केरल का शुमार भारत के उन राज्यों में है जो अपनी विशिष्ट संस्कृति के चलते हर साल दुनिया भर के पर्यटकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करता है। यदि बात केरल के प्रमुख आकर्षणों की हो तो यहां बीच से लेके बैक वॉटर और गिरजों से लेके मंदिरों तक ऐसा बहुत कुछ है जिसे निहारने हर साल दूर दूर से पर्यटक आते हैं। मंदिरों की प्रमुखता के चलते इस राज्य ने हमेशा ही उन लोगों का ध्यान खींचा है जिन्हें धर्म में रूचि है। लेकिन अब अगर हम आपसे ये कहें कि केरल उनके लिए भी है जो अपना आत्मसात और अपनी इच्छा शक्ति को परखना चाहते हैं तो शायद आपको यकीन न हो। जी हां ये सच है यदि आप अपना आत्मसात और अपनी इच्छा शक्ति को परखना चाहते हैं तो आपको केरल स्थित सबरीमाला या सबरीमला आना चाहिए।
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 190 किलोमीटर दूर सबरीमला, समृद्ध जंगलों के मध्य स्थित एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ है। पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला में स्थित इस स्थान का प्राकृतिक सौन्दर्य आज भी अपने प्राचीन रूप में है। नवंबर- दिसंबर के पवित्र महीने में, जो कि मलयालम केलेंडर के अनुसार मंदालाकला ऋतु है, करोड़ों लोग इस स्थान पर आते हैं। यह एक वार्षिक तीर्थ का समय है और विभिन्न जाति, श्रेणी, वित्तीय पृष्ठभूमि के लोग पूरे देश एवं विदेशों से बड़ी संख्या में सबरीमला आते हैं। आपको बता दें कि ये तीर्थ 48 दिनों का होता है जिसमें आने वाले भक्तों को 48 दिनों तक व्रत रखना होता है जिसमें आने वाले भक्त को शराब, सेक्स, मांस और धूम्रपान से दूरी बनानी होती है और पैदल चल के भगवान अय्यप्पा के मंदिर तक जाना होता है।
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ज्ञात हो कि सबरीमला शैव और वैष्णवों के बीच की अद्भुत कड़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि मान्यता है कि भगवान अय्यप्पा भगवान शिव और विष्णु के पुत्र थे। जिनका जन्म एक राक्षस महिषी को मारने के उद्देश्य से हुआ था। आपको बताते चलें कि इस पर्व के दौरान सबरीमला स्थित भगवान अय्यप्पा मंदिर में महिलाओं का प्रवेश निषेध है। भगवान अय्यप्पा के ब्रह्माचारी होने के चलते लोगों के बीच मान्यता है कि यहां केवल 10 साल से काम उम्र की बच्चियां अथवा 60 वर्ष से अधिक आयु की ही महिलाएं यहां आ सकती हैं।
पर्व के दौरान भक्तों को मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचने के लिए 18 पवित्र सीढियां चढ़नी होती हैं। ऐसा विश्वास है कि ये सीढियां मनुष्य के अलग अलग लक्षणों को प्रस्तुत करती हैं: पहली पांच सीढियां मनुष्य की पांच इन्द्रियों को चिन्हित करती हैं, अगली 8 मानवीय भावनाओं को प्रस्तुत करती हैं, इसकी अगली तीन सीढियां मानवीय गुण और अंतिम 2 सीढियां ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक हैं। आइये कुछ चुनिंदा तस्वीरों के जरिये जाना जाये कि क्यों केरल के अलावा संपूर्ण भारत भर में धर्म की दृष्टि से ख़ास है सबरीमला की यात्रा।

पंबा की पवित्र भूमि
सम्पूर्ण भारत भर से लोग सबरीमला यात्रा के लिए पंबा की पवित्र भूमि पर पधारते हैं। इस दौरान आपको यहां फूलों से सजे हुए वाहन दिखेंगे।
फोटो कर्टसी - Yedhu Krishnan

महत्त्वपूर्ण यात्रा
पंबा से मुख्य भगवान अय्यप्पा स्वामी मंदिर की पैदल यात्रा करते भक्तों की टोली की तस्वीर।
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पैदल यात्रा
यहां आने वाले लोगों के बीच मान्यता है कि इस तीर्थ का पुण्य तभी है जब व्यक्ति यहां तक की पैदम यात्रा करे।
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पवित्र पंबा नदी
दक्षिण भारत की तीसरी सबसे बड़ी नदियों में शुमार पंबा में सबरीमला तीर्थ के दौरान भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है।
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पवित्रता की डुबकी
दक्षिण भारत के लोगों के बीच ये मान्यता है कि पंबा नदी दक्षिण की गंगा है और इस नदी में कोई अगर डुबकी लगाता है तो उसके पाप धुल जाते हैं।
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पंबा
पंबा में आपको कई सारी सुविधाएं जैसे होटल, लॉकर रूम, रेस्ट रूम मिल जाएंगे जहां आप अपने सामान को रखकर आगे की यात्रा के लिए जा सकते हैं।
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जंगलों और चढ़ाई से घिरी है यात्रा
इस यात्रा और मुख्य मंदिर तक जाने के लिए भक्तों को जंगलों और खड़ी चढ़ाई से होकर अपनी यात्रा को पूरा करना होता है।
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पूरे रास्ते मंत्र का उच्चारण
आपको बताते चलें कि इस पूरी यात्रा की ख़ास बात ये है कि अपनी यात्रा खत्म होने तक व्यक्ति को मंत्रों का जाप करना होता है।
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मंदिर में प्रवेश
आने वाले भक्त शाम के वक़्त ही मंदिर में प्रवेश कर पाते हैं। यहां वो रात में आराम करते हैं फिर सुबह दर्शन के लिए निकलते हैं।
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रास्ते में ब्रेक लेते भक्त
चूंकि इस यात्रा पर आये हुए भक्त कई दुर्गम रास्तों से होकर गुज़रते हैं अतः आराम करते भक्तों को दर्शाती तस्वीर।
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दर्शन के लिए भक्तों की भीड़
सबरीमला स्थित मुख्य भगवान अय्यप्पा स्वामी मंदिर में दर्शन के लिए कतार में लगे भक्तों की भीड़।
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जहां होती है इच्छा शक्ति की परीक्षा
यदि आप अपना आत्मसात और अपनी इच्छा शक्ति को परखना चाहते हैं तो आपको केरल स्थित सबरीमाला या सबरीमला आना चाहिए।
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