» »वीकेंड में निकल पड़िए बेंगलुरू से मैसूर

वीकेंड में निकल पड़िए बेंगलुरू से मैसूर

By: Namrata Shatsri

मैसूर को आधिकारिक तौर पर माइसुरू के नाम से भी जाना जाता है। यह कर्नाटक के सबसे जनसंख्या वाले राज्यों में तीसरे नंबर पर आता है। ये शहर चामुंडी पर्वत की तलहटी में बेंगलुरू से दक्षिण-पश्चिमें 146 किमी दूर स्थित है।

मैसूर तकरीबन 600 साल पहले वोडायर राजवंश की राजधानी हुआ करता था। इसके बाद हैदर अली और टीपू सुल्तान का इस शहर पर कब्जा हो गया था। सांस्कृततिक रूप और उपलब्धियों के कारण इस शहर को कर्नाटक की सांस्कृमतिक राजधानी कहा जाता है।

मैसूर यात्रा के कुछ खुबसूरत स्थल

मैसूर को इसकी प्राचीन संरचनाओं और महलों के लिए भी जाना जाता है जिसमें मैसूर महल और चामुंडी पर्वत जैसे कई नाम शामिल हैं। ये शहर दशहरा उत्सव के लिए प्रसिद्ध है। इस त्योहार की तैयारी यहां एक सप्तांह पूर्व ही शुरु हो जाती हैं।

मैसूर महल से जुड़े 9 दिलचस्प तथ्य!

मैसूर दसारा, मैसूर पेंटिंग के साथ-साथ मैसूर पाक के लिए भी ये शहर लोकप्रिय है। यहां का मैसूर सैंडल सोप, माईसुरू सिल्क साड़ी जैसी कई चीज़ें भी मशहूर हैं।

रूट मैप

रूट मैप

शुरुआती बिंदु : बेंगलुरू

गंतव्य : माइसुरू

आने का सही समय - अक्टूरबर से जून तक

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

वायु मार्ग : मैसूर का अपना एयरपोर्ट है लेकिन यहां कोई कमर्शियल ऑप्रेशन नहीं होता इसलिए निकटतम एयरपोर्ट बेंगलुरू में केंपेगोवड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जोकि यहां से 185 किमी दूर है।

रेल मार्ग : यहां का मुख्य रेलवे स्टेशशन मैसूर जंक्शेन है जोकि शहर के केंद्र में स्थित है और यहां पर शहर के मुख्यट शहरों और राज्यों से नियमित ट्रेनें आती हैं।

सड़क मार्ग : मैसूर पहुंचने का सबसे बेहतर रास्ताि है सड़क द्वारा। इस शहर की सड़क व्ययवस्था काफी दुरुस्त है और यहां के लिए देश के मुख्य़ शहरों से बसें चलती हैं।PC:Christopher Fynn

रूट और समयावधि

रूट और समयावधि

बेंगलुरू से ड्राइविंग कर मैसूर पहुंचने में 150 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। इसके तीन रूट इस प्रकार हैं :

रूट 1 : बैंगलोर - बिदादी - रामनगर - चन्नाेपटना- मंड्या - श्रीरंगपट्टना - एनएच 275 के माध्यम से मैसूर

रूट 2 : बैंगलोर - थटागुनी- कनकपुरा - मलावल्ली - बन्नूर - हरोहल्ली - एनएच 209 के माध्यम से मैसूर

रूट 3 : बैंगलोर - नेलामंगला - सोलूर - कुनीगल - बेलूर - नागमंगला - श्रीरंगपट्टना - एनएच 75 और एनएच 150 ए से मैसूर

अगर आप पहले रूट से जाते हैं तो उसमें आपको एनएच 75 से मैसूर पहुंचने में लगभग 3.5 घंटे का समय लगेगा। इस रूट पर आप रामनंगर, मंड्या और श्रीरंगपटना जैसे शहरों से होकर गुज़रेंगें।

यहां की सड़के व्यंवस्थित हैं और ये रास्ता 150 किमी लंबा है।

अगर आप दूसरे रूट से जाते हैं तो इसमें आपको एनएच 209 से बेंगलुरू से मैसूर तक 160 किमी का सफर तय करने में चार घंटे का समय लगेगा। तीसरे रूट में 188 किमी की दूरी एनएच 75 और एनएच 150 ए से 4.5 घंटे में पूरी होगी।

वीकेंड पर आप मैसूर के लिए ट्रिप प्लान कर सकते हैं। शनिवार की सुबह निकलते हैं तो एक या आधे दिन में आप बेंगलुरू से मैसूर पहुंच जाएंगें। रविवार की सुबह या दोपहर को आप वापस बेंगलुरू आ जाएंगें।PC:Ashwin Kumar

