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जितना चढ़ावा चढ़ाएंगे उसका दस गुना वापस करते हैँ तिरुपति के बालाजी

By Staff

तिरुपति आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले के पूर्वी घाटों की तलहटी में स्थित तथा सांस्कृतिक रूप से भारत के सबसे अधिक समृद्ध शहरों में से एक है। जिसे अपने यहां स्थित तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर के कारण जाना जाता है। तिरुपति भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में दर्शनार्थी यहां आते हैं। समुद्र तल से 3200 फीट ऊंचाई पर स्थिम तिरुमला की पहाड़ियों पर बना श्री वैंकटेश्‍वर मंदिर यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है।

कई शताब्दी पूर्व बना यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्प कला का अदभूत उदाहरण हैं। आपको बता दें शहर में ये मंदिर तिरुमाला पहाड़ी पर स्थित है जबकि नीचे की ओर शहर है। तिरुमाला को अगर भाषा की दृष्टी से देखें तो तिरु का अर्थ होता है पवित्र और माला का अर्थ है पहाड़ियां। CHECK : तिरुपति के चुनिंदा होटल

आज तिरुमाला पहाड़ी पर 7 चोटियाँ हैं जो आदिशेष के 7 सरों जहां भगवान विष्णु वास करते हैं उनको दर्शाती है। आज अपने इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको अवगत कराएंगे कि कैसे आप तिरुपति में दर्शन कर सकते हैं। तो अब देर किस बात की आइये जानें क्या ख़ास है तिरुपति में।

कैसे जाएं तिरुपति

कैसे जाएं तिरुपति

आज पूरे देश से तिरुपति फ्लाइट के माध्यम से जुड़ा हुआ है। देश के सभी शहरों से आपको तिरुपति के लिए फ्लाइट मिल जाएंगी। यदि दूरी की बात करी जाये तो आज हैदराबाद से तिरुपति की दूरी 551 किलोमीटर, चेन्नई से तिरुपति १३५ किलोमीटर और बैंगलोर से तिरुपति की दूरी 248 किलोमीटर है। यदि आप चाहें तो ट्रेन के माध्यम से तिरुपति की यात्रा करी जा सकती है। रेलवे भी हैदराबाद , चेन्नई, बैंगलोर जैसे शहरों को तिरुपति से जोडती है। यदि आप चाहें तो बस द्वारा भी तिरुपति की यात्रा कर सकते हैं। बैंगलोर, चेन्नई, मुंबई और हैदराबाद में आज कई ट्रैवल एजेंट आपको तिरुपति तक बस सेवा देते हैं।

तिरुमाला वेंटकेश्वरा मंदिर

तिरुमाला वेंटकेश्वरा मंदिर

श्री वेंकटेश्वर मंदिर प्राचीन और प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों में से एक है। यह वेंकट तिरुमाला पहाड़ी की 7 वीं चोटी पर स्थित है। श्री स्वामी पुष्करिणी नदी के दक्षिण में स्थित इस मंदिर का निर्माण पारंपरिक द्रविड़ियन वास्तुशैली में किया गया है। मंदिर का कुल क्षेत्रफल 2.2 एकड़ है तथा यहाँ भगवान वेंकटेश्वर की 8 फुट ऊंची मूर्ति है। मूर्ति सोने के ढलुएं गुंबद जिसे आनंद निलय दिव्य विमान कहा जाता है के नीचे रखी गई है तथा मूर्ति की आँखें कपूर के तिलक से ढंकी हुई हैं तथा यह कीमती और कुछ कम कीमती रत्नों से सुसज्जित है। परंपरा के अनुसार श्री वेंकटेश्वर मंदिर के दर्शन से पहले वराहस्वामी मंदिर की सैर करनी चाहिए।

