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उत्तराखंड का अलबेला गांव, मक्कों के भुट्टों से करते हैं सजावट

By Goldi

उत्तराखंड की गोद में कई खूबसूरत हिल स्टेशन छूपे हुए हैं, जिनमे से कुछ पर्यटकों के बीच बेहद ही लोकप्रिय है, और इनमे से कुछ ऐसे भी है, जो पर्यटकों की नजरों से दूर हैं,और प्राकृतिक नजारों से भरपूर।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के आसपास कई खूबसूरत स्थल है, जैसे धनौल्टी, मसूरी ,चकराता आदि। इसके अलावा एक और खूबसूरत जगह है, जिसे आप मसूरी घूमते हुए घूम सकते हैं। यकीन मानिए इस जगह के नजारे देख आप खुद को रोक नहीं पाएंगे और बार बार इस जगह आना पसंद करेंगे।

ज्यादा बात को ना घुमाते हुए आपको आज हम बताते हैं, मसूरी से महज दस किमी की दूरी पर स्थित जुड़वां गांव सैंजी और भटोली के बारे में, जोकि पर्यटकों के बीच मक्के का गांव नाम से प्रसिद्ध है।

कहां है सैंजी और भटोली?

कहां है सैंजी और भटोली?

मसूरी के प्रसिद्ध केम्पटी फॉल से यह गांव करीबन पांच किमी दूर स्थित है। यह गांव यमनोत्री की और जाने वाले रास्ते पर मौजूद है।

कैसे पहुंचे मक्के के गांव सैंजी-भटोली में?

कैसे पहुंचे मक्के के गांव सैंजी-भटोली में?

सैंजी-भटोली का निकतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा देहरादून है, जहां से पर्यटक कैब या फिर टैक्सी के जरिये आसानी से पहुंच सकते हैं।

मक्के के गांव सैंजी-भटोली मसूरी के कैम्पटी फॉल से करीबन पांच किमी की दूरी पर स्थित है, यह गांव यमनोत्री की और जाने वाले रास्ते पर मौजूद है। यह गांव गढ़वाल इंग्लिश मीडियम स्कूल के बायीं ओर स्थित है।

सैंजी और भटोली कैसे बना मक्का का गांव?

सैंजी और भटोली कैसे बना मक्का का गांव?

400 लोगो की आबादी वाले इस गांव में मक्के के भुट्टे को घरों के बाहर सूखने के लिए टांगा जाता है। पहली नजर में देखने में लगेगा की, और गांव बस मक्का के भुट्टों से सजा हुआ है। इस गांव में अधिकतर घर देवदार के पेड़ से बने हुए हैं।

आखिर क्यों घर के बाहर टाँगे जाते हैं मक्का के भुट्टे?

आखिर क्यों घर के बाहर टाँगे जाते हैं मक्का के भुट्टे?

स्थानीय लोगों के मुताबिक, घर के बाहर मक्के के दाने सूखने के लिए टाँगे जाते हैं, ताकि अगली फसल की बुवाई के बीज तैयार किये जा सके। इस गांव में आपको घर के दरवाजे से लेकर खिड़की, छत की मुंडेर आदि सब जगह सिर्फ मक्के की भुट्टों की लडियां ही नजर आयेंगी।

इस गांव में मक्के के अलावा, गेंहू, चावल ,सब्जियां आदि भी उगायीं जाती है। इस गांव में छोटी सी नहर भी है, जो गांव की खेती के काम आता है, साथ ही गांव में पानी की जरूरत भी पूरा करता है।

गांव का चक्कर लगाये

गांव का चक्कर लगाये

महज 400 की आबादी वाले इस गांव को आप पैदल घूम सकते हैं, आप पाएंगे की यह बेहद ही खूबसूरत है। इस गांव की खास बात यह है कि, आप यहां घरों के बीच में किसी भी दूकान या बाजार को नहीं पाएंगे, साफ़ सुथरे गांव में आपको मक्के की लड़ी से सजे हुए घर ही दिखाई देंगे।

गांव वालों से बातचीत करें

गांव वालों से बातचीत करें

जी हां, इस गांव में आखिर मक्के की लडियां क्यों लगाई जाती है, कबसे लगाई जा रही है, आदि के बारे में स्थानीय गाँवों वालों से आप बात कर सकते हैं। बेहतर आप उनसे इजाजत लेकर ही उनके घर की तस्वीरें निकालें और उनसे विनम्रता से बात करें।

गांव के आसपास के खूबसूरत नजारे

गांव के आसपास के खूबसूरत नजारे

चारों ओर पहाड़ियों से घिरे हुए इस गांव में आप प्रकृति के खूबसूरत नजारों को देख सकते हैं खेत खलियानों से होते हुए ताज़ी हवा को महसूस कर सकते हैं। इस गांव के आसपास कोई होटल या दुकान नहीं है, बेहतर होगा आप अपना खाना पीना लायें।

ट्रेवल टिप्स

ट्रेवल टिप्स

-इस गांव में कोई भी दूकान नहीं है, बेहतर होगा आप अपना खाना पीना साथ लेकर ही जायें।
-गांव में सभी ज्यादातर हिंदी में ही बात करते हैं।
-गांव का दौरा करते समय गांव वालों से विनम्रता से पेश आयें। अगर आप उनके घरों की तस्वीर निकलना चाहते हैं, तो उनसे इजाजत अवश्य लें।

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