» »ताजमहल की खूबसूरती ने कर दिया कमाल और बन गयी दूसरी यूनेस्को विश्व धरोहर!

ताजमहल की खूबसूरती ने कर दिया कमाल और बन गयी दूसरी यूनेस्को विश्व धरोहर!

Written By: Goldi

हाल ही में एक प्रमुख यात्रा पोर्टल ने एक सर्वेक्षण किया था जहां ताजमहल को कंबोडिया में अंगकोर वाट के बाद दूसरा सबसे अच्छा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। अविरत प्रेम का प्रतीक, आगरा में यह हाथीदांत-सफेद संगमरमर का मकबरा दुनिया भर में यात्रियों को आकर्षित कर रहा है।

ताज के ये 52 फ्रेम देखकर खुद-ब-खुद मुहं से निकल पड़ता है "वाह ताज"

सर्वेक्षण में मूल रूप से यूनेस्को सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत स्थलों को शामिल क्या गया था, जिन्हें ग्लोबेट्रॉटर द्वारा सर्वश्रेष्ठ चुनी गयी हैं।  

माँ-बेटे के प्रेम की निशानी, भारत का छोटा ताज महल!

ताजमहल को वर्ष 1 983 यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल बनाया गया था...इसे "भारत में मुस्लिम कला का गहना और दुनिया की विरासत के वैश्विक सम्मानित कृतियों में से एक" कहा जाता है।

तो क्या राजपूतों को हराकर, शिव मंदिर तोड़ने के बाद हुआ था ताजमहल का निर्माण

इस इमारत का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की त्याद में बनवाया था..यह भारत की बेहद ही खूबसूरत सफेद संगमरमर से बनी इमारत है,जिसे हर साल करीबन 8 मिलियन से भी ज्यादा पर्यटक देश विदेश से पहुंचते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ताजमहल का दौरा करने वाला हर तीसरा व्यक्ति विदेशी होता है, जो ताजमहल का दीदार करने पहुँचता है। आइये स्लाइड्स में जानते हैं भारत की यूनेस्को धरोहर स्थलों के बारे में

ताज महल

ताज महल

ताज महल की गितनी विश्व के सात अजूबों में होती है। इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में करवाया था। यहीं मुमताज महल का मकबरा भी है। ताजमहल भारतीय, पर्सियन और इस्लामिक वास्तुशिल्पीय शैली के मिश्रण का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण कार्य 1632 में शुरु हुआ था। 21 साल तक इसमें हजारों शिल्पकार, कारीगर और संगतराश ने काम किया और 1653 में ताजमहल बनकर तैयार हुआ। यहां स्थित मुमताज महल का मकबरा ताजमहल का मुख्य आकर्षण है। सफेद संगमरमर से बना यह मकबरा वर्गाकार नींव पर आधारित है। यह मेहराबरूपी गुंबद के नीचे है और यहां एक वक्राकार गेट के जरिए पहुंचा जा सकता है।
Pc:Abe Bingham

अजन्ता की गुफाएं

अजन्ता की गुफाएं

महारष्ट्र राज्य के औरंगबाद जिले में पड़ने वाली अजन्ता की गुफाएं में चट्टानों की बनी करोब 30 बौद्ध गुफा स्मारक है...गुफा में बने चित्र बौद्ध धर्म कला की प्रसिद्ध रचनायों पर आधारित है, इसमें भगवान बुद्ध को भी चित्रित किया गया है। अजन्ता की गुफाएं वर्ष 1983 में यूनेस्को की वैश्विक धरोहर में शामिल की गयी थी।Pc:Dey.sandip

कुतुब मीनार

कुतुब मीनार

दिल्ली के कुतुब परिसर में मौजूद ये सबसे प्रसिद्ध संरचना है। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में यह देश की सबसे ऊँची मीनार है जिसकी ऊँचाई 72.5 मी है। कुतुब मीनार को 1193 से 1368 के बीच कुतुब-उ-दीन- ऐबक ने विजय स्तम्भ के रूप में बनवाया था। स्थापत्य कला की यह अद्भुत मिसाल अच्छी तरह से संरक्षित है और भारत की एक देखने वाली संरचना है।Pc:Dimitry B.

सुंदरवन राष्ट्रीय वन

सुंदरवन राष्ट्रीय वन

भारत के राज्य पश्चिम बंगाल में स्थित सुंदरवन 54 छोटे द्वीपों का समूह है।यह क्षेत्र मैन्ग्रोव के घने जंगलों से घिरा हुआ है और रॉयल बंगाल टाइगर का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है। सुंदरवन रॉयल बंगाल टाइगर के विश्व प्रसिद्ध है। इसे वर्ष 1987 में वैश्विक धरोहर में शामिल किया गया था।Pc:Soumyajit Nandy

कोणार्क सूर्य मंदिर

कोणार्क सूर्य मंदिर

कोणार्क सूर्य मंदिर ओड़िशा राज्य के पुरी जिले में स्थित है..यह उड़ीसा के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। कोणार्क भगवान सूर्य को समर्पित मंदिर है।इस मंदिर को यूनेस्कों ने वर्ष 1984 में वैश्विक धरोहर में शामिल किया गया था।Pc:Joel Godwin

