अब हिमाचल प्रदेश की खुबसूरत वादियों से होते हुए पटरियों पर सरपट दौड़ती ट्रेन में बैठकर सीधे लेह पहुंचना आसान होगा क्योंकि हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से मनाली होते हुए लद्दाख की राजधानी लेह तक ट्रेन रुट तैयार किया जाएगा। इस रुट के लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है। जल्द ही रेल-रूट का निर्माण कार्य शुरू होगा।

हाल ही लोकसभा में पूछे गये एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय रेल मंत्रालय ने यह जानकारी दी। इस बारे में जानकारी देते हुए रेलमंत्रालय ने इस ट्रेन रुट के विषय में विस्तृत जानकारी दी है जिसके अनुसार हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से मनाली होते हुए लद्दाख के लेह तक नयी रेल लाइन बिछायी जाएगी। खास बात यह है कि इस रूट पर 62 tunnels यानि सुरंगें होंगी और 206 bridges यानि पुल होंगे, जो पहाड़ों के बीच गुज़रती ट्रेन का सुंदर अनुभव करायेंगी।
इस नयी रेल लाइन के बन जाने से सुन्दरनगर, मंडी, मनाली, सिस्सु, दर्चा केलॉन्ग, सरचु, पांग, रुम्स्ते, उपशी, खारु और लेह तक आने-जाने में सैलानियों को काफी सुविधा होगी। यह रेल लाइन हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शहरों को लद्दाख से जोड़ेगा। हालांकि यह रेल लाइन कब तक बनकर तैयार होगी, इस बारे में रेल मंत्रालय ने कोई भी जानकारी साझा नहीं की है।

रेल मंत्रालय ने इस ट्रेन रुट की जो विशेषताएं बतायी हैं, वो निम्न हैं :
- हिमाचल प्रदेश को केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख से जोड़ने वाली नयी रेल लाइन करीब 489 किमी लंबी होगी, जो ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच से होकर गुजरेगी।
- इस रेल लाइन का निर्माण ब्रॉड गेज में ही किया जाएगा।
- इस रेल लाइन को तैयार करने में करीब 2557.96 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।
- हिमाचल प्रदेश से लद्दाख की यात्रा कर रहे सैलानियों को पूरे रास्ते में 62 सुरंगों में से होकर गुजरना पड़ेगा।
- 489 किमी की ट्रेन लाइन जो हिमाचल के बिलासपुर से लद्दाख की राजधानी लेह तक जाएगी, में से 270 किमी लंबा रेल लाइन सिर्फ सुरंग के रास्ते से ही गुजरेगा।
- इस रुट पर 2 बेहद महत्वपूर्ण ब्रिज भी होंगे। इसके अलावा 114 ब्रिज सामान्य और 90 छोटे ब्रिज होंगे।
- हिमाचल प्रदेश से शुरू हुआ 489 किमी लंबा सफर 206 ब्रिजों को पार कर लेह में खत्म होगा।
- इस रेल रुट में 37 रोड ओवर ब्रिज और 54 रोड अंडर ब्रिज होंगे।
- हिमाचल से लद्दाख का रेल रुट का पूरी तरह से विद्युतिकरण किया जाएगा।
- हिमाचल प्रदेश से लद्दाख तक रेल लाइन बिछाने की इस परियोजना में 99,201.40 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है।

इससे पहले श्रीनगर-कारगिल-लेह (करीब 480 किमी) नयी रेल लाइन का सर्वे रिपोर्ट 2016-17 में तैयार किया गया, जिसके लिए 55,896 करोड़ रुपये के खर्च होने की संभावना थी। 2017-18 में पठानकोट-लेह (664 किमी) रेल लाइन के लिए जो सर्वे रिपोर्ट तैयार किया गया था, उसके अनुसार इस रेल लाइन को बनाने में 70,308 रुपये खर्च होने की संभावना थी। लेकिन इन दोनों रुट पर ही कम आवाजाही होने की वजह से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
बता दें, फिलहाल हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शहर मनाली से लेह तक जाने का एकमात्र रास्ता सड़क मार्ग है। अगर मौसम अच्छा रहता है तो लगभग 472 किमी लंबे इस रास्ते को पूरा कर मनाली से लेह तक पहुंचने में 2 से 3 दिनों का समय लगता है। चुंकि इस खंड पर सड़कों की स्थिति काफी अच्छी नहीं होती है और गड्ढ़ों व कीचड़ में गाड़ियों के फंसने की समस्या अक्सर होती रहती है, इसलिए मनाली से लेह का यह सफर कई बार और भी अधिक लंबा और कष्टदायक बन जाता है।
क्या इस रूट पर Vistadome coaches होनी चाहिए?
इस रेल रूट के प्लान को देखने के बाद आपको क्या लगता है, क्या इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों में विस्टाडोम कोच लगायी जानी चाहिए।आपका जवाब हां में है या नहीं में, नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिएगा, ताकि हम आपकी बात रेल मंत्रालय तक पहुंचा सकें।



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