दुर्गा पूजा और दिवाली बीत चुकी है। महानगर में सर्दियों ने भी दस्तक दे दी है। और त्योहारों के सीजन में अब क्रिसमस का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। सर्दियों के शुरुआत के साथ ही आता है पिकनिक और घूमने-फिरने का सीजन। कोलकाता के आसपास घुमने-फिरने की कई जगहें हैं जिनमें हुगली जिले में स्थित बैंडेल चर्च प्रमुख है। इस चर्च का इतिहास करीब 423 साल पुराना है। इस चर्च में सैंकड़ों साल पुराने एक जहाज का मस्तूल सुरक्षित रखा गया है। लेकिन क्यों?

बैंडेल चर्च का मूल नाम 'चर्च फॉर होली रॉसरी' (Church For Holy Rosary) रखा गया था, जिसे आम बोलचाल की भाषा में बंडेल चर्च के नाम से ही जाना जाता है।
कब हुआ था चर्च का निर्माण?
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार करीब वर्ष 1599 में हुगली नदी के किनारे पूर्तगालियों ने एक उपनिवेश की स्थापना की थी। उपनिवेश बनाने के साथ ही पुर्तगालियों ने प्रार्थना करने के लिए हुगली नदी के किनारे ही एक चर्च का निर्माण भी किया था। कहा जाता है कि किसी कारणवश पुर्तगालियों पर मुगल शासक शाहजहां काफी नाराज हो गये थे। उन्होंने पुर्तगालियों के औपनिवेशिक क्षेत्र पर आक्रमण कर दिया और इस आक्रमण में काफी संख्या में पुर्तगाली और धर्मांतर कर इसाई बने भारतीय मारे गये।

इसके साथ ही हुगली नदी के किनारे बने उस चर्च को भी तोड़ दिया गया। कहा जाता है कि चर्च के पादरी को आगरा ले जाकर उसे हाथी के पैरो तले कुचलकर मारने की सजा सुनायी गयी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से हाथी ने पादरी को कुचलने के बजाए उसे अपनी सूंढ से उठाकर अपनी पीठ पर बैठा लिया। यह देखकर शाहजहां ने पादरी को जीवनदान देने के साथ-साथ हुगली में विशाल जमीन भी दान में दिया, जहां उसी साल वर्तमान बैंडल चर्च का निर्माण किया गया।
चर्च की वास्तुकला
चर्च के मुख्य द्वार के ठीक बाहर यीशु मसीह और मदर मैरी की मूर्ति स्थापित है। चर्च के ठीक ऊपर कमल के एक फूल की आकृति बनी हुई है, जिसके ऊपर नाव की आकृति और उसके ऊपर मदर मैरी की एक मूर्ति स्थापित है। इसके अलावा चर्च परिसर में यीशु मसीह के जीवन से जुड़ी विभिन्न घटनाओं को मूर्तियों व स्कल्पचर के माध्यम से दर्शाया गया है।

चर्च की वास्तुकला पूरी तरह से पुर्तगाली है। चर्च के सबसे ऊपरी तल में मदर मेरी के लिए एक प्रार्थना कक्ष बना हुआ है, जहां मदर मेरी की बहुत सुन्दर तस्वीर रखी हुई है। इस परिसर में पानी का एक छोटा सा कुंड बनाया गया है जिसमें लोग अपनी मन्नत मांगकर सिक्के डालते हैं।
सर्दियों में घूमने के लिए है बेस्ट
बैंडेल चर्च में सबसे अधिक भीड़ क्रिसमस से लेकर नववर्ष तक होती है। चुंकि चर्च के सामने काफी खुला मैदान है, इसलिए गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में यहां लोगों की भीड़ अधिक जमा होती है। सर्दियों के मौसम में खास तौर पर Weekends पर अगर आप हल्की सुनहरी धुप सेंकते हुए घूमने के लिए किसी अच्छी जगह की तलाश कर रहे हैं तो कोलकातावालों के लिए बैंडेल चर्च बेस्ट जगह हो सकती है।

यह ऐसी जगह है जहां आप अपने पार्टनर के साथ या दोस्तों के साथ या फिर पत्नी-बच्चों या परिवार के बड़े बुजूर्ग सभी के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं। सर्दी के दिनों में चर्च के सबसे ऊपर से हल्के कोहरे से घिरे हुगली नदी पर बने जुबली ब्रिज को देखना काफी अच्छा लगता है।
क्यों रखा है सैंकड़ों साल पुराने जहाज का मस्तूल?
बैंडेल चर्च की मुख्य बिल्डिंग से ठीक सामने एक छोटा सा संग्रहालय बना हुआ है, जहां सैंकड़ों साल पुराने एक जहाज का मस्तूल आज भी सुरक्षित रखा हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि एक पुर्तगाली जहाज का कप्तान तूफान में फंसकर रास्ता भटक जाता है।

उस समय वह अपने मन में बोलता है कि अगर वह इस तूफान से सुरक्षित बाहर निकल पाता है तो सामने जो भी चर्च उसे दिखेगा, वह वहां अपने जहाज का मस्तूल दान करेगा। वह जहाज जब किनारे पर पहुंचता है तो उसे सामने बैंडल चर्च दिखाई देता है, जहां उसने अपने जहाज का मस्तूल दान में दिया।
बता दें, मस्तूल एक लंबे खंभे की तरह होता है, जो छोटे जहाज या नावों को स्थिरता से खड़े रखने में मदद करता है। यह खासतौर पर उन नावों या छोटे जहाजों पर पाया जाता है जिनपर पाल लगाया होता है।
कैसे पहुंचे बंडेल?
बंडेल सड़क मार्ग से कोलकाता से सीधा जुड़ा हुआ है। बंडेल तक पहुंचने के लिए कोलकाता में प्राइवेट गाड़ियां किराए पर मिल जाएंगी। लेकिन बंडेल आने का सबसे आसान तरीका रेलमार्ग है। हावड़ा स्टेशन से हावड़ा-बर्दवान, हावड़ा-मेमारी, हावड़ा-बंडेल या हावड़ा-कटवा लाइन की लोकल ट्रेन पकड़कर आप सीधे बंडेल स्टेशन पर पहुंच जाएंगे। बंडेल स्टेशन के बाहर आपको ऑटो या ई-रिक्शा मिल जाएगा, जिससे 15 मिनट का सफर तय कर आप बंडेल पहुंच जाएंगे।
अगर आप यीशु मसीह के सामने प्रार्थना कर मोमबत्ती जलाना चाहते हैं तो बंडेल चर्च के बाहर ही आपको मोमबत्तियों की कई दुकाने मिल जाएंगी, जहां विभिन्न बजट की मोमबत्तियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा चर्च के स्टॉल से आप यीशु मसीह से जुड़ी कई तरह की किताबें भी खरीद सकते हैं।



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