फतेहपुर सिकरी

फतेहपुर सिकरी

यूपी के आगरा में स्थित है। इसका निर्माण बादशाह अकबर ने 16वीं सदी में करवाया था। फतेहपुर सिकरी को क्रिसन 10 वर्षों तक मुगलों की राजधानी रही थी। इस समरक में भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है जामा मस्जिद भी है। इसे वर्ष 1986 में वैश्विक धरोहर में शामिल किया गया था।Pc:Diego Delso

साँची स्तूप

साँची स्तूप

साँची स्तूप एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है जो भोपाल शहर से लगभग 46 किमी दूर मध्यप्रदेश के साँची गाँव में स्थित है। यहाँ तीन स्तूप हैं और ये देश के सर्वाधिक संरक्षित स्तूपों में से एक हैं। पहले साँची स्तूप का निर्माण तीसरी शताब्दी में हुआ था। इसकी उंचाई लगभग 16.4 मीटर है और इसका व्यास 36.5 मीटर है। दूसरे स्तूप का निर्माण दूसरी शताब्दी में हुआ था और यह एक कृत्रिम मंच के ऊपर एक पहाड़ी की सीमा पर स्थित है। तीसरा साँची स्तूप पहले साँची स्तूप के पास स्थित है और इसमें अर्धवृत्ताकार गुंबद के ऊपर एक मुकुट है जिसे एक बहुत पवित्र स्थान माना जाता है। साँची के सभी तीन स्तूप विश्व विरासत स्थल (वर्ल्ड हेरिटेज साईट) के रूप में माने जाते हैं और वर्तमान में यूनेस्को के अंतर्गत आते हैं।Pc:Abhinav Saxena

नालंदा विश्वविद्यालय

नालंदा विश्वविद्यालय

बिहार के नालंदा जिले में बना नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। 450 ई. में इसकी स्थापना हुई थी। उस जमाने में यहाँ विभिन्न देशों के 10 हजार से अधिक विद्यार्थी निवास और अध्ययन करते थे। 12वीं शताब्दी में बख्तियार खलजी ने इसे तहस-नहस कर दिया था। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने की। इसे 2016 मेंवै वैश्विक धरोहर में शामिल किया गया था।Pc:Hideyuki KAMON

खुजराओ मंदिर

खुजराओ मंदिर

कामसूत्र की तरह ही खजुराहो के मंदिर भी विश्वप्रसिद्ध हैं, क्योंकि इनकी बाहरी दीवारों में लगे अनेक मनोरम और मोहक मूर्तिशिल्प कामक्रिया के विभिन्न आसनों को दर्शाते हैं। इन मन्दिरों का निर्माण चन्देल शासकों ने 990 और 1130 इसवी के बीच कराया था। इसे वर्ष 1986 में वैश्विक धरोहर में शामिल किया गया था

केवला राष्ट्रीय उद्यान

केवला राष्ट्रीय उद्यान

केवला राष्ट्रीय उद्यान यूपी के आगरा और राजस्थान के जयपुर के बीच स्थित है।उत्तर भारत का यह उद्यान देश के राजस्थान राज्य के उत्तर पश्चिम हिस्से में स्थित है।इस राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्कों ने वर्ष 1985 में वैश्विक धरोहर में शामिल किया गया था।Pc:Lip Kee

हम्पी के स्मारकों का समूह

हम्पी के स्मारकों का समूह

यह भारत के कर्नाटक राज्य में बेंगलुरु के पास स्थित है।हम्पी अपने खंड़हरों की सुंदर वास्तुकला के अलावा अपने धार्मिक इतिहास के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां कई प्रसिद्ध मंदिर हैं जिनमें वीरूपाक्ष मंदिर, विट्ठल मंदिर और अंजनियाद्री मंदिर शामिल हैं। कर्नाटक की प्रमुख नदियों में से एक तुंगभद्रा नदी, इस शहर में बहती है, तथा इन खंड़हरों के पास एक विस्मयदायक प्राकृतिक वातावरण को प्रदान करती है। मंदिरों और प्राकृतिक दृश्यों के अलावा, यहां बड़ी खूबसूरती के साथ बनाए गए कई पानी के ताल और अन्य सार्वजनिक भवन भी हैं, जो विजयनगर के राजाओं के नगर नियोजन कौशल को दर्शाते हैं। यहां के जलसेतु और नहरें 13 से 15वीं सदी की जल प्रबंधन प्रणाली की एक झलक दिखलाते हैं। इसे वर्ष 1986 में वैश्विक धरोहर में शामिल किया गया था।Pc:Apadegal

महाबलीपुरम का स्मारक समूह

महाबलीपुरम का स्मारक समूह

महाबलीपुरम या मामल्लपुरम तमिलनाडु राज्य का एक ऐतिहासिक शहर है। इस शहर के समुद्र बंदरगाह से पेरिप्लस के समय के दौरान कई भारतीय उपनिवेशक दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए रवाना हुए है। महाबलीपुरम के प्राचीनअवशेष हर दिन दुनिया भर से कई पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसे यूनेस्कों ने वर्ष 1984 में वैश्विक धरोहर में शामिल किया गया था।