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चाहे इंदिरा गांधी की खून से सनी साड़ी हो या फिर बापू का चरखा, सब मिलता है इस दिल्ली में

By Syedbelal

यूं तो भारत की यात्रा अपने आप में एक अनोखा अनुभव है और जब आप और इसकी राजधानी दिल्ली की सैर पर हों तो फिर आपकी यात्रा आपके लिए एक अमिट संस्मरण साबित होगी। भारत के सबसे बडे शहरों में से एक दिल्ली, प्राचीनता और आधुनिकता का सही संयोजन है, जो आज एक उद्योगिक गोले की जादुई दुनिया बन गई है। आज दिल्ली दो भागों में विभाजित है एक नई दिल्ली दूसरी पुरानी दिल्ली इस मंत्रमुग्ध कर देने वाली नई और पुरानी दिल्ली के मिश्रण में, आपको भारत का इतिहास, संस्कृति और विस्मित चीजों का संकलन मिलेगा।

दिल्ली कई साम्राज्यों की राजधानी रही और अगर आप इतिहास प्रेमी है, तो इसके इस वस्तृत इतिहास को देखने कम से कम एक बार दिल्ली जरुर आना होगा। यहाँ क़ुतुब मीनार से लेकर लाल किले तक कई ऐसी ऐतिहासिक स्मारकें, मस्जिदें, समाधियाँ और अन्य कई धरोहरें मौजूद है, जो अपने काल का सबूत देती है।

राजधानी दिल्ली देश का वो हिस्सा है जिसने हमेशा से ही विदेशी पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित किया है। आने वाले पर्यटकों के लिए दिल्ली में बहुत कुछ है। दिल्ली में जहां एक तरफ आपको लाल किला, क़ुतुब मिनार, बिरला मंदिर, दिल्ली हाट जैसे स्थान देखने को मिलेंगे तो वहीँ दूसरी तरफ आपको यहां कई सारे संग्रहालय और गैलरियां भी देखने को मिलेंगी।

तो आज हम आपको बताएंगे राजधानी दिल्ली के उन संग्रहालयों के बारे में जिनको देखने के बाद आप को यकीन हो जायगा की दिल्ली को यूं ही नहीं भारत का दिल कहते हैं।

पढ़ें - दिल्ली के दिल दहला देने वाले टूरिस्ट स्पॉट्स

इन्दिरा गाँधी संग्रहालय

इन्दिरा गाँधी संग्रहालय

अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान आप इस संग्रहालय की यात्रा अवश्य करिये। दिल्ली के सफदरजंग रोड पर स्थित ये संग्रहालय किसी ज़माने में पूर्व प्रधानमंत्री का निवास हुआ करता था। ये एक बेहद रोचक स्थान है जहां आपको राष्ट्रीय आन्दोलन, इन्दिरा गाँधी की व्यक्तिगत वस्तुयें और नेहरू-गाँधी परिवार के व्यक्तिगत पलों के चित्रों को देखने का अवसर प्राप्त होता है। साथ ही आप यहां श्रीमती गाँधी की हत्या के समय उनके द्वारा पहनी गई साड़ी, उनकी चप्पलों के साथ-साथ उनके झोले को भी देख सकते हैं।

वायु सेना संग्रहालय

वायु सेना संग्रहालय

दिल्ली के पालम वायु सेना स्टेशन (एयर फ़ोर्स स्टेशन) में स्थित वायु सेना संग्रहालय (एयर फ़ोर्स म्यूज़ियम) भारत में अपने तरह का एक है, जहाँ भारतीय सैन्य उड्डयन यादगारों का एक विशाल संग्रह है; इसके अलावा भारतीय वायु सेना का चमत्कारिक इतिहास भी दिखाया गया है जो उन बहादुर लोगों के लिए श्रद्धांजलि है जिन्होंने लड़ाईयां लड़ी और देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया। संग्रहालय को आंतरिक और बाहरी गैलरियो में बाँटा गया है और यहाँ वस्तुओं का आश्चर्यजनक संग्रह है।

