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धर्मशाला के खास ऐतिहासिक स्थल, देखें जरुर

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हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में स्थित धर्मशाला एक बेहद ही खूबसूरत पर्यटन स्थल है। जब भी बात धर्मशाला की होती है तो दिमाग धौलाधर रेंज पर्वत, दलाई लामा का घर, तिब्बती मठ ,ट्रेकिंग ही आते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि, धर्मशाला के पास स्थित कंगड़ा घाटी प्राकृतिक नजारों के अलावा एक बेहद ही समर्द्ध इतिहास से परिपूर्ण है,जिसमें प्रभावशाली स्मारक और किले शामिल हैं। इस खूबसूरत से शहर के आसपास  कई सालों तल कटोच राजवंश ने शासन किया, जिसके बाद यह मुगलों ने और फिर अंग्रेजों की इस जगह हुकुमत रही।

कंगड़ा घाटी में लगातार शासकों द्वारा निर्मित कई प्रभावशाली स्मारक , किले और मंदिर हैं, जो आपको अतीत में वापस ले जाते हैं। यदि आप धर्मशाला या कंगड़ा घाटी जा रहे हैं, तो यहां पांच ऐतिहासिक स्मारक हैं, जिन्हें आपको अवश्य देखना चाहिए

बैजनाथ मंदिर

बैजनाथ मंदिर

Pc: Ashishverma.pu

12वीं शताब्दी में निर्मित बैजनाथ मंदिर, कंगड़ा घाटी के सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण दो भाइयों ने मिलाकर कराया था, बैजनाथ मंदिर भगवान शिव को वैद्यनाथ-चिकित्सक के रूप में समर्पित है।

इस मंदिर में स्थित अर्धनारीश्वर शिवलिंग देश के विख्यात एवं प्राचीन ज्योती लिंग में से एक है। जिसका इतिहास लंकाधिपति रावण से जुड़ा है यूं तो वर्ष भर प्रदेश के देश-विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक इस प्राचीन मंदिर में विद्यमान प्राचीन शिवलिंग के दर्शन के साथ-साथ इस क्षेत्र की प्राकृतिक सौदर्य की छटा का भरपूर आनंद लेते है। भगवान शिव को समर्पित मंदिर की वास्तुकला बेहद वैभवशाली है, मंदिर के भीतर कई देवी देवतायों की मूर्ति स्थापित है। शिवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में श्रद्धालुयों की खासा भीड़ रहती है। तो वहीं दसहरा के समय जहां पूरे उत्तर भारत में रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन यहां रावण को सम्मान दिया जाता है।

कांगड़ा किला

कांगड़ा किला

Pc:Ishan Dewan 2

कांगड़ा किले को नगर कोट के नाम से भी जाना जाता है। जिसका निर्माण काँगड़ा के मुख्य साही परिवार ने कराया था। ये काँगड़ा शहर से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है , ये किला जितना सुन्दर है उतना ही इसका ऐतिहासिक महत्त्व भी है। इस किले का वर्णन महाभारत में भी है साथ ही ये भी कहा गया है की जब महान यूनानी शासक अलेक्जेंडर ने यहाँ आक्रमण किया तब भी ये किला यहाँ मौजूद था। ये किला 4 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। ये किला आज जहाँ स्थित है उसे पुराना काँगड़ा भी कहा जाता है। यहाँ आने वाले पर्यटक इस किले में वॉच टावर , लक्ष्मी नारायण मंदिर और आदिनाथ मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं।

नूरपुर किला

नूरपुर किला

Pc:Viraat Kothare
नूरपुर किला नूरपुर किला 10 वीं शताब्दी में पठानिया कबीले द्वारा बनाया गया था, जो कि उस समय के दौरान यहाँ के शासक थे। यह किला बेहद अद्भुत है। क्षतिग्रस्त होने के बावजूद भी किले की कला शैली और इतिहास अपने आप में बेहद रोचक है। किले की दीवारें अब भी इतिहास की याद दिलाती है। किला परिसर काफी बड़ा है तथा यहां एक भव्य मंदिर के भी खंडहर मौजूद है। किले को देखकर लगता है कि यह किला हिमाचल का शायद सबसे बड़ा किला रहा है।

सेंट जॉन चर्च इन वाइल्डरनेस

सेंट जॉन चर्च इन वाइल्डरनेस

सेंट जॉन चर्च सेंट जॉन चर्च 'लॉर्ड एल्गिन' की याद में बनवाया गया था। 1852 में स्थापित यह चर्च वास्तुकला की नियो-गॉथिक शैली में बनाया गया है। इस चर्च की व्यापक रूप से प्रशंसा इसकी बेल्जियम के रंगीन कांच की खिड़कियों के लिये की जाती है जो भारत के तत्कालीन वाइसराय की पत्नी लेडी एल्गिन ने दान किये थे। इस चर्च का क्लॉक टॉवर 1905 में आए बड़े भूकंप में नष्ट हो गया जिसके बाद इंग्लैंड से नया क्लॉक टॉवर लाया गया जिसे 1915 में स्थापित किया गया। जॉन चर्च लॉर्ड एल्गिन मेमोरियल (स्मारक) के रूप में भी लोकप्रिय है।

मसरूर मंदिर

मसरूर मंदिर

Pc: Akashdeep83

मसरूर मंदिर कांगड़ा के दक्षिण में 15 किमी की दूरी पर मसरूर टाउन में स्थित है। 15 शिखर मंदिरों वाली यह संरचना गुफाओं के अंदर स्थित हैं जो मसरूर मंदिर के रूप में जाना जाता है। 15 मंदिरों में, ठाकुरद्वार मंदिर जिसमें हिंदू देवी-देवताओं राम, लक्षमण, और सीता की काले पत्थर की छवियाँ हैं, जबकि भगवान शिव की मूर्ति के बीच में है। इंडो - आर्यन वास्तुकला की शैली का प्रतिनिधित्व करते हुये, 10 वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण पत्थर के एक ठोस टुकड़े का उपयोग करके किया गया था, इसकी स्थापत्य शैली के कारण, इसे अजंता-एलोरा मंदिर की याद ताजा करने वाला कहा जाता है।

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