चाहे बूंदाबांदी हो या फिर मई की तपती दोपहरी, सावन से लेके भादो तक और गर्मी से लेके जाड़े तक कबाब कभी भी खाए जा सकते हैं। हिन्दुस्तान में जहां कुछ लोग कबाब को स्टार्टर के तौर पर लेते हैं तो वहीँ कुछ लोग ऐसे भी है जिनके मेन कोर्स में सिर्फ और सिर्फ कबाब होता है। आज जहां एक तरफ नॉनवेज लोगों के बीच शामी कबाब, गलावटी कबाब, रेशमी कबाब, सीक़ कबाब, पत्थर के कबाब, पुदीने के कबाब, क़लमी कबाब और टुंडे के कबाब एक खास पहचान रखते हैं तो शाकाहारी लोग भी पनीर के कबाब, सोयाबीन कबाब, कटहल और मूली के कबाब पर अपनी जान छिड़कते हैं।
तो आगे बढ़ने से पहले आपको ये बताते चलें कि आख़िर कबाब होते कया हैं। ज्ञात हो की कबाब फिलहाल एक भारतीय व्यंजन है जो अरब, ईरान इराक और अफगानिस्तान होते हुए भारत पहुंचा है। यह प्रायः मांसाहारी होता है, किंतु कुछ लोग अब शाकाहारी कबाब भी बनाने लग गए हैं। भारत में कोई ऐसा राज्य कोई ऐसा शहर न होगा जहां आपको कबाब नहीं मिलेंगे। भारत के हर शहर में कबाब का अपना एक अलग ही जयका है जो अपने आप में ख़ास है।
प्रायः ये देखा गया है कि यात्रा और खाना एक दूसरे के पर्यायवाची हैं आज अपने इस आर्टिकल के जरिये हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं भारत के उन ख़ास शहरों से जहां के कबाबों के जायके का लोहा पूरी दुनिया मानती है। साथ ही हम आपको ये भी बताएँगे कि आखिर आपको इन शहरों में परोसी जाने वाली कबाब का जयका क्यों लेना चाहिए। तो चलिए अब आपको बताते हैं कि हिन्दुस्तान में उम्दा और बेहतरीन कबाब आप कहां कहां खा सकते हैं।

दिल्ली
देश की राजधानी दिल्ली वो स्थान है जो भारतीय संस्कृति और मुग़ल सभ्यता का मेल्टिंग पॉट है। गौरतलब है कि दिल्ली का खाना कल्चर क्रॉस ओवर को दर्शाता है इसी वजह से यहां आपको कई उम्दा किस्म के कबाबों का जयका चखने को मिलेगा। अच्छे कबाब की तलाश में आप पुरानी दिल्ली,जामा मस्जिद और चांदनी चौक जा सकते हैं। हमारा दावा है कि इन कबाबों जैसा टेस्ट आपको और कहीं नहीं मिलेगा।

हैदराबाद
आज हैदराबाद आंध्र प्रदेश और नवनिर्मित तेलेंगाना राज्य की राजधानी है। आपको बता दें कि इस खूबसूरत शहर की स्थापना कुतुब शाही वंश के शासक मोहम्मद कुली कुतुब शाही ने 1591 में की थी। बात जब नॉनवेज भोजन पर हो और ऐसे में हम हैदराबाद का ज़िक्र न करें तो बात अधूरी रह जाती है|आज हैदराबाद को निजाम और उनके किचन ने भी एक ख़ास पहचान दी है।यहां मुगलिया व्यंजनों ख़ास तौर से कबाब और गोश्त पर शुद्ध दक्षिण भारतीय मसालों से जो जायका निकल के आया वो अपने आप में बेमिसाल है।आपको बता दें कि जायके के मामले में यहां के कबाब उत्तर भारत से अलग हैं। यहां आकर आप हैदराबाद हाउस, सिद्दीकी और पैराडाइस के कबाब ज़रूर खाइये।

लखनऊ
जैसे ही हम कबाब की कल्पना करते हैं तो कुछ बातें खुद-ब-खुद हमारे ज़हन में आ जाती हैं। इन्हीं बातों में शुमार होता है टुंडे के कबाब का जिसके कारण उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को देश के अलावा पूरी दुनिया में एक ख़ास पहचान मिली है। तमीज़ के मरकज़ और तहज़ीब के इस शहर में उन लोगों के लिए बहुत कुछ है जो नॉनवेज ओर उम्दा जायके की शौक़ीन हैँ। लखनऊ में आप अमीनाबाद, चौक, नक्खास, हज़रतगंज , कैसरबाग और अकबरी गेट जैसे स्थनों पर उम्दा कबाब का जयका ले सकते हैं।

मुंबई
खाने पर बात हो और हम मायानगरी का वर्णन का करें तो बड़ी नाइंसाफी होगी। खाने के मामले में इस शहर की अपनी एक अलग और ख़ास स्टाइल हैं। यहां आपको ईरान और लेबनानके ख़ास कबाब मिलेंगे जो आपने पहले कभी नहीं खाए होंगे। यहां शहर में आपको कई छोटे छोटे इरानी कैफे देखने को मिलेंगे जो अपने यहां कई ख़ास नॉनवेज पकवान परोसते हैं। तो यदि आपको कबाबों का एक बिलकुल नया जयका लेना है तो मुंबई में आपका स्वागत है।

कोलकाता
यदि भारत को सांस्कारिक रूप से मजबूत और इसकी जडें पारंपरिक रूप से गहरी मानी जाती हैं तो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को देश का दिल माना जाता है। इस शहर को पहले कलकत्ता के नाम से जाना जाता था जो अंग्रेजों के ज़माने से ही हमारे देश का सांस्कृतिक केंद्र रहा है। अपने कल्चर ट्रेडिशन के अलावा कोलकाता खाने के मामले में भी अपनी ख़ास पहचान रखता है। कोलकाता आने के बाद आप यहां के चपली कबाब खा लुत्फ़ लेने न भूलें।



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