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अब आपको टॉप क्लास और फ़्लूएंट इंग्लिश सिखाएंगी इस मंदिर की इंग्लिश देवी

By Staff

आज भारत का शुमार उन देशों में हो रहा है जो अपने रिलीजियस टूरिज्म के कारण देश विदेश के लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। आज ये कहना बिल्कुल भी अतिश्योक्ति न होगी कि भारत मंदिरों का देश है। यहां 33 करोड़ देवी देवताओं के चलते आपको हर गली हर नुक्कड़ पर कई सुंदर और आलिशान मंदिर दिख जाएंगे जो अपनी कलात्मकता और रचनात्मकता से आपका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करेंगे। OMG ... !!! ट्रेन जिसका किराया है 1 लाख INR इसके इतर आज भारत में कई मंदिर ऐसे भी हैं जिनके आराध्य को देखकर आप अवश्य ही आश्चर्य चकित रह जाएंगे और हो सकता है कि ये सोचें कि आखिर ऐसी क्या वजह थी कि हम भारतियों को रोजाना एक देवी या फिर एक देवता की जरूरत महसूस होती है। पढ़ें : जलती हुई सिगरेट, तो कहीं रॉयल इंफील्ड, ये हैं इन मंदिरों के प्रमुख देवता

आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां की देवी इंडियन नहीं बल्कि फॉरेनर है, साथ ही अगर आपने देवी के दर पे मत्था टेका तो आप ऐसे फ़र्राटे से इंग्लिश बोलेंगे कि अमेरिका और यूरोप के लोग भी आपको देखकर आश्चर्यचकित रह जाएंगे। जी हां ये सच है हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बनका गांव की जहां पर दलित समाज के लोगों द्वारा इंग्लिश देवी का मंदिर स्थापित किया गया है।

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

इंग्लिश देवी की शक्ल किसी विदेशी मेम की तरह है जिनके एक हाथ में बड़ी सी कलम और दूसरे हाथ में एक किताब है। देवी ने सिर पर हैट लगा रखी है जो ये बताती है कि आज दौर अंग्रेजी का ही है।

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

इंलिश देवी की इस मूर्ति को यहां के एक स्कूल में स्थानीय दलित नेता के द्वारा स्थापित कराया गया है।

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

यहां के लोगों का मानना है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में पुरुषों के पास पढ़ने के ढेरों अवसर है मगर बात जब स्त्रियों की हो तो स्थिति सोचने वाली है। इस मूर्ति का उद्देश्य ये है कि महिलाऐं भी देवी को देख मॉडर्न बने और अपने अंदर शिक्षा का संचार करें।

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

लखीमपुर खीरी जिले के बनका के एक स्कूल में स्थापित ये मंदिर और ये मूर्ति दिखने में भी बड़ी विचित्र है। ये मूर्ति 20 किलो वजनी है और और पीतल की बनी हुई है ।

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

इस मूर्ति को यहां स्थापित करने का उद्देश्य दलितों में अंग्रेजी भाषा का संचार करना है। दैट लोगों का मानना है कि जब तक उनके बच्चों में अंग्रेजी नहीं आयगी तब तक वो उन्नति के मार्ग पर नहीं चल सकते हैं।
इलाके के लोगों का ये भी मानना है कि यदि आपने देवी के दर पर मत्था टेका और अंग्रेजी सीखने में थोड़ी मेहनत की तो आप ऐसे फ़र्राटे से इंग्लिश बोलेंगे कि अमेरिका और यूरोप के लोग भी आपको देखकर आश्चर्यचकित रह जाएंगे।

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

कुछ ऐसी दिखती हैं इंग्लिश देवी

अंग्रेजी देवी मंदिर की स्थापना का मूल उद्देश्य दलित समाज को यह संदेश देना है कि उनका उद्धार इस भाषा के ज्ञान से ही हो सकता है।

इस मंदिर के निर्माण की वजह भी बड़ी दिलचस्प है, यहां के दलितों का मानना है कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने हमेशा से ही अंग्रेजी शिक्षा और उसके प्रचार प्रसार पर बल दिया था और कहा था कि यदि दलितों को उन्नति करनी है और आगे बढ़ना है तो उन्हें इंग्लिश सीखनी ही होगी। यहां के स्थानीय लोगों का ये भी मानना है कि शिक्षा के हिसाब से आज दलित पुरुषों के पास काफी विकल्प है परन्तु महिलाओं की हालत ख़राब है और शिक्षा के क्षेत्र में वो ज्यादा ही पिछड़ी हैं, तो यदि इलाके में मंदिर होगा और ये महिलाऐं जब वहां मत्था टेकने जाएंगी तो इंग्लिश देवी उनमें शिक्षा ख़ास तौर से इंग्लिश भाषा का संचार करेंगी और वो इंग्लिश सीख जाएंगी।

लखीमपुर खीरी जिले के बनका के एक स्कूल में स्थापित ये मंदिर और ये मूर्ति दिखने में भी बड़ी विचित्र है। ये मूर्ति 20 किलो वजनी है और और पीतल की बनी हुई है । यदि आप इसे ध्यान से देखें तो आपको मिलेगा कि इंग्लिश देवी अपने एक हाथ में कलम लिए हुए हैं तथा दूसरे हाथ में एक किताब और देवी ने बिल्कुल किसी अंग्रेज की ही तरह एक हैट भी लगा रखी है यूं तो देवी भारतीय है मगर इनमें आपको किसी विदेशी मेम की झलक दिखेगी।

तो आइये देखते हैं तस्वीरों में कैसी दिखती हैं ये इंग्लिश देवी और क्या वाक़ई हम इनके जरिये इंग्लिश जैसी भाषा सीख सकते हैं।

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