केरल को ईश्वर की धरती कहा जाता है। इस जगह पर प्रकृति की हर देन आपको देखने को मिलेगी जिसमें भारत के बेहतरीन पक्षी अभ्यारण्य भी शामिल हैं। केरल राज्य का 28 प्रतिशत हिस्सा जंगल से घिरा है और यहां के अभ्यारण्य में आपको स्वदेशी और प्रवासी पक्षियों की 507 से ज्यादा प्रजातियां देखने को मिलेंगीं।
इन जंगलों में आपको खुद पक्षी ही खूबसूरत जगहों तक लेकर जाएंगें। प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए अपने साथ कैमरा जरूर रखें। तो चलिए एक नज़र डालते हैं केरल के बेहतरीन पक्षी अभ्यारण्यों पर जो आपके मन, शरीर और आत्मा को तरोताज़ा कर देंगें।

कुमारकोम पक्षी अभ्यारण्य
इसे वेंबानंद पक्षी अभ्यारण्य के नाम से भी जाना जाता है। ये कुमारकोम बैकवॉटर्स में वेंबानाद झील के साथ स्थित है। प्रवासी पक्षियों को ये जगह बहुत पसंद है। इसका प्रबंधन केरल पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जाता है।
इस जगह आप हाउसबोट और मोटरबोट का मज़ा भी ले सकते हैं। इस अभ्यारण्य में आप उल्लू, हेरॉन्स, वॉटर डक, वॉटरफाउल, कुक्कू और प्रवासी साइबेरियन बत्तख देख सकते हैं। जून से अगस्त और नवंबर से फरवरी के बीच इस अभ्यारण्य आने का सबसे सही समय रहता है।

थट्टेकड़ पक्षी अभ्यारण्य
इसे डिज़ाइन करने वाले डॉक्टर सलीम अली देश के मशहूर पक्षी विज्ञानी थे। थट्टेकड़ पक्षी अभ्यारण्य 25 स्कवायर किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और इस जगह कई जंगल, नदियां और मैदान हैं।
इस पक्षी अभ्यारण्य में दुर्लभ और प्रवासी पक्षियों की 300 से भी ज्यादा प्रजातियां देखने को मिलेंगीं जिनमें मालाबार हॉर्नबिल्स, फेयरी ब्लूबर्ड्स, ग्रे हैडेड फिशिंग ईगल्स, बारबेट्स, बी ईटर्स और ग्रे हॉर्नबिल्स आदि शामिल हैं। अक्टूबर से फरवरी के बीच यहां आने का सबसे सही समय है।Pc:Siyad A Karim

मंगलावनम पक्षी अभ्यारण्य
प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए ये जगह बेस्ट मानी जाती है साथ ही पक्षी प्रेमियों को भी अपने जीवन में एक बार यहां जरूर आना चाहिए। प्रवासी पक्षियों को मैंग्रोव के पेड़ और भी ज्यादा आनंद प्रदान करते हैं। यहां पर 32 प्रजातियों के 194 पक्षियों का घोंसला है। इस अभ्यारण्य के आसपास का नज़ारा आपको मंत्रमुग्ध और चकित कर देगा।
इस अभ्यारण्य में आप मार्श सैंडपाइपर, ब्राह्मनी काइट, रेडशांक, ग्रीनशांक, वाइट ब्रेस्टेड वॉटरहैन आदि देख सकते हैं। इस अभ्यारण्य आने का सबसे सही समय जनवरी के मध्य से मार्च तक का है। इस दौरान ये जगह हरी-भरी रहती है।Pc:Augustus Binu

कदालुंदी पक्षी अभ्यारण्य
ये अभ्यारण्य कदालुंदी पुज्हा नदी के तट पर बना है और ये नदी अरब सागर से जाकर मिलती है। इस खूबसूरत अभ्यारण्य में स्वदेशी पक्षियों की 100 से भी ज्यादा और प्रवासी पक्षियों से 60 प्रजातियां देखने को मिलेंगीं। यहां के खूबसूरत जंगलों की सैर के लिए बोट टूर की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा आप यहां व्हिमब्रेल्स, ब्राह्मनी, सैंडपाइपर्स, कॉरमोरेंट्स, गुल्स और टर्न आदि देख सकते हैं। दिसंबर ये अप्रैल के बीच यहां आने का सही समय है।

छिम्मिनी वन्यजीव अभ्यारण्य
छिम्मिनी के उष्णकटिबंधीय जंगलों में कई वनस्पति और जीव देखने को मिलेंगें। इसे छिम्मिनी वन्यजीव अभ्यारण्य के नाम से जाना जाता है और इसे छिम्मोनी वन्यजीव अभ्यारण्य भी कहा जाता है। छिम्मिनी नदी के बांध के पास स्थित इस अभ्यारण्य का सौंदर्य देख पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। 1984 में स्थापित ये जगह लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है और ये अभ्यारण्य पीची वाज्हानी अभ्यारण्य का हिस्सा है। इसे दुनिया के टॉप 25 बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट में शामिल किया गया है। इस पार्क में आपको 160 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां देखने को मिलेंगीं।
Pc: Manojk

