हर मंदिर में भक्तों के बीच भगवान का प्रसाद वितरित किया जाता है। किसी मंदिर में मोदक तो कहीं हलवा बांटा जाता है। कहीं भगवान को अर्पित 56 भोग को ही प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांटा जाता है। लेकिन भारत में सबसे अधिक महिमा जिस मंदिर के प्रसाद की होती है, वह है तिरूपति का लड्डू।

हर एक का पसंदीदा तिरूपति लड्डू की उम्र एक या दो नहीं बल्कि पूरे 308 साल हो चुके हैं। तिरुपति का लड्डू GI टैग भी प्राप्त कर चुका है।
श्री वारी लड्डू भी है नाम
विश्व के सबसे अमीर भगवान वेंकटेश्वर का प्रसाद यह विशेष लड्डू मंदिर आने वाले हर भक्त को भेंट में प्रदान की जाती है। मुख्य रूप से इस लड्डू को आटा, चीनी, घी, तेल, इलायची और सूखे मेवों को मिलाकर बनाया जाता है। तिरुपति लड्डू को श्री वारी लड्डू के नाम से भी जाना जाता है, जिसकी शुरुआत 308 साल पहले हुई थी। इस लड्डू को हाथ में लेते ही हर भक्त खुद को धन्य महसूस करने लगता है।
लड्डू से जुड़ी लोककथा

श्री वारी या तिरुपति के लड्डू से जुड़ी लोककथा के अनुसार एक बार, भगवान वेंकटेश्वर भगवान विष्णु के भक्तों की शादी के लिए धन का संचय करने के लिए पृथ्वी पर आए थे। इस दौरान, स्थानीय एक महिला ने उन्हें चावल का आटा और गुड़ मिलाकर बनायी गयी एक स्वादिष्ट मिठाई प्रस्तुत किया। उनकी मेहनत के बदले में, भगवान वेंकटेश्वर ने महिला से कहा कि उसे मंदिर में शाश्वत भेंट मिलेगी। इस प्रकार, भगवान वेंकटेश्वर को प्रसाद के रूप में लड्डू के अर्पण की परंपरा की शुरुआत हुई जो आज भी जारी है। लेकिन प्रारंभ से ही लड्डू का ऐसा स्वरूप नहीं था, जैसा अभी है। लड्डू के स्वरूप में कई बार परिवर्तन भी हुआ है।
पहला लड्डू कब बना

तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाया जाने वाला लड्डू पहली बार 2 अगस्त 1715 को भक्तों में वितरित किया गया था। कल्याणम अयंगर को तिरुपति लड्डू बनाने का श्रेय दिया जाता है। मंदिर में वितरित होने वाला 300 ग्राम लड्डू की कीमत करीब ₹25 होती है लेकिन तिरुपति तिरुमाला मंदिर प्रशासन (TTD) इसे कई बार भक्तों को ₹10 प्रति पीस की दर से भी देती है। लड्डूओं की मांग को नियंत्रित करने के लिए ही मंदिर प्रशासन पेमेंट मिलने के साथ ही भक्तों को टोकन प्रदान करती है। तिरुपति मंदिर की आय के प्रमुख श्रोतों में लड्डू की बिक्री भी शामिल हैं।
लड्डूओं की मांग
त्योहारों के समय में तिरुपति मंदिर के प्रसादम् की मांग भी काफी अधिक बढ़ जाती है। खास तौर पर ब्रह्मोत्सव के दौरान इन लड्डूओं की बिक्री सारे रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए 24 घंटों तक होती रहती है। साल 2015 में सर्वाधिक 1.8 मिलियन लड्डू बेचे गये थे जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
प्रतिदिन लड्डू बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
1. मूंगफली का आटा - 10 टन
2. काजू - 700 किलो
3. शुद्ध घी - 500 लीटर
4. चीनी - 10 टन
5. इलायची - 150 किलो
6. मिश्री - 500 किलो
7. किशमिश - 540 किलो
तिरुपति लड्डू बनाने की सीक्रेट विधि
पहले तिरुपति लड्डूओं को कारीगर हाथों से बनाते थे लेकिन अब स्वचालित मशीनों से लड्डूओं को तैयार किया जाता है। सबसे पहले अनाज के आटा और कच्चे माल को स्वचालित मशीन में डालकर मिलाया जाता है। इसमें मशीन खौलते हुए शुद्ध घी को मिलाता है। मशीन लड्डूओं के लिए बुंदियों को दूसरी मशीनों में भेज देता है। यहां लड्डू के मिश्रण में काजू, इलायची, किशमिश और चीनी की चाशनी मिलायी जाती है। सभी मिश्रणों के मिल जाने के बाद स्वचालित मशीन लड्डूओं को आकार देकर सीधे काउंटर पर भेज देता है। इसके बाद भक्तों में इन लड्डुओं को वितरित किया जाता है।
तिरुपति के लड्डूओं की उम्र 200, 300 साल हो या 308...इनकी प्रसिद्धी अगले 500 सालों तक बढ़ती रहे!



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