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उत्तराखंड का फूलदेई उत्सव - कब मनाया जाएगा फूलों का यह त्योहार और क्या है इसकी विशेषताएं!

भारत का हर राज्य जहां, मूल रूप से खेती की जाती है वहां फसलों की कटाई के समय कोई न कोई उत्सव जरूर मनाया जाता है। चाहे मकर संक्रांति हो या वैशाखी, पोंगल हो या नवान्न अथवा ओणम्, सभी त्योहार फसलों की कटाई से ही जुड़े हुए हैं।

उसी तरह से उत्तराखंड में भी हर साल फसलों की कटाई का त्योहार फूलदेई उत्सव मनाया जाता है। इसे मुख्य तौर पर गढ़वाल और कुमाऊं में पारंपरिक रूप से मनाया जाता है।

phool dei festival uttarakhand

हर साल मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाने वाला फूलदेई उत्सव हर साल हिंदु कैलेंडर के पहले दिन यानी चैत्र महीने के पहले दिन उत्तराखंड में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल फूलदेई उत्सव 9 अप्रैल को मनाया जाएगा। सबसे दिलचस्प बात है कि उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में फूलदेई उत्सव को 1 महीने तो कुछ इलाकों में इसे 1 सप्ताह या फिर 3 दिनों तक मनाया जाता है।

यह उत्सव उन कुछ प्रमुख उत्सवों में से एक है, जो लोगों को प्रकृति से जोड़ता है। इस समय उत्तराखंड के लोग बड़ी ही खुबसूरती के साथ अपने घरों को सजाते हैं। फूलदेई उत्सव में बच्चों की भूमिक बड़ी ही खास होती है। इस उत्सव में बच्चे पारंपरिक पोशाकों में लोकगीत गाते हुए पेड़ों से ताजे फूल तोड़ते हैं। इसके बाद लोकगीत गाते हुए इसे गांव के हर एक घर के दहलीज पर रखकर आते हैं।

phool dei festival 2024

ऐसा करके, बच्चे एक-एक कर पूरे गांव में घूम लेते हैं और हर घर को सजा डालते हैं। इस दौरान उनके हाथों में एक थाली होती है, जिसमें चावल, गुड़, नारियल, हरे पत्ते और फूल होते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार फूलदेई उत्सव के दौरान फ्योंली और बुरांस के फूलों का घर की दहलीज पर रखा जाना बहुत शुभ होता है। इससे घर में खुशहाली आती है।

बदले में लोग इन बच्चियों को मिठाईयां और पैसे भी देते हैं। जो इस बात का प्रतिक होती है कि ये बच्चियां उनके गांव और घरों में खुशहाली लेकर आयी है। गांवों में स्थानीय घोघादेवी की पूजा की जाती है।

uttarakhand phool dei festival

फूलदेई उत्सव का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। फूल और देई। इसमें से देई एक प्रकार का मीठा पकवान होता है, जिसे आटा, गुड़ और दही को मिलाकर तैयार किया जाता है। उत्सव के दौरान लोगों में इस मीठे पकवान को बांटा जाता है, जिसे खुशहाली का प्रतिक माना जाता है। लोग इस दौरान एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं। साथ में नाचना-गाना और खाना होता है। छोटी बच्चियां ताजे फूलों को तोड़कर उनसे कई तरह के गहने बनाती हैं और पहनती हैं, उन फूलों से अपने घरों को सजाती हैं।

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