कहीं रोड ट्रिप पर जाते समय जब किसी सुरंग (Tunnel) के बीच से होकर गुजरते हैं तो कितना रोमांचक लगता है। है न...लेकिन सोचिए अगर हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड की ऐसी किसी रोड ट्रिप के दौरान सुरंग के अंदर आप प्रवेश तो करते हैं लेकिन आगे बढ़ने पर आपको पता चलता है कि वहां से निकलने का रास्ता पहाड़ से गिरी किसी विशाल चट्टान ने बंद दिया है। आप गाड़ी घुमाकर जिस रास्ते से टनल के अंदर गये थे, उसी रास्ते से बाहर निकलने के बारे में सोचते हैं लेकिन...

जब तक आप टनल के पहले छोर पर वापस लौट कर आते हैं, आप देखते हैं कि लैंडस्लाइड के कारण पहाड़ से गिरे मलबे ने उस रास्ते को भी बंद कर दिया है। अब आप इस सुरंग में पूरी तरह से फंस चुके हैं। इस परिस्थिति की कल्पना करने से ही हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जरा सोचिए, उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधिन सुरंग सिलक्यारा टनल में पिछले 16 दिनों से फंसी उन 41 जानों के बारे में। दिवाली के दिन से इस सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने की हर संभव कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन कोई ना कोई बाधा रेस्क्यू ऑपरेशन के आड़े आ रही है। आखिरकार अब इन मजदूरों को बचाने के लिए सेना की मदद ली जा रही है।

जो Rat Hole Mining तकनीक का इस्तेमाल कर इन मजदूरों को बचाने की कोशिशें करेगी। हालांकि इतने दिनों से सुरंग में फंसे इन मजदूरों को खाने-पीने की चीजें लगातार मुहैया करवायी जा रही है लेकिन जरा सोचिए मात्र 2 किमी के दायरे में फंसे 41 मजदूरों के मन पर इस समय क्या बीत रही होगी? पिछले 16 दिनों से इन मजदूरों ने सूरज की एक किरण तक नहीं देखी है। हम सभी जानते हैं कि सूर्य की रोशनी हमारे शरीर के लिए भी कितनी लाभदायक होती है। ऐसे में धूल और अंधेरे के साथ-साथ ठंड की वजह से इनके शरीर पर इसका कितना नकरात्मक प्रभाव पड़ रहा होगा?
शरीर पर क्या पड़ता है नकरात्मक प्रभाव?
लंबे समय तक सुरंग जैसी किसी बंद जगह पर फंसने की वजह से लोग गहरी चिंता और हताशा की भावना से ग्रसित होने लगते हैं। उनमें संदेवनाओं की कमी जैसी सूंघने या देख पाने में अक्षमता आदि परेशानियां होनी शुरू हो जाती है। इन मजदूरों को बाहर निकालने की हर कोशिश विफल हो रही है, इस बात का अंदाजा अंदर फंसे मजदूरों को भी हो रही होगी। इसलिए वे बुरी तरह से हताशा के शिकार होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में मानसिक समस्याओं के साथ-साथ शरीर में पानी की कमी होगा, वजन में अचानक कमी आना जैसी परेशानियां आम होती हैं।

अगर टनल में फंसने वाला व्यक्ति किसी प्रकार की बीमारी जैसे डायबिटिज, ब्लड प्रेशर आदि से ग्रसित है तो उसकी बीमारी में इजाफा हो सकता है क्योंकि अंदर फंसे रहने से उसे दवाईयां सही समय पर नहीं मिल पा रही होंगी। पाचन शक्ति प्रभावित होती है। पानी कम मिलने के कारण इसका बुरा असर किडनी पर भी पड़ सकता है। व्यक्ति नींद नहीं आना, भूख ना लगना, ठंड के कारण शरीर की गर्मी का कम होने लगना, ठीक तरीके से ऑक्सीजन नहीं मिलने से फेफड़े प्रभावित होना या सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानियों का शिकार हो सकता है। इसके साथ ही अत्यधिक धुल और सीलन में लगातार रहने की वजह से फेफड़ों का इंफेक्शन भी होने का डर भी बना रहता है।
क्या करें अगर फंस जाएं किसी सुरंग में?
अगर आप किसी टनल या सुरंग जैसी बंद जगह में फंस जाएं तो सबसे पहले खुद और दूसरों को शांत करने की कोशिश करें। क्योंकि आप जब तक मानसिक रूप से शांत नहीं होंगे, अपने अगले कदम के बारे में नहीं सोच सकेंगे। आपके पास जो भी संसाधन मौजूद है जैसे राशन, खाने की सुखी वस्तुएं, पीने का पानी और दवाईयों से लेकर कार और मोबाइल की बैट्री तक, उन सभी चीजों का इस्तेमाल काफी सोच-समझकर करें। किसी बंद जगह पर फंस जाने पर आपके पास जो भी नंबर उपलब्ध हैं, उनका इस्तेमाल कर सबसे पहले मदद मांगने की कोशिश करें। हमेशा अपने पास स्थानीय प्रशासन के जरूरी नंबरों को Save रखे।

अगर किसी कारणवश आप स्थानीय प्रशासन से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं तो अपने किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार को अपना लोकेशन भेज कर उनसे कहे कि वह आपके लिए मदद भेजने की कोशिश करें। भले ही वह दोस्त या रिश्तेदार किसी दूसरे शहर या राज्य में रहता हो, उससे कहें कि वह प्रशासन की मदद से आपके लोकेशन को ढूंढ निकाले। ऐसे समय में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने लोकेशन की सही जानकारी समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट करें। इस दौरान आप पूरी तरह से जागरुक रहे ताकि बाहर से आने वाली हर आहट आपको सुनाई दे जाए।
हो सकता है कि कोई स्थानीय व्यक्ति ही इस तरह हुई लैंडस्लाइड के बाद वहां आकर यह जांचने की कोशिश करें कि कहीं टनल में कोई फंस तो नहीं गया। वहीं व्यक्ति आपके लिए मदद भी लेकर आएगा।
नोट :- कई बार पहाड़ों या बंद जगहों में मोबाइल का नेटवर्क या इंटरनेट सेवा काम नहीं करती है। जैसा उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों के साथ हुआ। उनके पास मोबाइल फोन तो भेजी गयी लेकिन टनल के अंदर वह काम नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में टनल के एकदम सामने उस छोर तक आकर देखें कि आपका मोबाइल काम कर रहा है या नहीं। अगर मोबाइल में तब भी नेटवर्क काम नहीं किया तो अपने मोबाइल फोन की बैट्री को बचा कर रखें। अगर सूरज ढलने तक आपके पास किसी कारणवश मदद नहीं पहुंच पाती है तो टनल में पत्थरों के अंदर से रोशनी चमकाकर आप लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर सकते हैं।



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