कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर पवित्र काशी नगरी में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। गंगा स्नान के लिए वाराणसी में रात से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। मिली जानकारी के अनुसार सुबह 9 बजे तक वाराणसी की गंगा में लाखों लोगों ने आस्था की पवित्र डूबकी लगायी। सोमवार को काशी में देव दिवाली भी मनायी जाएगी। सोमवार की भोर से ही श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ गंगा स्नान कर पूण्य और देवी-देवताओं से आर्शीवाद की प्राप्त किया।

काशी में पवित्र गंगा स्नान के महत्व के बारे में दशाश्वमेध घाट तीर्थ पुरोहित, गंगोत्री सेवा समिती, अजय कुमार तिवारी ने कहा, "कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशीवासियों का मन हर्षोल्लास से भरा रहता है। इस दिन माताएं-बहनें और भगवान की पूजा अर्चना करने वाले लोग स्नान करने के बाद देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। वे उनसे आर्शीवाद की प्राप्ति और मंगल कामना करते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "काशी में गंगा स्नान को लेकर एक अन्य मान्यता काफी प्रचलित है। इस मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ और अन्य देवी-देवतागण गंगा स्नान करते हैं।

उसके बाद सभी माताएं-बहनें और अन्य काशीवासी स्नान करते हैं। आज का दिन काशीवासियों के लिए और भी खास इस वजह से भी होता है क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा को बनारसवासी देव दीपावली के नाम से भी मनाते हैं। सिर्फ काशीवासी ही नहीं बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी इस दिन अपने देवी-देवताओं का श्रृंगार दीपों से कर देव-दीपावली मनाते हैं।"

मिली जानकारी के अनुसार रविवार की रात से ही बनारस में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो चुका था जो दिन में सूरज चढ़ने के काफी देर बाद तक जारी रहा। बताया जाता है कि सुबह 9 बजे तक वाराणसी में लगभग 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र में आस्था की डूबकी लगायी थी। वाराणसी के चौबेपुर इलाके के कैथी में स्थित मार्कण्डेय महादेव मंदिर और रामेश्वर इलाके में स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई है। श्रद्धालु गंगा और वरुणा नदी में स्नान करने के बाद भगवान भोलेनाथ का दर्शन कर रहे हैं। इन मंदिरों के अलावा श्री संकट मोचन मंदिर, काल भैरव मंदिर और दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर समेत काशी के अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं द्वारा दर्शन पूजन जारी है।

काशी में प्रमुख रुप से दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट समेत सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। गंगा नदी में स्नान करने के बाद श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भी आते हैं। ऐसे में श्री काशी विश्वनाथ धाम में भी भीड़ देखने को मिल रही है। मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है। इसी तरह वाराणसी के चौबेपुर इलाके के कैथी में स्थित मार्कण्डेय महादेव मंदिर और रामेश्वर इलाके में स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई है।
देवी-देवता काशी में मनाते हैं देव दिवाली

काशी में कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा नदी में स्नान करने और देव दीपावली मनाने को लेकर कई मान्यताएं हैं लेकिन इनमें भी सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार बताया जाता है कि आदिकाल में त्रिपुरासुर नामक एक राक्षस के आतंक से देवी देवता काफी परेशान थे। अंत में भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में अर्धनारीश्वर का रूप धारण करके त्रिपुरासुर राक्षस का वध कर दिया। इसी राक्षस का वध करने के कारण भगवान भोलेनाथ को त्रिपुरारी के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि त्रिपुरासुर का वध करने के बाद देवी देवता काफी प्रसन्न हुए और स्वर्ग से उतरकर भगवान शंकर के सबसे प्यारी नगरी काशी में आए।
सोमवार की दोपहर से श्रद्धालु गंगा घाटों पर देव दिवाली का उत्सव मनाने की तैयारी में जुट जाएंगे। बताया जाता है कि इस साल देव दिवाली पर बनारस के अर्द्धचंद्राकार घाटों को 12 लाख से अधिक दीयों से जगमगा दिया जाएगा, जिसमें से लगभग 1 लाख दीये गाय के गोबर से बने होंगे और बाकी मिट्टी के बने होंगे।
अगर आप भी वाराणसी की देव दिवाली में शामिल होने वाले हैं तो घाटों पर पहुंचने का सही समय और बेस्ट घाट समेत पार्किंग और ट्रैफिक के इंतजाम के बारे में Details में जानना है तो NativePlanet का यह आर्टिकल जरूर पढ़े।
NativePlanet की पूरी टीम की तरफ से सभी पाठकों को कार्तिक-पूर्णिमा और देव-दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं!



Click it and Unblock the Notifications














