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मेरठ की यात्रा के दौरान इन स्थानों का भ्रमण करना न भूलें

दिल्ली से लगभग 74 कि.मी की दूरी पर स्थित मेरठ उत्तर प्रदेश का एक प्राचीन शहर है। यह राज्य का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर भी है जो बड़े स्तर पर खेल से सामान और वाद्ययंत्रों का निर्माण करता है। इसका संबंध पौराणिक काल से बताया जाता है, माना जाता है यहां महाभारत में उल्लेख हस्तिनापुर स्थल के अवशेष प्राप्त किए गए थे। कहा जाता है कि पांडवों को जलाने के लिए दुर्योधन द्वारा लाक्षागृह का निर्माण यहीं पास मे करवाया गया था।

इसके अलावा कहा जाता है कि अशोक काल के दौरान इस नगर पर बौद्ध धर्म का भी प्रभाव पड़ा था। अंग्रेजों के खिलाफ भारत के सबसे बड़े आंदोलन की शुरुआत मेरठ(10 मई 1857) से की गई थी। जानिए पर्यटन के लिहाज से यह ऐतिहासिक शहर आपके लिए कितना खास है। जानिए यहां के प्रसिद्ध स्थलों के बारे में।

औंघड़नाथ मंदिर

औंघड़नाथ मंदिर

औंघड़नाथ मंदिर मेरठा के प्रसिद्ध मंदिर और पर्यटन स्थलों में गिना जाता है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन विशेष रूप से 1857 की क्रांति के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। औपनिवेशिक काल के दौरान भारतीय सेना को 'काली पलटन' कहा जाता था, चूंकि यह मंदिर सेना बैरक के नजदीक थी इसलिए इसे काली पलटन मंदिर के नाम से भी संबोधिति किया जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। भोलेनाथ से जुड़े होने के कारण यहां भक्तों का आना जाना लगा रहता है।

स्थानीय निवासियों के अनसुार मराठा शासक युद्ध के लिए आगे बढ़ने से पहले यहां अराधना किया करते थे। यह मंदिर भारतीय इतिहास के कई पहलुओं को उजागर करता है। अतीत की बेहतर समझ के लिए आप यहां आ सकते हैं।

हस्तिनापुर

हस्तिनापुर

PC- Sanjeev Kohli

हस्तिनापुर,मेरठ जिले के अंतर्गत एक नगर है, जिसका संबंध पौराणिक काल से बताया जाता है। इस नगर का उल्लेख महाभारत और पुराणों में भी मिलता है। पौराणिक साक्ष्यों के अनसुार यह नगर कुरू साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। गंगा नदी के तट पर स्थित यह नगर भारतीय पौराणिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। महाभारत काल की कई घटनाएं इस नगर से जुड़ी है, सौ कौरव भाईयों का जन्म भी इस नगर में हुआ था। यहां स्थित द्रौपदी घाट और कर्ण घाट महाभारत की याद ताजा करते हैं।

सेंट जॉन चर्च

सेंट जॉन चर्च

PC- StJohnsChurchMeerut

मेरठ भ्रमण के दौरान आप यहां की सेंट जॉन चर्च भी देख सकते हैं। यह एक प्राचीन चर्च है, जिसका निर्माण ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 1819 में किया गया था। यह उत्तर भारत की सबसे पुरानी चर्च में से एक है, जिसे नव औपनिवेशिक शैली में बनाया गया था। यहा वो ऐतिहासिक स्थल भी है, जहां अंग्रेज और भारतीयों के बीच कुछ लड़ाईयां भी लड़ी गईं थी। इतिहास की बेहतर समझ के लिए आप यहां की सैर कर सकते हैं।

सूरज कुंड

सूरज कुंड

मेरठ के अन्य प्रसिद्ध स्थलों में आप यहां सूरज कुंड की सैर कर सकते हैं। यह एक पुराना कुंड है, जिसका निर्माण लवर जहांवर लाल नाम के एक व्यापारी ने करवाया था। पहले यह कुंड अबु नाला के पानी से भरा था बाद में इसे गंगा नहर के पानी से भरा गया। सूरज कुंड कई ऐतिहासिक संरचनाओं से घिरा हुआ है। आप यहां पास में स्थित बाबा मनोहर नाथ मंदिर के दर्शन कर सकते है, जिसका निर्माण मुगल शासक शाह जहां ने करवाया था।

बाले मियां की दरगाह

बाले मियां की दरगाह

उपरोक्त स्थलों के अलावा आप मेरठ में बाले मियां की दरगाह देख सकते हैं। यह एक प्राचीन दरगाह है, जिसका निर्माण 1194 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया था। यह दरगाह अपने वार्षिक त्योहार उर्स के लिए काफी ज्यादा प्रसिद्ध है, इस दौरान यहां दूर-दूर से मुस्लिम धर्म के लोगों आगमन होता है। इतिहास के कुछ अलग पहलुओ को जानने के लिए आप यहां आ सकते हैं। यह दरगाह चंडी देवी मंदिर के निकट स्थित है।

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