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तुगलकाबाद किला... देश के खंडहर किलों में से एक भारतीय विरासत

तुगलकाबाद किला दिल्ली के खंडहर किले के रूप में जाना जाता है, जो 1321 ईस्वी में तुगलक वंश के संस्थापक ग्यासुद्दीन तुगलक द्वारा बनवाया गया था।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। इनमें से कुछ आज भी पुराने इतिहास को जीवंत करते ज्यों के त्यों आज भी है और कुछ खंडहर के रूप में खत्म होते जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही तुगलकाबाद का किला। इस किले का अधिकतर हिस्सा वर्तमान समय में ढह चुका है। दिल्ली के तुगलकाबाद में स्थित ये किला कुतुब मीनार से महज 8 किमी. की दूरी पर स्थित है। इसके समीप में ही आदिलाबाद का भी किला बना हुआ है, जिसे यहां आने वाले पर्यटक जरूर देखने जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी इन छुट्टियों में दिल्ली के लिए प्लानिंग कर रहे हैं तो दिल्ली में घूमने के लिए आपको ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की कमी नहीं पड़ेगी।

तुगलक वंश ने कराया था तुगलकाबाद किले का निर्माण

तुगलक वंश ने कराया था तुगलकाबाद किले का निर्माण

तुगलकाबाद का किला तुगलक वंश की निशानी के तौर पर जानी जाती है, जो दिल्ली के सात शहरों में से तीसरे शहर में बसा है। 1325 ईस्वी में बने इस किले का निर्माण गयासुद्दीन तुगलक ने करवाया था। लेकिन अब धीरे-धीरे इसकी चमक फीकी पड़ती जा रही है। लेकिन फिर भी इसे देखने आने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं पड़ी है। यहां पास में ही गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा भी बना हुआ है, जो लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। इसके अलावा इसमें गयासुद्दीन की बेगम और पुत्र (बाद में उसका उत्तराधिकारी मुहम्मद बिन तुगलक) का भी मकबरा भी बना हुआ है।

खंडहर में तब्दील हो चुका है तुगलकाबाद का किला

खंडहर में तब्दील हो चुका है तुगलकाबाद का किला

भारत के सबसे प्राचीन किलों में शुमार तुगलकाबाद का किला इस्लामिक वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना के तौर देखा जाता है। ये किला दो मंजिला है, जो पूरी तरीके से ग्रेनाइट के पत्थरों से निर्मित है। इस किले के शाही निवास और सार्वजनिक हॉल को आज भी देखा जा सकता है परिसर का बाकी हिस्सा अब खंडहर के रूप में तब्दील हो चुका है। कहा जाता है कि इस किले को बनने में महज 4 साल का समय लगा था, जिसे 15 साल बाद ही छोड़ दिया गया था।

अधूरा माना जाता है ये किला

अधूरा माना जाता है ये किला

किले को लेकर एक किस्सा भी है.. सूफी संत निजामुद्दीन औलिया ने तुगलकाबाद को शाप दिया था कि यहां किले का निर्माण कभी पूरा नहीं हो पाएगा, जिसे आज भी अधूरा माना जाता है। इस किले के प्रवेशद्वार पर भव्य सीढ़ियों का निर्माण कराया था, जिससे हाथियों सहित महल में प्रवेश किया जा सके। ये किला लगभग 6 वर्ग किमी. का क्षेत्र कवर करता है।

तुगलकाबाद किला जाने का सही समय

तुगलकाबाद किला जाने का सही समय

अगर आप भी तुगलकाबाद किला घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो यहां सुबह 07:00 बजे से शाम 05:00 तक जाया जा सकता है। यहां आप साल के किसी भी समय जा सकते हैं। लेकिन यहां अक्टूबर से लेकर अप्रैल तक कभी भी आ सकते हैं।

तुगलकाबाद किले का प्रवेश शुल्क

तुगलकाबाद किले का प्रवेश शुल्क

भारतीय पर्यटकों के लिए - 20 रुपये

विदेशी पर्यटकों के लिए - 200 रुपये

15 साल से कम बच्चों के लिए - प्रवेश निशुल्क

तुगलकाबाद किला कैसे पहुंचें

तुगलकाबाद किला कैसे पहुंचें

तुगलकाबाद किला दिल्ली में होने के कारण यहां आपको जाने के लिए कोई समस्या नहीं होगी। यहां एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन व बस स्टैण्ड सभी मिल जाएंगे, जो भारत के सभी बड़े शहरों से सीधे जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर आप भी यहां जाने के लिए प्लानिंग कर रहे हैं तो इन छुट्टियों में आप आराम से तुगलकाबाद किला घूमकर आ सकते हैं।

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