भारत पूरी तरह से तैयार है - हाइड्रोजन की शक्ति से ट्रेनों को चलाने के लिए। परिवहन का एक ऐसा साधन जहां न तो डिजल की जरूरत होती है और न ही बिजली की। न कार्बन का उत्सर्जन होता है और रफ्तार ऐसी की हवाओं से बातें करें। पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित...जी हां, इतनी सारी खुबियों वाले हाइड्रोजन ट्रेन का जल्द ही भारत में पहले रूट पर ट्रायल रन शुरू होने वाला है।
भारतीय रेलवे 'हाइड्रोजन फॉल हेरिटेज' परियोजना के तहत हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन करने वाली है। बता दें, भारत साल 2030 तक जीरो कार्बन उत्सर्जक बनने का लक्ष्य रखकर इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कब से शुरू होगा हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल रन? कौन से रूट पर शुरू होने वाला ट्रायल रन? क्या होगी रफ्तार? और हाइड्रोजन ट्रेन की क्या होंगी खासियतें?

चलिए इन सबके बारे में जानते हैं -
नहीं होगा खतरनाक उत्सर्जन
लोकल ट्रेन हो, राजधानी एक्सप्रेस जैसी तेज रफ्तार ट्रेन, हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस हो या फिर लग्जूरियस पैलेस ऑन व्हील जैसी ट्रेनें...सभी ट्रेनों को चलाने के लिए ईंधन के तौर पर डिजल अथवा बिजली की जरूरत पड़ती ही है। लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन भारत की ऐसी पहली ट्रेन होगी जो पानी की शक्ति से चलेगी। इन ट्रेनों में हाइड्रोजन को बतौर ईंधन उपयोग कर बिजली का उत्पादन किया जाएगा।
चुंकि ऑक्सीजन के साथ संयोग कर हाइड्रोजन पानी बनाती है (H2+O2 = H2O), इसलिए ईंधन के रूप में भाप और पानी का ही सिर्फ इस्तेमाल किया जाएगा। परिणाम होगा कि इस ईंधन से कुछ भी ऐसा उत्सर्जित नहीं होगा जो पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करता हो।
कब से शुरू होगा ट्रायल रन?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार दिसंबर 2024 में हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल रन शुरू होने की उम्मीद है। अगर यह ट्रायल रन सफल होता है तो भारत दुनिया में हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला 5वां देश बन जाएगा। इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन होता है।

क्या होगा रूट?
financial express की रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार सबसे पहले ट्रायल रन हरियाणा के जिंद से सोनीपत के 90 किमी लंबे कॉरिडोर में शुरू होगा। ट्रेन में ईंधन भरने के लिए जिंद में 3000 किलो हाइड्रोजन स्टोरेज, हाइड्रोजन कंप्रेसर और प्री-कूलर इंटीग्रेशन के साथ दो हाइड्रोजन डिस्पेंसर भी होंगे। इसके अलावा भारतीय रेलवे पहाड़ी इलाकों जैसे दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, नीलगिरी माउंटेन रेलवे, कालका-शिमला रेलवे आदि रूट्स पर भी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना बना रही है।
मिली जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पर काफी खर्च भी कर रही है। रेलवे इसे मुख्य रूप से हेरिटेज और पहाड़ी रास्तों पर चलाने की योजना बना रही है। फिलहाल भारतीय रेलवे वर्ष 2025 तक 35 हाइड्रोजन ट्रेनों को अलग-अलग रूट्स पर चलाने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 35 हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए ₹2800 करोड़ का बजट रखा गया है। इसके साथ ही हेरिटेज रूट पर हाइड्रोजन से जुड़ी संरचनाओं के लिए अलग से ₹600 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।
क्या होगी रफ्तार?
बताया जाता है कि हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन अधिकतम 140 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से किया जाएगा जो यात्रियों को जल्दी और बड़े ही आरामदायक तरीके से गंतव्यों तक पहुंचा देगा। एक बार हाइड्रोजन टैंक को पूरी तरह से भर देने पर वह करीब 1000 किमी तक का सफर बड़े ही आसानी से पूरा कर लेगा। इन ट्रेनों को संचालन के लिए हर घंटे 40,000 लीटर पानी की जरूरत होगी ताकि आवश्यक रसायनीक क्रियाएं चलती रहे। इसके लिए पानी के भंडारण के लिए समर्पित स्टोरेज भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
हाइड्रोजन ट्रेनें न सिर्फ तेज रफ्तार के साथ यात्रियों को उनके पसंदीदा गंतव्यों तक पहुंचाने का काम बखूबी करेंगी बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाने वाली हैं। जीरो कार्बन उत्सर्जन, कम ध्वनि प्रदूषण और हाई स्पीड, हाइड्रोजन ट्रेनों की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे आधुनिक युग के परिवहन का बेहतरीन साधन बनाता है।



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