प्रवेश के टिकट

प्रवेश के टिकट

चूँकि यहां हर रोज़ हजारों भक्त बालाजी के दर्शन के लिए आते हैं इस कारण यहां तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम द्वारा दर्शन के विशेष टिकटों का प्रबंध किया गया है। पूरा मंदिर घूमने के इच्छुक भक्त विव्या दर्शन का टिकट ले सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ जो भक्त जल्दी में हैं उनके लिए शीघ्र दर्शन के टिकट हैं।भक्तों की सुविधा के लिए यहां ऑनलाइन टिकटों का भी प्रबंध किया गया है जिन्हें भक्त मंदिर कमेटी की आधिकारिक वेबसाईट पर जाकर ले सकते हैं।

मंदिर के देवी देवता

मंदिर के देवी देवता

जैसा कि हम आपको पहले बता चुके हैं ये मंदिर भगवान विष्णु के एक रूप वेंटकेश्वरा को समर्पित है जो भगवान विष्णु के एक रूप और मंदिर के मुख्य देवता हैं। इन्हें यहां ऊर्जा का मुख्य स्रोत भी कहा जाता है। इसके अलावा यहां कौतुक बेरम और स्नापना बेरम को भी मुख्य देवता के रुप में पूजा जाता है।

मंदिर की गतिविधियां

मंदिर की गतिविधियां

प्रसाद के बिना किसी भी मंदिर में दर्शन को अधूरा माना जाता है। तिरुपति लड्डू का शुमार यहां के प्रमुख प्रसाद के तौर पर होता है जोकि आने वाले भक्तों के बीच खासा लोकप्रिय भी है । इसके अलावा मुंडन का भी शुमार यहां की मुख्य गतिविधियों में होता है। यहां के विषय में कहा जाता है कि मुंडन के बाद बालाजी भक्तों को खुशहाली और सुखी होने का आशीर्वाद देते हैं। यहां आपको जगह जगह दान पेटिकाएँ भी दिखेंगे इनके विषय में कहा जाता है कि आप बालाजी के दर पर जो भी देंगे आपको उसका दस गुना मिलेगा। यहां लोग अपने वजन के बराबर भी चढ़ावा देवता को चढ़ाते हैं।

सात पहाड़ियां

सात पहाड़ियां

सात पहाड़ियां जिन्हें सप्तगिरि के नाम से जाना जाता है, तिरुपति की आत्मा हैँ। यहां हर एक पहाड़ का अपना एक अलग महत्त्व है। आपको बता दें कि यहां के सारे पहाड़ भगवान विष्णु से ही सम्बन्धित हैं।

नियम

नियम

भारत के हर मंदिर की तरह तिरुपति के भी आपने कुछ ख़ास नियम हैं।
1 - सही कपडे पहन के यहां आएं।
2 - मदिरा यहां पूर्णतः वर्जित है।
3 - यहां आकर आप किसी भी प्रकार का मांस , मछली अंडा नहीं खा सकते।
4 - यहां महिलाऐं बालों में फूल नहीं लगा सकती, यहांऐसा माना जाता है कि फूल सिर्फ भगवान के लिए हैं।
5 - मंदिर परिसर के आस पास यहां थूकना और मॉल मूत्र त्याग वर्जित है।
6 - यहां मंदिर में दर्शन के समय फोन, कैमरा, पेजर, विडियो कैमरा लेना मना है।
7 - यहां आने वाली महिलाओं को निर्देशित किया जाता है कि वो साड़ी पहने और जब भी मंदिर में प्रवेश करें अपना सर ढक के आएं।

आसपास के मंदिर

आसपास के मंदिर

यहां आने वाले पर्यटक और भक्त मुख्य मंदिर के अलावा आसपास स्थित मंदिरों जैसे अवनाक्षम्मा मंदिर, गोविंदराजा स्वामी मंदिर, इस्कॉन भगवान कृष्ण मंदिर, हनुमान मंदिर,कोदंडा राम स्वामी मंदिर,परशुरामेश्वर मंदिर,कपिला तीर्थम जैसे मंदिरों की यात्रा अवश्य करें।

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