रामनगर और श्रीरंगपटना में कहां रूकें

रामनगर और श्रीरंगपटना में कहां रूकें

बेंगलुरू में ट्रैफिक से बचने के लिए आपको सुबह जल्दीं निकलना पड़ेगा। हाईव पर पहुंचकर आपको खाने के लिए कई विकल्पन मिल जाएंगें।

आप चाहें तो रास्तेई में बिदादी में थट्टे इडली से लेकर रामनगर में कामत लोक रूचि में रूक कर नाश्तेत में गर्मागरम डोसा खा सकते हैं। इससे आपको खूब एनर्जी मिलेगी और फिर इसके बाद आप हसन में लंच कर सकते हैं।

नाश्तेा के बाद आप ऐतिहासिक शहर श्रीरंगपटना के लिए निकल जाएं। ये शहर टूीपू सुल्ताकन की राजधानी हुआ करता था और यहां पर लोकप्रिय मंदिर श्री रंगनाथ स्वांमी और निमिशांबा देवी मंदिर भी हैं। इसके अलावा आप टीपू सुल्तांन का मकबरा, गुंबाज़, दरिया दौलत बाग और त्रिवेणी संगम देख सकते हैं।PC:Prof. Mohamed Shareef

श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर

श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर

जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि ये स्था न भगवान रंगनाथ का है। यहां पर स्थित पांच शिव मंदिरों में से एक श्री रंगनाथ स्वाामी मंदिर भी लोकप्रिय है। एकसाथ इन्हें पंचरंग क्षेत्रम के रूप में जाना जाता है और यहां पर आदिम रंगा की पूजा होती है।pc: Manu narayanan

दरिया दौलत बाग और गुंबज़

दरिया दौलत बाग और गुंबज़

दरिया दौलत बाग के बाद आप गुंबज़ देखने के लिए निकल जाएं। गुंबाज़ हैदर अली, टीपू सुल्तान और उसकी मां फातिमा बेगम का मकबरा है।

इस संरचना को पर्शिया शैली में बनवाया गया है और इसमें बड़े आयातकार के आकार का एक बगीचा भी है जोकि मकबरे तक लेकर जाता है।PC:Brian Snelson

दरिया दौलत बाग टीपू सुल्तान का तत्कालीन ग्रीष्मकालीन महल हुआ करता था। उस सदी की खूबसूरत स्थापत्यन कला की झलक आप इस महल में देख सकते हैं। इस महल में पि‍कनिक मनाने के लिए एक बड़ा सा लॉन है। महल के परिसर के भीतर आप तस्वीेरें भी खिंचवा सकते हैं।

निमिशांबा मंदिर

निमिशांबा मंदिर

मंदिर में पूजी जाने वाली देवी अपने भक्तोंल की मुरादों को एक मिनट में पूरा कर देती हैं। निमिशांबा, देवी पार्वती का ही एक रूप है। यह मंदिर कावेरी नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर को 400 साल पहले मुम्माएदी कृष्ण राज वोडेयर के शासनकाल के दौरान बनवाया गया था। देवी के बिलकुल सामने एक पत्थ र पर श्री चक्र बना हुआ है। इस मंदिर में एक छोटा सा गर्भगृह भी है जिसमें सात कक्ष और विशाल प्रवेख स्तंभ है।PC: official site

मैसूर

मैसूर

मैसूर में देवी चामुंडेश्वारी का प्रसिद्ध मंदिर है जोकि चामुंडी पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर में आप देवी और नंदी के दर्शन कर सकते हैं।

यहां से आपको पूरे शहर का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देगा। यहां पर महिषासुर की मूर्ति देखना ना भूलें। इस पर्वत पर दो मंदिर हैं जो महाबलेश्वरर और अन्य मंदिर देवी चामुंडेश्वथरी को समर्पित है।

pc:Ramesh NG

मैसूर महल

मैसूर महल

इसके अलावा आप यहां मैसूर महल भी देख सकते हैं जोकि आल भी वोडेयार राजवंश के सदस्यो का आधिकारिक आवास है।

इस महल को 1897-1912 के बीच इंडो-सारासेनिक शैली में ब्रिटिश आर्किटेक्टं हेनरी ईर्विन के नेतृतव में बनवाया गया था। इस महल में चौकोर आकार के खंभे और दरबार हॉल में नक्कातशी किए गए स्तं भ हैं।

मैसूर में आप श्री छामराजेंद्र जूलॉजिकल गार्डन, सैंट फिलोमिना चर्च, करनणजी झरल, वृंदावन गार्डन, केआरएस बांध और जंगनमोहन पैलेस देख सकते हैं।PC:sanchantr

Please Wait while comments are loading...