उत्तराखंड के हर शहर को देखकर यह महसूस होता है कि वह पहाड़ों की गोद में बैठा हुआ है। यूं तो गर्मियों की शुरुआत होते ही नैनीताल, भीमताल, चकराता से लेकर देहरादून, ऋषिकेश और मसूरी तक में लोगों की भीड़ जमने लगती है।
अगर आप भी गर्मियों से बचने के लिए उत्तराखंड जाने का प्लान बना रहे हैं लेकिन कोई शांत और कम भीड़भाड़ वाली जगह ढूंढ रहे हैं तो एक बार लैंसडाउन के बारे में जरूर सोचिए। इसे अगर उत्तराखंड का Hidden Gem कहा जाए, तो ऐसा कहना गलत नहीं होगा। यह जगह न सिर्फ एक शानदार हिल स्टेशन वाली वाइव देता है बल्कि लोगों की भीड़ से दूर दिलो-दिमाग को ठंडक और शांति पहुंचाने वाले किसी थेरेपी का काम भी करता है।

लैंसडाउन में क्या है Must Visit जगहें -
भुल्ला लेक - लैंसडाउन पहुंचकर एक दिन कहीं भागदौड़ न करके सिर्फ रिलैक्स किजीए और इस जगह की खुबसूरती का आनंद उठाइए। अगर होटल के कमरे में बैठे-बैठे बोर लगने लगे तो पहुंच जाएं भुल्ला लेक। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि इस झील के चारों तरफ की हरियाली आपकी आंखों को बड़ी सुकून पहुंचाएगी।
अगर कुछ अलग सा एक्सपीरियंस करना चाहते हैं तो लेक में बोटिंग कर सकते हैं या फिर बस यूं ही अपने पार्टनर का हाथ पकड़कर झील के किनारे टहलना भी एक रोमांटिक ट्रिट जैसा ही होगा।

टिप एन टॉप (टिफिन टॉप) - पहाड़ी इलाकों से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बड़ा खुबसूरत दिखाई देता है। अगर आप भी इस तरह के किसी नजारे का आनंद उठाना चाहते हैं या आपको फोटोग्राफी का शौक है तो सीधे पहुंचे टिप एन टॉप। यहां से आपको हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं के साथ-साथ घाटी की हरियाली और उगते या डूबते सूरज का वो नजारा दिखेगा जिसे आप पूरी जिंदगी अपने दिल में संजो कर रखना पसंद करेंगे।
गढ़वाली म्यूजियम - जब गढ़वाल क्षेत्र में आए हैं, तो यहां की संस्कृति और धरोहरों के बारे में भी तो जानने की उत्सुकता होगी आपको। गढ़वाल की संस्कृति-धरोहर इन चीजों के बारे में जानने की बेस्ट जगह है गढ़वाल मेस में मौजूद गढ़वाली संग्रहालय। यहां आपको गढ़वाली कलाकृतियां, फोटो और भी कई तरह की ऐसी चीजें देखने को मिलेंगी जो गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट से जुड़ी हुई है।

सेंट मेरीज चर्च - घूमते समय रास्ते में कहीं भी मंदिर या चर्च दिख जाएं तो पर्यटक अक्सर उसका एक चक्कर जरूर लगा लेते हैं। लेकिन लैंसडाउन का 19वीं सदी में बना सेंट मेरीज चर्च कोई ऐसी जगह नहीं है, जहां से घूमकर निकलने के बाद आप इसे आसानी से भूल जाएं। इस जगह की खुबसूरती, वास्तु शिल्प इतनी शानदार है कि इन्हें आप लंबे समय तक जरूर याद रखेंगे।
ट्रेकिंग - हिल स्टेशंस की सबसे खासियत ही यहीं होती है कि आप अगर किसी खास जगह पर न भी घूमें तो पहाड़ी रास्तों पर घूमना, घाटियों में जाना या ट्रेकिंग करके ही आपका दिमाग बिल्कुल फ्रेश हो जाता है। लैंसडाउन भी इससे अलग नहीं है। इस जगह के हर कोने में प्रकृति अपनी सुन्दरता की छटा बिखेरती है जो आमतौर पर अब शहरों में देखने को अधिक नहीं मिलती। बर्फीली पहाड़ियों के व्यू वाले रास्तों पर घूमना ही अपने आप में एक माइंड रिफ्रेश कर देने वाली बात होती है।
कौन सा व्यंजन है मस्ट ट्राई

घूमने जाने पर अपने पसंदीदा व्यंजन तो जरूर ढूंढिएगा लेकिन अगर लोकल फुड ही ट्राई नहीं किया तो घूमने का असली मजा कहां आता है। ठीक ऐसा ही लैंसडाउन में भी होता है। लैंसडाउन में आपको ऑथेंटिक गढ़वाली व्यंजन मिलते हैं, जिनका स्वाद आपको शहरों के पकवानों में कभी नहीं मिल सकेगा। लैंसडाउन की अपनी ट्रिप में चावल या रोटी के साथ कफुली, फानु और आलू के गुटके का स्वाद चखना बिल्कुल मत भूलें।
कैसे पहुंचे लैंसडाउन
पहाड़ों और घाटियों की तो ढेर सारी बातें हो गयी, चलिए अब आपको बताते हैं कि इस शानदार हिल स्टेशन पर कैसे पहुंचे! लैंसडाउन समुद्रतल से 1706 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक शानदार हिल स्टेशन है जो सड़क मार्ग से बड़ी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। लैंसडाउन का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कोटद्वार है, जो यहां से लगभग 41 किमी की दूरी पर मौजूद है।
कोटद्वार से लैंसडाउन पहुंचने के लिए आपको रेलवे स्टेशन के बाहर से ही टैक्सी या फिर राज्य सरकार की बसें आसानी से मिल जाएंगी। अगर आप विमान से आना चाहते हैं तो नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो लैंसडाउन से 152 किमी की दूरी पर है। देहरादून से लैंसडाउन के लिए टैक्सी या बस आसानी से उपलब्ध है।
गर्मियों में लैंसडाउन की यह ट्रिप आपको न सिर्फ राहत दिलाएगी बल्कि अगले कुछ महीनों तक गर्मी से लड़ने की ताकत भी देगी।



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