वैष्णो देवी के दर्शन करने जाने वाले भक्तों के लिए खुशखबरी। अगर आप नियमित रूप से माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए जाते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। जल्द ही आप रोपवे (Ropeway) से बादलों के बीच से होकर वैष्णो देवी के भवन तक की चढ़ाई को पूरी कर सकेंगे। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने रोपवे परियोजना को मंजूरी दे दी है।
इस रोपवे के बन जाने से उन श्रद्धालुओं को बड़ी आसानी होने वाली है जिन्हें चढ़ाई करने में काफी कठिनाईयां आती थी। खासतौर पर रोपवे का फायदा दिव्यांगों, बुजुर्गों और शारीरिक रूप से अक्षम श्रद्धालुओं को मिलने की उम्मीद है। कहां से कहां तक बनेगा रोपवे? कब तक पूरा होगा रोपवे का काम?

कहां से कहां तक बनेगा रोपवे?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार रोपवे के जरिए ताराकोट मार्ग को वैष्णो देवी मुख्य भवन से जोड़ दिया जाएगा। दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार श्री वैष्णो माता श्राइन बोर्ड ने जिस रोपवे परियोजना को मंजूरी दी है, उसमें जो श्रद्धालु परंपरागत मार्ग से ही वैष्णो देवी भवन तक आते हैं, उन्हें इस रोपवे का फायदा होगा।
ताराकोट से सांझीछत तक लगभग 13.5 किमी लंबे रास्ते के लिए रोपवे का निर्माण किया जाएगा। पारंपरिक मार्ग से आने वाले श्रद्धालु ताराकोट से सांझीछत तक 13.5 किमी का रास्ता रोपवे से मात्र 6 से 8 मिनटों में ही पूरा कर लेंगे। अब तक इस रास्ते को पैदल, घोड़ा-खच्चर से पूरा करने में घंटों का समय लग जाता था। इसके बाद सांझीछत से भवन तक की चढ़ाई का रास्ता वे चाहे तो पैदल या फिर घोड़े-खच्चर से पूरा कर सकते हैं।
कितनी होगी लागत?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस रोपवे परियोजना का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध जताया जा रहा था लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए और स्थानीय लोगों की चिंताओं को मद्देनजर रखते हुए ही वैष्णो देवी में रोपवे परियोजना को पूरा किया जाएगा। बताया जाता है कि इस परियोजना को पूरा करने में लगभग ₹350 करोड़ की लागत आने वाली है।

श्रद्धालु बादलों के बीच से होकर आसानी, सुरक्षित तरीके और कम समय में माता वैष्णो देवी के भवन तक का रास्ता पूरा कर सकेंगे जिससे दिव्यांग और बुजूर्ग श्रद्धालुओं को तो सुविधा होगी ही, साथ में पैदल चढ़ाई मार्ग पर भी भीड़ कम होने की संभावना जतायी जा रही है।
कब तक होगा पूरा?
इस रोपवे परियोजना को पूरा करने में लगभग 2 सालों का समय लग सकता है। उम्मीद जतायी जा रही है कि श्रद्धालु वर्ष 2026 तक प्राकृतिक नजारों का आनंद उठाते हुए रोपवे की रोमांचक सवारी का लाभ वैष्णो देवी में उठा सकेंगे। बताया जाता है कि परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को सौंपी गयी है। कंपनी ने रोपवे बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। बाण गंगा से कुछ आगे ताराकोट मार्ग के प्रवेश द्वार के पास केबल कार के लिए प्लेटफार्म बनाने का काम शुरू हो चुका है।
इसके साथ ही ताराकोट लंगर क्षेत्र, हिमकोटी और पंछी क्षेत्र में भी काम चल रहा है। रोपवे परियोजना का दूसरा प्लेटफार्म सांझीछत में बनाया जा रहा है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस परियोजना की वजह से करीब ढाई हजार पेड़ों को काटना पड़ेगा, लेकिन श्री वैष्णो देवी माता श्राइन बोर्ड साथ ही साथ वृक्षारोपण भी करेगा।
वैष्णो देवी रोपवे परियोजना की विशेषताएं
- रोपवे का पहला प्लेटफार्म ताराकोट मार्ग के प्रवेश द्वार के पास और दूसरा सांझीछत में बनाया जा रहा है।
- इस रोपवे की लंबाई करीब ढाई से 3 किमी होगी।
- पूरे रास्ते में केबल कारों के आने-जाने के लिए 15 टावर लगाए जाएंगे। इन टावरों को लगाने का काम शुरू हो चुका है।
- रोपवे बनाने वाली कंपनी के पास ही अगले 25-30 सालों तक इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी होगी।
- इस रोपवे परियोजना में 50 आधुनिक केबल कार चलेंगे जिन्हें ऑस्ट्रिया से मंगाया जाएगा।

श्री वैष्णो देवी माता श्राइन बोर्ड के सीईओ अंशुल गर्ग के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि रोपवे परियोजना के पहले चरण में भवन से भैरव घाटी तक केबल कार को शुरू किया गया था। अब दूसरे चरण में कटरा से सांझीछत तक केबल कार परियोजना का निर्माण शुरू किया गया है। स्थानीय लोगों के सुझाव से ताराकोट मार्ग पर केबल कार प्लेटफार्म से पारंपरिक मार्ग पर चरण पादुका मंदिर क्षेत्र तक लिंक रोड बनाया जाएगा।
बता दें, हर साल वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। माता वैष्णो देवी के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या में दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालु भी होते हैं, जिनकी सुविधा के लिए ही इस परियोजना को शुरू किया गया है।



Click it and Unblock the Notifications













