Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »उत्तराखंड की इस झील में न तो इंसान, न ही मछलियां , कंकाल और हड्डियाँ तैरते हैं

उत्तराखंड की इस झील में न तो इंसान, न ही मछलियां , कंकाल और हड्डियाँ तैरते हैं

By Staff

आज संस्कृति, सभ्यता, भाषा, खान-पान और विरासत भारत की पहचान है। यहां जहां एक तरफ सांस्कृतिक विविधताएं हैं तो वहीँ कई रूढ़ियां, अंधविश्वास , जादू टोना, भूत प्रेत और रहस्य भी हैं। आज भारत में कई रहस्य ऐसे हैं जिन्हे आगे साइंस ने भी घुटने टेक दिए हैं, क्योंकि इन अनोखे रहस्यों का पता लगाने में आज साइंस और टेक्नोलॉजी भी पीछे रह गयी है। ऐसा इसलिए कि अब तक साइंस को भी इन रहस्यों को लेकर कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिल पाएं हैं।

इसी क्रम में आज हम आपको अवगत करा रहे हैं भारत की एक ऐसी रहस्यमयी जगह से जिसको लेकर तांत्रिकों बाबाओं के अलावा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के बीच भी अलग अलग मत हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड स्थित रूपकुंड झील की जहां आज भी झील के तल से आये रोज़ मानव कंकाल निकलते हैं। आगे बढ़ने से पहले आपको अवगत करा दें इस रहस्यमयी रूपकुंड झील से। Must Read : तो क्या शिव मंदिर तोड़ने के बाद हुआ था ताजमहल का निर्माण

रूपकुंड या कंकाल झील भारत उत्तराखंड राज्य में स्थित एक हिम झील है जो अपने किनारे पर पाए गये पांच सौ से अधिक कंकालों के कारण प्रसिद्ध है। यह स्थान निर्जन है और हिमालय पर लगभग 5029 मीटर (16499 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। पर्यटन की दृष्टि से रूपकुंड, हिमालय की गोद में स्थित एक मनोहारी और खूबसूरत पर्यटन स्थल है, यह हिमालय की दो चोटियों त्रिशूल (7120 मीटर) और नंदघुंगटी (6310 मीटर). के तल के पास स्थित है।रूपकुंड, बेदनी बग्याल की अल्पाइन तृणभूमि पर प्रत्येक पतझड़ में एक धार्मिक त्योहार आयोजित किया जाता है जिसमें आसपास के गांवों के लोग शामिल होते हैं।

आपको बताते चलें कि नंदा देवी राज जाट का उत्सव, रूपकुंड में बड़े पैमाने पर प्रत्येक बारह वर्ष में एक बार मनाया जाता है। यदि रूपकुंड झील के बारें में ध्यान दें तो मिलता है कि इन कंकालों को 1942 में नंदा देवी शिकार आरक्षण रेंजर एच. के. माधवल, ने पुनः खोज निकाला, यद्यपि इन हड्डियों के बारे में आख्या के अनुसार वे 19वीं सदी के उतरार्ध के हैं। इससे पहले विशेषज्ञों द्वारा यह माना जाता था कि उन लोगों की मौत महामारी भूस्खलन या बर्फानी तूफान से हुई थी। 1960 के दशक में एकत्र नमूनों से लिए गये कार्बन डेटिंग ने अस्पष्ट रूप से यह संकेत दिया कि वे लोग 12वीं सदी से 15वीं सदी तक के बीच के थे।

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

रूपकुंड या कंकाल झील भारत उत्तराखंड राज्य में स्थित एक हिम झील है जो अपने किनारे पर पाए गये पांच सौ से अधिक कंकालों के कारण प्रसिद्ध है। यह स्थान निर्जन है और हिमालय पर लगभग 5029 मीटर (16499 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। पर्यटन की दृष्टि से रूपकुंड, हिमालय की गोद में स्थित एक मनोहारी और खूबसूरत पर्यटन स्थल है, यह हिमालय की दो चोटियों त्रिशूल (7120 मीटर) और नंदघुंगटी (6310 मीटर). के तल के पास स्थित है।