किरण नादर कला संग्रहालय

किरण नादर कला संग्रहालय

कला का किरण नादर संग्रहालय पहला निजी कला संग्रहालय है जिसमें भारत एवं उप महाद्वीपों के कार्यों को प्रदर्शित किया गया है। यह संग्रहालय किरण नादर की पहल पर बनाया था जो स्वयं कलाकृतियों की एक उत्साही संग्रहकर्ता थीं। यह संग्रहालय अपने प्रदर्शनियों, प्रकाशनों, शैक्षिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से कला और संस्कृति के बीच अंतरंग संबंध चित्रित करने का प्रयास है। इस संग्रहालय का बढ़ता हुआ संग्रह मुख्य रूप से स्वतंत्रता के पश्चात बीसवीं शताब्दी के कलाकारों की कलाकृतियों एवं उनके समकालीन युवाओं द्वारा बनाई गई कलाकृतियों पर प्रकाश डालता है। यह संग्रहालय कलाप्रेमियों को देखने, सीखने एवं वर्तमान कलाकारों के कार्यों की तुलना करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराता है।

 संस्कृति केन्द्र संग्रहालय

संस्कृति केन्द्र संग्रहालय

संस्कृति केन्द्र संग्रहालय दिल्ली के मेहरौली-गुड़गाँव रोड पर आनन्दग्राम में स्थित है। संग्रहालय में तीन और संग्रहालय हैं जिनमें भारतीय टेराकोटा का संग्रहालय, प्रतिदिन के उपयोग की वस्तुओं का कला संग्रहालय, और वस्त्र संग्रहालय शामिल हैं।

प्रसाधन का सुलभ इंटरनेशनल संग्रहालय

प्रसाधन का सुलभ इंटरनेशनल संग्रहालय

क्या आपने शौचालय के एक संग्रहालय के बारे में सुना है? खैर, दिल्ली एक ऐसी जगह है जहाँ शौचालय के विकास के लिए समर्पित संग्रहालय है। इस संग्रहालय को सुलभ इंटरनेशनल नामक संस्था द्वारा चलाया जाता है, जो अपने आदर्श वाक्य को जनता को बताते हैं इस संस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों को शौचालय के इतिहास से रु-ब-रु कराना और उनमें जागरूकता लाना है। इस संग्रहालय में तथ्यों, चित्र और वस्तुओं, घटनाओं, कालक्रम में शौचालयों के विकास के वर्णन का एक दुर्लभ संग्रह है। यहाँ आने पर आपको बर्तन कक्ष, शौचालय फर्नीचर,और पानी के नल जो आज से 2500ईसा पूर्व (इस्तेमाल होते थे) के अलावा आज इस आधुनिक युग में इस्तेमाल होने वाले सामान यहाँ दिखेंगे।

 राष्ट्रीय संग्रहालय

राष्ट्रीय संग्रहालय

नई दिल्ली का राष्ट्रीय संग्रहालय देश के सबसे संग्रहालयों में से एक है। सन् 1949 में दिल्ली में स्थापित इस संग्रहालय में कई प्रकार की रोचक चीजें प्रदर्शित हैं। सांस्कृतिक मंत्रालय के अधीन कार्यरत यह मौलाना आज़ाद रोड और जनपथ के किनारे पर स्थित है और इसमें प्राग-ऐतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग की विभिन्न प्रकार की कलाओं को प्रदर्शित किया गया है। र्तमान में संग्रहालय मे दो लाख से ज्यादा भारतीय और विदेशी मूल की वस्तुयें प्रदर्शित हैं। इनमें 2700 ईसा पूर्व के टेराकोटा और काँस्य से बनी वस्तुयें, मौर्य काल की लकड़ी की मूर्तियाँ, दक्षिण भारत के विजयनगर की कालात्मक वस्तुयें, गुप्तकाल, सिन्धु घाटी सभ्यता,मुगलकाल,गन्धर्वकाल और कई अन्य समय की प्राचीन वस्तुयें प्रदर्शित हैं।

