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बीच नदी में स्थित चट्टान पर बना है गर्जिया देवी का मंदिर, जहां शेर करते थे परिक्रमा

देव भूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में एक मंदिर ऐसा है, जिसकी परिक्रमा कोई और नहीं बल्कि स्‍वयं दुगा माता के प्रिय शेर करते हैं। जी हां यह कोई पौराण‍िक कथा नहीं, बल्कि ऐसा वास्तव में देखा भी गया है। जी हॉं हम बात कर रहे हैं, नैनीताल से गुजरने वाली कोसी नदी के पास स्थित गर्जिया देवी के मंदिर की।

Garjiya Devi

आइए आपको गर्जिया देवी मंदिर के बारे में विस्तार से बताते हैं :

गिरिराज हिमालय की पुत्री गिरिजा

यह मंदिर माता पार्वती यानी गिरिराज हिमालय की पुत्री गिरिजा अथवा गर्जिया को समर्पित है। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में रामनगर से 10 किमी की दूरी पर स्थित यह मंदिर कोसी नदी के बीच में 100 फीट ऊंची चट्टान पर टीले पर अवस्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से है।

Garjiya devi

पौराणिक मान्यता के अनुसार गर्जिया देवी का मंदिर जिस टीले पर स्थित है, वह टीला एक बार कोसी नदी में आयी बाढ़ में बहने लगा था। तब भैरव देव ने टीले को आवाज लगायी और कहा, 'ठहरो बहन ठहरो। हम सबके साथ यहां निवास करो।' इसके बाद गर्जिया देवी कोसी नदी के बीच में ही रुक गयी और वहीं उनका मंदिर बनवाया गया।

दर्शन मात्र से होती है मनोकामना पूर्ति

Garjiya devi temple

गर्जिया देवी हिमालय की पुत्री यानी माता पार्वती का ही एक स्वरूप है। इसी वजह से इस स्थान को शक्तिस्थल कहा जाता है। मान्यता है कि गर्जिया देवी के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती है। जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आकर गर्जिया देवी से मन्नत मांगता है, उसकी सभी इच्छाएं जरूर पूरी होती हैं। लेकिन स्थानीय मान्यता के अनुसार मन्नत पूरी होने के बाद भक्त का फिर से गर्जिया देवी के धाम में आकर माथा टेकना अनिवार्य है, अन्यथा वह भक्त दंड का भागी बनता है।

शेर करते थे परिक्रमा

temple uttarakhand

यह मंदिर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से महज 7-8 किमी की दूरी पर ही स्थित है। कहा जाता है कि एक बार वन विभाग के अधिकारियों ने कई शेरों के एक साथ दहाड़ने की आवाज सुनी थी। जब करीब जाकर देखा गया तो पाया गया कि कई खुंखार शेर एक साथ इस मंदिर की परिक्रमा कर रहे थे। उसके बाद से ही इस स्थान का महत्व काफी ज्यादा बढ़ गया। गांव के लोगों ने इसके बाद ही मंदिर का निर्माण करवाया। गर्जिया देवी का मंदिर काफी खतरनाक स्थान पर स्थित होने के बावजूद इस मंदिर में भक्तों की कमी नहीं होती है।

पूजा करने की परंपरा

garjiya devi temple during flood

इस मंदिर का व्यवस्थित तरीके से निर्माण 1970 में करवाया गया था। गर्जिया देवी के मंदिर में पूजा करने आने वाले लोग पहले कोसी नदी में स्नान करते हैं। इसके बाद 90 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर के गर्भगृह तक जाना होता है, जो रास्ता नदी से होकर ही जाता है। इस मंदिर में माता पार्वती के साथ-साथ भगवान गणेश, लक्ष्मी-नारायण और माता सरस्वती के भी दर्शन होते हैं। मंदिर में पूजा करने के बाद भैरव देव जी की पूजा की जाती है। भैरव देव को चावल और उड़द की दाल चढ़ाई जाती है। भैरव देव जी की पूजा के बाद ही गर्जिया माता की पूजा संपन्न मानी जाती है।

कैसे पहुंचे गर्जिया देवी मंदिर

गर्जिया देवी का मंदिर नैनीताल से 73 किमी की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर रामनगर से 10-13 किमी दूर स्थित है। सड़कमार्ग से गर्जिया देवी का मंदिर रामनगर और नैनीताल दोनों जगहों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अगर आप ट्रेन से आना चाहते हैं तो गर्जिया देवी मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन रामनगर है।

FAQs
गिरिजा देवी के मंदिर में कितनी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है?

गिरिजा देवी या गर्जिया देवी का मंदिर कोसी नदी के बीच में स्थित है। यह मंदिर एक विशालकाय चट्टान पर बना हुआ है। मंदिर में पहुंचने के लिए कुल 90 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।

रामनगर में कौन सी देवी का मंदिर है?

रामनगर में गर्जिया देवी का मंदिर है। यह मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। रामनगर से करीब 10 किमी की दूरी पर यह मंदिर स्थित है।

गर्जिया देवी मंदिर के पास से होकर कौन सी नदी बहती है?

गर्जिया या गिरिजा देवी के पास से होकर कोसी नदी बहती है। या यूं कहा जा सकता है कि कोसी नदी के बीच में गर्जिया देवी का मंदिर अवस्थित है।

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