नेय्यार वन्यजीव अभ्यारण्य
पश्चिमी घाट के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में हिस्से में 128 स्कवायर किमी में नेय्यार वन्यजीव अभ्यारण्य फैला है। 1985 के बाद ये अभ्यारण्य सबसे सुव्यवस्थित अभ्यारण्यों में से एक है। इसे 1958 में स्थापित किया गया था। नेय्यार झील पर बोटिंग का मज़ा भी ले सकते हैं।
इस जगह पर आपको 176 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां देखने को मिलेंगीं। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर रह किसी शांत और खूबसूरत जगह पर घूमने के लिए ये अभ्यारण्य सबसे बेहतर माना जाता है।Pc:Shehnad

करिमपुज्हा नेशनल पार्क
इसे अमारामबालम वन्यजीव अभ्यारण्य के नाम से भी जाना जाता है। ये पार्क नीलगिरि पर्वत पपर 230 स्कवायर किमी में फैला है। ये जगह हरियाली से भरी हुई है। नीलगिरी बायोस्फेयर रिज़र्व के साथ साइलेंट वैली और मुकुरथी नेशनल पार्क का ये अहम हिस्सा है।
रोबर्ट विट ने इस पार्क की खोज 1847 में की थी और आज 170 सालों बाद भी इस जगह का आकर्षण और सौंदर्य कम नहीं हुआ है। इस पार्क में वनस्पति की 858 से भी ज्यादा प्रजातियां और पक्षियों की 292 प्रजातियां देखने को मिलेंगीं जिनमें ब्लू विंग्ड पैराकीट, वाइट बेलिड ब्लू फ्लाईकैचर, नीलगिरि पिपिट और नीलगिरि चुड पिजन आदि शामिल हैं।
Pc: N A Nazeer

मथिकेट्टन शोला नेशनल पार्क
केरल के इडुक्की जिले में पुपरा गांव में 12.82 स्कवायर किमी के क्षेत्रफल में फैला है मथिकेट्टन शोला नेशनल पार्क जोकि भारत के सबसे ज्यादा आकर्षिक नेशनल पार्कों में से एक है। इस पार्क में घुसने के बाद आप यहां की खूबसूरती में खो जाएंगें।
इस पार्क में कई एडवेंचार ट्रेल्स भी हैं और यहां बायोडाइवर्सिटी भी प्रचुरता में पाई जाती है। वाइल्डलाइफ फोटाग्राफर्स के लिए ये पार्क स्वर्ग से कम नहीं है।Pc:Arayilpdas

अनामुदी शोला नेशनल पार्क
अनामुदी शोला नेशनल पार्क इडुक्की के पश्चिमी घाट के संरक्षित क्षेत्र के साथ स्थित है अनामुदी शोला नेशनल पार्क। 7.5 स्कवायर किमी के क्षेत्रफल में घिरा ये पार्क इदिवारा शोला, पुल्लार्दी शोला और मन्नावन शोला में शामिल है।
इस जगह को केरल के वन और वन्यजीव विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है। अनामुदी शोला नेशनल पार्क, पंपादुम शोला नेशनल पार्क, कुरिंजीमाला अभ्यारण्य, छिन्नार वन्यजीव अभ्यारण्य, ईराविकुलम नेशनल पार्क और मथिकेट्टन शोला नेशनल पार्क से घिरा है। अन्नामलाई उप-क्लस्टर को हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया गया था। इस पार्क में पक्षियों की 76 के करीब प्रजातियां और वन्जीवों की प्रजातियां देखने को मिलेंगीं।Pc:Soumya benarjee

पंपादुम शोला नेशनल पार्क
केरल के सभी राष्ट्रीय उद्यानों में से पंपादुम नेशनल पार्क सबसे छोटा है। तमिल में पंपादुम का मतलब है ‘वह स्थान जहां सर्प नृत्य करते हैं'। इस पार्क में आपको वर्नल हैंगिंग पैरेट, नीलगिरि फ्लाईकैचर, ब्लू कैप्ड रॉक थ्रश, नीलगिरि चुड पिजन आदि देखने को मिलेंगें।
ये खूबसूरत जगह अपने प्राकृतिक सौंदर्य से आपको आश्चर्यचकित कर देगी। नीले आकाश, ताजी हवा और हरे-भरे घास के मैदान से घिरी से जगह बेहद खूबसूरत है।Pc:Jaseem Hamza



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