कहा जाता है चिंता चिता समान होती है। लेकिन जब उसी चिता की राख को होली में गुलाल की तरह एक-दूसरे को लगाना शुरू कर दें तब महादेव को भक्तों को किस बात की चिंता। महादेव की नगरी काशी में मनायी जाती है मसान होली। हिंदू धर्म में होली एक ऐसा त्योहार होता है, जिसे देश के हर कोने में मनाया जाता है।
हर जगह भले ही इसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता हो लेकिन इसे रंग-बिरंगे गुलाल से ही खेला जाता है। लेकिन काशी संभवतः एकमात्र ऐसी जगह है, जहां होली गुलाल के साथ-साथ चिता भस्म से भी मनायी जाती है। काशी, जहां जन्म लेने के साथ-साथ मृत्यु को भी बेहद पवित्र माना जाता है।

कब है मसान होली
इस साल मसान होली 21 मार्च को मनायी जाएगी। 20 मार्च को रंगभरी एकादशी मनायी जाएगी जिस दिन माता पार्वती और बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों के साथ होली खेलते हैं। इसके अगले दिन ही बनारस में चिता की राख से मसान होली खेली जाती है।
वाराणसी की मसान होली मथुरा-वृंदावन की फुलों और गुलाल वाली होली से किसी भी तरह से कम नहीं होती है। मसान होली में सिर्फ साधु-सन्यासी और अघोरी ही नहीं बल्कि आम लोग भी शामिल होते हैं। होली के समय देश-विदेश से जो पर्यटक काशी में घूमने आते हैं, वे भी इस समय मसान होली खेलने के पहुंच जाते हैं। बताया जाता है कि काशी की मसान होली का इतिहास 300 सालों से भी पुराना है।

क्यों खेली जाती है भस्म की होली
आपके मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि बाजार में जब इतने रंगों वाले हर्बल से लेकर कई तरह के गुलाल और रंग मिलते हैं, तब लोग चिता के भस्म से होली क्यों खेलते हैं? दरअसल, भस्म महादेव की बेहद प्रिय मानी जाती है। इसलिए अघोरी और शिवभक्त तक, भस्म से अपना श्रृंगार कर महादेव की इसप्रकार पूजा करते हैं। एक अन्य कथा के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन महादेव देवी पार्वती का गौना करवाकर कैलाश लेकर आए थे।
उस दिन देव-देवियों ने उन दोनों के साथ गुलाल की होली खेली थी। लेकिन इस खुशी में भुत-प्रेत, पिशाच और निशाचर आदि महादेव के गण शामिल नहीं हो पाए थे। इसलिए रंगभरी एकादशी के अगले दिन महादेव खुद अपने प्रिय गणों के साथ होली खेलने आए थे और उन्होंने चिता के भस्म से होली खेली थी।

कहां खेली जाएगी मसान होली
बनारस के मणिकर्णिका घाट पर बाबा महाश्मशान नाथ और माता मशान काली की आरती की जाती है। इसके बाद उन्हें चिता भस्म और गुलाल चढ़ाया जाता है, जिसके बाद आम भक्त आपस में गुलाल की तरह एक-दूसरे को चिता भस्म लगाकर मसान होली खेलना शुरू करते हैं। बताया जाता है कि दोपहर के समय जब बाबा विश्वनाथ मणिकर्णिका घाट पर स्नान करने आते हैं, तब भक्त उनके साथ भी चिता भस्म से मसान होली खेलते हैं। बता दें, मसान होली खेलने के लिए खास तौर पर मणिकर्णिका घाट पर 4000 से 5000 किलो लकड़ी जलाई जाती है।



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