काशी की अनोखी मसान होली को देखने के लिए लाखों का हुजूम उमड़ा। इस भीड़ में जितनी संख्या में स्थानीय लोग थे, उतनी ही संख्या में देसी और विदेशी पर्यटकों ने भी इस अद्भूत होली में हिस्सा लिया। रंगभरी एकादशी के अगले दिन वाराणसी की मसान होली 21 मार्च को मनायी गयी। यह होली खास तौर पर महादेव के भक्तों के लिए काफी अधिक मायने रखती है।

हो भी क्यों न...माता गौरा का गौना करवाकर काशी वापस लौटने के बाद बाबा विश्वनाथ के साथ सभी देव-देवियों, मनुष्य, पशु-पक्षियों से लेकर हर किसी ने तो होली खेल ली लेकिन भूत-पिशाच और महादेव के गण ही होली खेलने के इस मौके से चुक गये। इसीलिए तो, मान्यतानुसार रंगभरी एकादशी के अगले दिन महादेव खुद पहले हरिश्चंद्र घाट और उसके बाद मणिकर्णिका घाट पर भूत-पिशाच और अपने गणों के साथ खेलते हैं धधकती चिताओं के भस्म से होली...मसान होली।
आइए वाराणसी में खेली गयी मसान होली की कुछ खास तस्वीरों पर डालते हैं एक नजर

1. मणिकर्णिका घाट पर नहीं थी पैर रखने की भी कोई जगह।

2. महादेव के भक्तों पर गुलाल की तरह भस्म उड़ाते नागा साधु।

3. भक्ति का अनूठा तरीका : अपने प्रिय भगवान के रंग-रूप में रंगा एक भक्त।

4. एक तरफ धधक रही चिता तो दूसरी ओर मसान होली खेलने में व्यस्त हैं लोग।

5. बनारस की मसान होली का विशेषी पर्यटकों ने भी खूब उठाया लुत्फ।

6. चिताओं की राख से ही खेली गयी मसान होली।

7. महादेव और माता पार्वती के रूप में सजे कलाकार।



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