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

रूपकुंड, बेदनी बग्याल की अल्पाइन तृणभूमि पर प्रत्येक पतझड़ में एक धार्मिक त्योहार आयोजित किया जाता है जिसमें आसपास के गांवों के लोग शामिल होते हैं। आपको बताते चलें कि नंदा देवी राज जाट का उत्सव, रूपकुंड में बड़े पैमाने पर प्रत्येक बारह वर्ष में एक बार मनाया जाता है।

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

यदि रूपकुंड झील के बारें में ध्यान दें तो मिलता है कि इन कंकालों को 1942 में नंदा देवी शिकार आरक्षण रेंजर एच के माधवल, ने पुनः खोज निकाला, यद्यपि इन हड्डियों के बारे में आख्या के अनुसार वे 19वीं सदी के उतरार्ध के हैं। इससे पहले विशेषज्ञों द्वारा यह माना जाता था कि उन लोगों की मौत महामारी भूस्खलन या बर्फानी तूफान से हुई थी। 1960 के दशक में एकत्र नमूनों से लिए गये कार्बन डेटिंग ने अस्पष्ट रूप से यह संकेत दिया कि वे लोग 12वीं सदी से 15वीं सदी तक के बीच के थे।

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

यहां पाये गए कंकालों पर कई तरह के अध्ययन किये गए हैं खोपड़ियों के फ्रैक्चर के अध्ययन के बाद, हैदराबाद, पुणे और लंदन में वैज्ञानिकों ने यह निर्धारित किया कि लोग बीमारी से नहीं बल्कि अचानक से आये ओला आंधी से मरे थे।

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

कहा जाता है कि ये ओले, क्रिकेट की गेंदों जितने बड़े थे, और खुले हिमालय में कोई आश्रय न मिलने के कारण सभी मर गये। यहां अब तक जिस रहस्य से पर्दा नहीं उठा सका है वो ये है कि आखिर ये लोग इस सुनसान जगह पर क्या कर रहे थे क्योंकि उस समय यहां आस पास में कोई बस्ती भी नहीं थी। हालांकि कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि ये सभी लोग तिब्बत जा रहे थे व्यापार करने क्योंकि उस समय तिब्बत व्यापार का मुख्य केंद्र हुआ करता था।

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल

इस जानकारी के बाद यदि आप का रूपकुंड जानें का मूड हो तो आज ही टिकट बुक कराएं और निकल जाएं इस स्थान की यात्रा पर।

ज्ञात हो कि यहां पाये गए कंकालों पर कई तरह के अध्ययन किये गए हैं खोपड़ियों के फ्रैक्चर के अध्ययन के बाद, हैदराबाद, पुणे और लंदन में वैज्ञानिकों ने यह निर्धारित किया कि लोग बीमारी से नहीं बल्कि अचानक से आये ओला आंधी से मरे थे। कहा जाता है कि ये ओले, क्रिकेट की गेंदों जितने बड़े थे, और खुले हिमालय में कोई आश्रय न मिलने के कारण सभी मर गये। य

हां अब तक जिस रहस्य से पर्दा नहीं उठा सका है वो ये है कि आखिर ये लोग इस सुनसान जगह पर क्या कर रहे थे क्योंकि उस समय यहां आस पास में कोई बस्ती भी नहीं थी। हालांकि कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि ये सभी लोग तिब्बत जा रहे थे व्यापार करने क्योंकि उस समय तिब्बत व्यापार का मुख्य केंद्र हुआ करता था। इस जानकारी के बाद यदि आप का रूपकुंड जानें का मूड हो तो आज ही टिकट बुक कराएं और निकल जाएं इस स्थान की यात्रा पर।

More News

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+