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इस खूबसूरत झील के 9 कोनों में छिपा है सबसे बड़ा रहस्य

Written By: Nripendra

अगर आप शांति और कुदरत की अद्भुत सुंदरता का समन्वय देखना चाहते हैं, तो नैनीताल की खूबसूरत झील नौकुचियाताल की सैर का आनंद जरूर लें। अपने नौ कोनों के लिए प्रसिद्ध नौकुचियाताल, भीमताल से लगभग 5 किमी की दूरी पर स्थित है। समुद्र तल से 1220 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह खूबसूरत झील नैनीताल व भीमताल की तुलना में भले ही थोड़ी कम हो, पर यहां के नजारे किसी को आनंदित कर सकते हैं। यह झील उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है।

इस झील के नौ कोनों का अपना अलग धार्मिक महत्व है। मान्यता के अनुसार अगर कोई नौकुचियाताल के सभी नौ कोने एकसाथ देख ले, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। पर ऐसा होना अबतक संभव नहीं हो पाया है, यहां एक बार में सिर्फ 7 कोने ही दिखाई पड़ते हैं।

झील के मुख्य आकर्षण

झील के मुख्य आकर्षण

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यह झील अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ और भी कई चीजों के लिए जानी जाती है। आप यहां प्रवासी पक्षियों की नाना-प्रकार की प्रजातियों को एकसाथ देख सकते हैं। रंग-बिरंगे खूबसूरत, इन पक्षियों को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ती है। इसी के साथ आप झील के साफ पानी में मछलियों की शरारत भरी हरकतें भी देख सकते हैं। यहां मछलियों का शिकार व नौका विहार करने वालों की अच्छी खासी भीड़ लगी रहती है। बता दें कि इस झील का रंग गहरा नीला है। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए अच्छा इंतजाम किया गया है, जिससे सैलानी ताल की सैर का आनंद ठीक से उठा सकें।

यह जानना भी जरूरी

यह जानना भी जरूरी

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नैनिताल जिले के अन्य तालों की तुलना में इस झील का वातावरण काफी शांत है। दरअसल, ज्यादातर सैलानी नैतीलात व भीम ताल देखकर ही सफर खत्म कर देते हैं, वो यहां तक आ ही नहीं पाते, जिसका कारण है, जानकारी का अभाव। इसलिए यह झील दैनिक प्रर्यटन स्थलों की तुलना में कम भीड़-भाड़ वाली जगह पर स्थित है। यह झील मनोरंजन व आत्मिक शांति के लिहाज से एक आदर्श विकल्प है। झील की ओर बढ़ते हैं, आपको रास्ते में कमल के फूलों का छोटा सा तालाब नजर आएगा, जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे वह पर्यटकों के स्वागत में खड़ा हो।

झील की सैर

झील की सैर

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आप जैसे ही ताल के करीब जाएंगे आपको पहला बोट स्टैंड दिखाई देगा। जहां से आप झील की सैर का आनंद उठाने के लिए बोट बुक कर सकते हैं। अगर आप बोटिंग के दूसरे स्टैंड जाना चाहते हैं, तो आपको ताल के किनारे से होते हुए
लगभग 1 किमी तक का पैदल सफर तय करना होगा। इस सफर के दौरान आप ताल के आसपास लगे पेड़ों की खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं। सैलानियों की सुविधा के लिए ताल के आसपास कई दुकानें मौजूद हैं, जहां से आप जरूरत की चीजें खरीद सकते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि यहां मौसम खराब की स्थिति में नौकाविहार न करें। कई बार स्थित ज्यादा भयावह हो जाती है।

और कहां जाएं

और कहां जाएं

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झील की सैर का आनंद उठाने के बाद अगर आप चाहें तो कुछ किमी की दूरी पर स्थित हनुमानगढ़ मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। जहां आप आराम से बैठकर यात्रा को थोड़ी देर के लिए विराम दे सकते हैं। बता दें कि यह मंदिर काफी बड़ा व प्रसिद्ध है। यहां हुनमान भगवान की कई फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर में वैष्णोदेवी का गुफा मंदिर भी स्थित है। अगर आप चाहें तो यहां से भीमताल की ओर बढ़ सकते हैं।

भीमताल

भीमताल

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नौकुचियाताल से करीब 5 किमी की दूरी पर स्थित भीमताल, नैनिताल की झीलों का मुख्य आकर्षण है। यह ताल नैनी झील से भी बड़ा है। जिसकी लंबाई 1674 मीटर जबकी चौड़ाई 447 मीटर है। नैनी झील की तरह ही इस ताल के दो छोर हैं, जिन्हें तल्ली व मल्ली ताल कहा जाता है। इस ताल की मुख्य विशेषता है, इसकी अवस्थिति। यह एक सुंदर घाटी में स्थित है। यहां बीच में स्थित टापू, सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस टापू पर आप मनपसंद व्यंजनों का लुत्फ उठा सकते हैं। बता दें कि इस ताल की भी अपनी अगल धार्मिक मान्यता है, कहा जाता है इस ताल को भीम ने खोदकर बनाया था, इसलिए इस झील का नाम पड़ा भीमताल। यहां पास में ही भीमेश्वर मंदिर भी है, जिसे भीमेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।

सात ताल

सात ताल

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कुमाऊं मंडल के सभी तालों में सात ताल सबसे अनोखा व प्राकृतिक खूबसूरती से भरा है। यहां तक पहुंचने के लिए भीमताल से ही जाया जाता है। भीमताल से सातताल की दूरी लगभग 4 किमी है। इस ताल को सात तालों का समूह कहा जाता है, जिसमें नल दमयंती, गरुड़, राम, लक्ष्मण, सीता, भरत व हनुमान ताल शामिल हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस ताल के समीप भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण ने वनवास के दौरान कुछ समय बिताया था। यह सातों ताल अपने मीठे जल के लिए जाने जाते हैं।

नैनी झील

नैनी झील

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नैनी झील, नैनीताल का मुख्य आकर्षण है। इस एक झील को देखने के लिए पूरे विश्व भर से सैलानी आते हैं। इस झील को जिक्र स्कंद पुराण में भी मिलता है, जिसमें इसे त्रिऋषि सरोवर कहा गया है। इस झील का अपना अलग धार्मिक महत्व है, मान्यता के अनुसार इस ताल में डुबकी लगाने से मानसरोवर नदी के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। इसलिए इस झील को 64 शक्तिपीठों में शामिल किया गया है। पर्यटन के लिहाज से यह झील विश्व विख्यात है, यहां नौकायन का आनंद लेने के लिए सैलानियों का तांता लगा रहता है। यहां से पहाड़ों की खूबसूरती का आसानी से लुत्फ उठाया जा सकता है। इस झील के दो किनारों को मल्ली ताल व दूसरे किनारे को तल्लीताल कहा जाता है।

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

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नौकुचियाताल पहुंचने के लिए आपको ज्यादा मशक्कत करने की जरूरत नहीं। अगर आप हवाई मार्ग से यहां पहुंचना चाहते हैं तो यहां का नजदीकी हवाईअड्डा पंतनगर है। जो महत्वपूर्ण शहरों से जुड़ा हुआ है। आप चाहें तो देहरादून का भी सहारा हवाई मार्ग के लिए ले सकते हैं।
अगर आप रेल मार्ग से यहां पहुंचना चाहते हैं, तो यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। अगर आप चाहें तो सड़क मार्ग का सहारा ले सकते हैं। उत्तराखंड के प्रमुख हिल स्टेशन नैनीताल से जुड़े हुए हैं, जहां से आप नौकुचियाताल आसानी से पहुंच सकते हैं।