हर साल की तरह इस साल भी 1 जून को विश्व धरोहर फूलों की घाटी को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। उत्तराखंड में लगभग 87.50 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले वैली ऑफ फ्लावर्स को हर साल 1 जून को खोला जाता है जिसे 31 अक्टूबर को फिर बंद कर दिया जाता है।

इस दौरान पर्यटक वैली ऑफ फ्लावर्स में खिलने वाली 600 से अधिक फुलों की प्रजातियों का दीदार करते हैं। इन फूलों की खुशबू घाटी से लगभग 3 किमी दूर बसे गांवों तक फैलती है। वैली ऑफ फ्लावर्स की ट्रेकिंग के 5 दिनों की पूरी हम योजना बता रहे हैं।
बता दें, फुलों की घाटी सड़क मार्ग से पुलना तक जुड़ी हुई है और आगे का 13 किमी रास्ता आपको चढ़ाई करके ही जाना पड़ेगा। गोविंद घाट पुलना से 4-5 किमी दूर स्थित एक प्रमुख स्थान है, जो उत्तराखंड समेत देश के अन्य मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान की ट्रेकिंग के रुट मैप के बारे में बताते हैं :
ऋषिकेश से गोविंद घाट :

वैली ऑफ फ्लावर्स की ट्रेकिंग शुरू करने का पहले दिन आपको ऋषिकेश से गोविंद घाट पहुंचना होगा। गोविंद घाट वैली ऑफ फ्लावर्स का बेस कैंप है। अभी चार धाम यात्रा चल रही है। इसलिए ऋषिकेश से गोविंद घाट के लिए आपको ढेर सारी बसें मिल जाएंगी। बद्रीनाथ जाने वाली किसी भी बस से आप ऋषिकेश से गोविंद घाट पहुंच सकते हैं।
गोविंद घाट से पुलना :

दूसरे दिन आपको गोविंद घाट से घांगरिया पहुंचना होगा। इसके लिए आपको पहले गोविंद घाट से पुलना जाना होगा। 5-6 किमी का यह पहाड़ी रास्ता है जिसके लिए आपको गोविंद घाट में टैक्सी मिल जाएगी। 50-60 रुपये किराया देकर आप आसानी से पुलना पहुंच जाएंगे। पुलना से ही वैली ऑफ फ्लावर्स के लिए ट्रेक की शुरुआत होती है। पुलना से घांगरिया तक 13 किमी का रास्ता आपको ट्रेकिंग करना पड़ेगा।
पुलना से घांगरिया और फूलों की घाटी :

पुलना से घांगरिया तक के रास्ते भर में सुन्दर वाटर फॉल्स मिलेंगे। पहाड़ों पर बनी छोटी-छोटी पगडंडियों से होकर लोगों को आगे बढ़ने में कोई परेशानी नहीं होती है। घांगरिया में आपको रुकने के लिए कैंप, टेंट, गुरुद्वारा और होटल मिल जाएंगे। घांघरिया में चेकपोस्ट होता है जिसे पार करते ही आप फूलों की घाटी में दाखिल हो जाते हैं। घांघरिया से वैली ऑफ फ्लावर्स तक के लिए आपको 6-8 किमी की चढ़ाई करनी होगी। लेकिन ध्यान रहे फूलों की घाटी से आपको शाम को 5 बजे से पहले बाहर निकल जाना होगा क्योंकि यह चेकपोस्ट उसके बाद बंद हो जाता है।
फूलों की घाटी :

विशाल फूलों की घाटी में कई तरह के दुर्लभ फूल आप देख सकेंगे। इन फूलों की खुशबू करीब 3 किमी दूर बसे गांवों तक आती रहती है। वैली ऑफ फ्लावर्स से वापस लौटते समय आप चाहे तो सप्तर्षी पर्वत की घाटी में बने श्रीलोकपाल हेमकुंड झील देखने जा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे, लगभग 6 किमी की यह एक कठिन चढ़ाई है। यहां से आप घांघरिया जा सकते हैं और वहां से गोविंदघाट होते हुए ऋषिकेश पहुंच जाएंगे।



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