल्कि पर्वतारोहण का ही एक नियम है, अब जिसे कड़ाई से माउंट एवरेस्ट के पर्वतारोहियों पर लागू किया जा रहा है। चढ़ाई शुरू करने से पहले बेस कैंप में हर पर्वतारोही को यह सख्त हिदायत दी जाती है कि पहाड़ों के ऊपर कहीं भी गंदगी नहीं फैलानी है और न ही अपनी गंदगी को पहाड़ों पर छोड़कर वापस लौटना है। फिर भी चलिए आपको बताते हैं कि यह नियम सख्ती से क्यों लागू किया जा रहा है।
माउंट एवरेस्ट के पर्वतारोहियों को अपना मल बैग में भरकर बेस कैंप में वापस लेकर आना होगा। यह सख्त हिदायत पसांग ल्हामू ग्रामीण नगर पालिका द्वारा पर्वतारोहियों को दी गयी है। पर्वतारोहियों को बेस कैंप से एक Poop Bag खरीदना होगा, जिसमें उन्हें अपना मल वापस लाना होगा। दरअसल, हर साल सैंकड़ों की संख्या में पर्वतारोही नेपाल में माउंट एवरेस्ट की पर्वत श्रृंखलाओं पर चढ़ाई करने लिए जाते हैं। इनमें से कुछ पर्वतारोही सफल हो जाते हैं, लेकिन काफी पर्वतारोही आधे रास्ते पर ही अटक कर रह जाते हैं।

बेस कैंप से जब पर्वतारोही जब चढ़ाई शुरू करता है तो वह खुले में ही मल त्याग करता है। पहाड़ों पर अत्यधिक ठंड होने की वजह से वह नष्ट नहीं होता है और उसी अवस्था में रह जाता है। इस वजह से माउंट एवरेस्ट पर गंदगी बढ़ती जा रही है। इस वजह से पर्वतारोही बीमार पड़ रहे हैं। साथ ही काफी संख्या में पर्वतारोही पर्वतों पर जहां-तहां मल फैले होने की शिकायत भी कर रहे हैं। इस बारे में पसांग ल्हामू ग्रामीण नगर पालिका के अध्यक्ष मिंगमा शेरपा का कहना है कि हमें चट्टानों पर मानव मल के पड़े होने की शिकायत मिल रही है। इससे हमारी छवि खराब हो रही है।
पर्वतारोहियों को क्या करना होगा?
दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट और उसके पड़ोसी माउंट ल्होत्से की चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों को बेस कैंप से ही पूप बैग (Poop Bag) खरीदना होगा। पर्वतारोहियों को अपना मल इन बैग्स में भरकर ही वापस लाना होगा। वापस लौटने के बाद उनके पूप बैग की जांच भी होगी। बता दें, काफी कम पर्वतारोही ही होते हैं, जो पहाड़ों पर चढ़ाई करते समय बायोडिग्रेडेबल बैग में अपना मल वापस लेकर आते हैं।
सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। कुछ लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं तो कुछ इसके खिलाफ में लिख रहे हैं। किसी ने मजाकिया लहजे में लिखा है 'हगीस पहन कर जाओ'। वहीं किसी ने लिखा है 'अब एडवेंचर के शौकीनों में कमी आएगी, वर्ना लोग यूं ही चल देते थे एवरेस्ट पर।' एक यूजर ने कमेंट किया है 'कल ही पर्वतारोही कैंप में एडमिशन लिया था, आज नाम कटा दिया।'



Click it and Unblock the Notifications