राष्ट्रीय रेलवे संग्रहालय

राष्ट्रीय रेलवे संग्रहालय

राष्ट्रीय रेलवे संग्रहालय दिल्ली के मुख्य आकर्षणों में से एक है। यह भारतीय रेल की विरासत का चित्रण प्रस्तुत करता है। यह संग्रहालय चाणक्यपुरी में स्थित है एवं इसकी स्थापना 1 फरवरी 1977 में हुई थी। इस संग्रहालय में भारतीय रेलवे से सम्बंधित 100 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। इसमें स्थिर एवं चालित मॉडल, सिगनल उपकरण, पुरातन फर्नीचर,ऐतिहासिक चित्र एवं इससे संबंधित साहित्य इत्यादि रखे हैं। यह संग्रहालय,यहाँ प्रदर्शित रेल के डिब्बों जिसमें वेल्स के राजकुमार का सैलून एवं मैसूर के महाराजा का सैलून शामिल है, के लिए भी जाना जाता है।

आजाद हिंद ग्राम

आजाद हिंद ग्राम

आजाद हिंद ग्राम पर्यटक परिसर को दिल्‍ली पर्यटन के द्वारा स्‍वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के सम्‍मान में बनवाया गया था। यह वह स्‍थल है जहां नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने देश छोड़ने से पहले सैनिकों को संबोधित किया था। इस स्‍मारक की संरचना उत्‍तर भारतीय स्‍थापत्‍य शैली में बनी है जो पांरपरिक शिल्‍पकौशल को बढ़ावा देती है। स्‍मारक को कोलकाता के कुछ कलाकारों के द्वारा डिजायन किया गया था जिसमें उन्‍होने नेताजी के विभिन्‍न मूड को अलग - अलग भित्ति चित्रों में दर्शाया है। संग्रहालय भी कैनवास पर चित्रित स्‍वतंत्रता संग्राम को दर्शाने वाले कुछ मुख्‍य लैंडमार्क में से है।

राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र

राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र

प्रगति मैदान के गेट नम्बर एक के समीप भैरव रोड पर स्थित विज्ञान संग्रहालय को सन् 1992 में नई दिल्ली के राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र के रूप में स्थापित किया गया था। यह संग्रहालय विज्ञान संग्रहालयों की राष्ट्रीय परिषद का हिस्सा है। विज्ञान, स्थापत्यकला और इतिहास विषयों के साथ इस संग्रहालय में आठ तल हैं। विज्ञान में रूचि रखने वाले लोगों के लिये, खासतौर पर युवा और विद्यार्थियों के लिये यहाँ स्थित विज्ञान गैलरी और विभिन्न प्रभाग इसको एक आदर्श गंतव्य बनाते हैं।

 गांधी स्‍मृति

गांधी स्‍मृति

गांधी स्‍मृति या गांधी स्‍मृति संग्रहालय वह स्‍थल है जहां राष्‍ट्रपिता, महात्‍मा गांधी ने अपने जीवन के आखिरी 144 दिन बिताएं थे। गांधी स्‍मृति को पहले बिड़ला हाउस या बिड़ला भवन के नाम से पुकारा जाता था। यह वह जगह भी है जहां 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्‍मा गांधी की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। इस घर को केंद्रीय सरकार ने 1971 में अपने कब्‍जे में कर लिया और आम जनता के लिए 15 अगस्‍त 1973 को खोल दिया। यहां एक शहीद स्‍तंभ भी है जहां महात्‍मा गांधी की गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी। संग्रहालय में महात्‍मा गांधी के जीवन और मृत्‍यु से संबंधित कई लेख भी दर्शाए गए हैं।

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