पैरों के नीचे से जमीन खिसक नहीं जाएगी बल्कि पैरों के नीचे नीला समुद्र दिख जाएगा, जब आप कन्याकुमारी में नवनिर्मित ग्लास ब्रिज (Glass Bridge) के ऊपर से गुजरेंगे। पिछले सोमवार (30 दिसंबर 2024) को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टैलिन ने कन्याकुमारी में दो स्मारकों को जोड़ती ग्लास ब्रिज का उद्घाटन किया, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह देश में अपनी तरह का पहला ग्लास ब्रिज है।
इस ग्लास ब्रिज का उद्घाटन कन्याकुमारी में स्थित तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा का तत्कालिन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि द्वारा उद्घाटन करने के 25 साल पूरे होने की खुशी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया।

कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल और तमिल कवि तिरुवल्लुवर की 133 फीट ऊंची प्रतिमा को जोड़ने वाली यह ग्लास ब्रिज समुद्र के ऊपर बनायी गयी है। यानी जब पर्यटक इस ग्लास ब्रिज से होकर विवेकानंद रॉक मेमोरियल तक जाएंगे, तब उन्हें अपने पैरों के नीचे समुद्र का नीला पानी और उसकी लहरें साफ-साफ दिखाई देंगी जो पर्यटकों में रोमांच और उत्साह पैदा करेगी।

इस शानदार ग्लास ब्रिज का एक वीडियो अपने आधिकारिक X हैंडल पर शेयर कर मुख्यमंत्री एमके स्टैलिन इसका बर्डआई व्यू दिखाया है। उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री स्टैलिन खुद भी इस ग्लास ब्रिज पर चलकर विवेकानंद रॉक मेमोरियल तक पहुंचे थे।
क्या है ग्लास ब्रिज की विशेषताएं?
कन्याकुमारी में बनाया गया ग्लास ब्रिज करीब 77 मीटर लंबा, 10 मीटर चौड़ा और 133 फीट ऊंचा है। ग्लास ब्रिज धनुषाकार है, जिसके बारे में राज्य सरकार का दावा है कि यह समुद्री हवाओं के तेज थपेड़ों और नमी वाले हवा के झोंकों से ब्रिज को बचाएगा। पर्यटक ग्लास ब्रिज पर पैदल चलते हुए तिरुवल्लुवर की प्रतिमा से विवेकानंद रॉक मेमोरियल तक का सफर तय करेंगे और इस दौरान समुद्र का नजारा उन्हें सामने तो दिखाई देगा ही, लेकिन...

जब वह अपनी नजरें नीची करेंगे तो उन्हें अपने पैरों के नीचे से भी समुद्र का नीला पानी साफ-साफ दिखाई देगा। पर्यटकों को अब दोनों स्मारकों के बीच आने-जाने के लिए बोट सेवाओं का सहारा नहीं लेना होगा।
कितनी है लागत?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार कन्याकुमारी में इस ग्लास ब्रिज का निर्माण करने की लागत करीब ₹37 करोड़ आयी है, जिस खर्च को तमिलनाडु सरकार ने पूरी तरह से उठाया है। पर्यटकों का कहना है कि इस ग्लास ब्रिज के बन जाने से न सिर्फ समुद्री नजारों का आनंद उठाया जा सकेगा बल्कि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा से विवेकानंद रॉक मेमोरियल तक पहुंचना भी पहले के मुकाबले अब और आसान हो जाएगा।

पहले जहां इन दोनों स्मारकों के बीच आने-जाने के लिए फेरी सेवाओं का सहारा लेना पड़ता था, कन्याकुमारी बोट जेट्टी से विवेकानंद रॉक मेमोरियल और उसके बाद तिरुवल्लुवर की प्रतिमा के लिए फिर से बोट से जाना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं करना होगा। अब पर्यटक कन्याकुमारी बोट जेट्टी से विवेकानंद रॉक मेमोरियल जाएंगे और वहां से पैदल ग्लास ब्रिज से होकर दोनों स्मारकों के बीच आसानी से आवाजाही कर सकेंगे। जिसमें बोनस होगा शानदार समुद्री नजारें।



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